भ्रष्टाचार के खिलाफ गुस्सा, सोशल मीडिया बैन बना ट्रिगर पॉइंट... नेपाल में 9 महीने के Gen-Z आंदोलन की पूरी कहानी

नेपाल में भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद के खिलाफ शुरू हुआ GEN-Z आंदोलन शुरुआत में इंटरनेट और सोशल मीडिया तक ही सीमित था. लेकिन सोशल मीडिया बैन ने प्रदर्शनकारियों को सड़कों पर उतार दिया. प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली इस्तीफा दे चुके हैं, सोशल मीडिया बैन हट चुका है, लेकिन देश में अराजकता की स्थिति बनी हुई है.

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प्रदर्शनकारियों द्वारा नेपाल की संसद में आगजनी के बाद उठता धुआं. (Photo: PTI) प्रदर्शनकारियों द्वारा नेपाल की संसद में आगजनी के बाद उठता धुआं. (Photo: PTI)

दीपक मिश्रा

  • काठमांडू ,
  • 09 सितंबर 2025,
  • अपडेटेड 12:03 AM IST

नेपाल में GEN-Z आंदोलन के कारण प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा है. नेपाल के युवाओं ने यह विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद को लेकर इस साल जनवरी में शुरू किया था, लेकिन सरकार के खिलाफ उनका गुस्सा हाल ही में लगाए गए सोशल मीडिया प्रतिबंध के बाद अचानक फूट पड़ा. 8 और 9 सितंबर को हुई हिंसक झड़पों में कम से कम 22 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हो गए.

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प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन पर हमला कर दिया, जिससे देश में राजनीतिक संकट गहरा गया है. इस आंदोलन की पूरी टाइमलाइन पर नजर डालें तो इसकी जड़ें 2025 की शुरुआत में हैं, जब युवाओं ने सरकारी भ्रष्टाचार और आर्थिक असमानता के खिलाफ सोशल मीडिया पर अभियान चलाना शुरू किया. यह आंदोलन धीरे-धीरे सड़कों पर उतर आया. 

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जनवरी-जुलाई 2025: नेपाल में ऑनलाइन जागरूकता का दौर

आंदोलन के आयोजनकर्ताओं ने इसे GEN-Z रिवोल्यूशन नाम दिया है, जिसमें मुख्य रूप से 18 से 25 साल के युवा शामिल हैं. इस साल जनवरी से युवाओं ने फेसबुक, टिकटॉक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर #EndCorruptionNepal और #YouthForChange जैसे हैशटैग के साथ सरकार विरोधी अभियान शुरू किया. भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे मंत्रियों, नेताओं और अधिकारियों के खिलाफ आवाज उठाया. शुरुआत में यह शांतिपूर्ण ऑनलाइन मूवमेंट था, लेकिन जुलाई तक छोटे-छोटे स्थानीय प्रदर्शन होने लगे, खासकर काठमांडू और पोखरा में. युवाओं ने बेरोजगारी और सरकारी नीतियों को युवा-विरोधी बताते हुए वीडियो शेयर किए.

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अगस्त 2025: सोशल मीडिया बैन बना आंदोलन का ट्रिगर पॉइंट

अगस्त के मध्य में नेपाल सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप समेत 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा दिया. सरकार ने कहा कि ये प्लेटफॉर्म्स रजिस्ट्रेशन नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, इसलिए इन्हें प्रतिबंधित किया गया है. युवाओं ने सरकार के इस कदम को भ्रष्टाचार के आरोपों को दबाने और विरोध अभियानों को रोकने के रूप में देखा. GEN-Z ने इसे 'डिजिटल डिक्टेटरशिप' करार दिया. 15 अगस्त को काठमांडू में पहला बड़ा प्रदर्शन हुआ, जहां सैकड़ों युवा सड़कों पर उतरे. पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया. सोशल मीडिया पर वायरल पुलिस कार्रवाई के वीडियो ने आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर फैला दिया.

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1-7 सितंबर 2025: विरोध प्रदर्शनों ने पकड़ा जोर

सितंबर की शुरुआत में सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज हो गए. 1 सितंबर को काठमांडू के तहतीद क्षेत्र में युवाओं ने भ्रष्टाचार के खिलाफ मार्च निकाला, जिसमें लगभग 5,000 लोग शामिल हुए. सरकार ने अतिरिक्त पुलिस तैनात की. 5 सितंबर को पोखरा और ललितपुर में भी प्रदर्शन हुए, जहां युवाओं ने सरकारी भ्रष्टाचार के सबूत के रूप में दस्तावेज शेयर किए. इस दौरान पुलिस कार्रवाई में 87 लोग घायल हुए. विपक्षी दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) ने सरकार की निंदा की और जांच की मांग की.

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8 सितंबर 2025: प्रोटेस्टर्स पर बल प्रयोग में मौतें

GEN-Z रिवोल्यूशन 7 सितंबर को चरम पर पहुंचा. काठमांडू में हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ नारे लगाते हुए संसद भवन की ओर मार्च किया. पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज के बाद गोलीबारी की, जिसमें कम से कम 22 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए. नेपाल की राजधानी काठमांडू का आसमान धुएं के गुबार से भर गया, क्योंकि गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने आगजनी और तोड़फोड़ शुरू कर दी. विपक्ष ने इसे अनावश्यक बल प्रयोग करार दिया और स्वतंत्र जांच आयोग की मांग की.

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9 सितंबर 2025: बड़े पैमाने पर हिंसा और आगजनी

देशभर में कर्फ्यू जैसे हालात के बीच प्रदर्शन ने हिंसक रूप धारण कर लिया, जिससे देश में राजनीतिक संकट गहरा गया. सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ शुरू हुआ यह आंदोलन अब सरकार गिराने तक पहुंच गया. दबाव बढ़ने पर ओली सरकार ने सोशल मीडिया बैन खत्म कर दिया फिर भी प्रदर्शनकारी शांत नहीं हुए. पीएम ओली ने सेना के कहने पर इस्तीफा दे दिया. उनसे पहले गृह मंत्री रमेश लेखक, कृषि मंत्री राम नाथ अधिकारी, स्वास्थ्य मंत्री प्रदीप पौडेल और राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी के 21 सांसदों ने नैतिक जिम्मेदारी के तहत इस्तीफा दे दिया था. 

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लेकिन प्रदर्शनकारियों ने कर्फ्यू को धता बताते हुए नेपाल के संसद भवन में घुसकर आग लगा दी. नेपाली कांग्रेस कार्यालय, सुप्रीम कोर्ट और कई मंत्रियों के घरों में भी आगजनी और तोड़फोड़ की. पूर्व पीएम पुष्पकमल दाहाल (प्रचंड) और केपी शर्मा ओली के निजी आवास को आग के हवाले कर दिया गया. प्रदर्शनकारियों ने नेपाल वित्त मंत्री विष्णु प्रसाद पौडेल को सड़क पर दौड़ाकर पीटा. उग्र भीड़ ने पूर्व प्रधानमंत्री झालानाथ खनल के घर में आग लगा दी, जिसमें जलकर उनकी पत्नी राजलक्ष्मी चित्रकार की मौत हो गई. 

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प्रदर्शनकारियों ने विदेश मंत्री अर्जु राणा देउबा के घर में घुसकर उन्हें और उनके परिवार को पीटा. राष्ट्रपति भवन (राष्ट्रपति भवन) और उप-राष्ट्रपति के घरों के आसपास भी हिंसा हुई. काठमांडू में नेपाल के प्रमुख मीडिया हाउस कांतिपुर पब्लिकेशंस (अखबार और टीवी चैनल) की इमारत को आग लगा दी गई. प्रदर्शनकारियों ने इसे 'सरकार की कठपुतली' बताया. प्रदर्शनकारियों ने काठमांडू के मेयर बालेन शाह (रैपर से राजनेता बने) को नेपाल का अंतरिम प्रधानमंत्री बनाने की मांग की है. बालेन शाह ने कहा कि जब तक संसद भंग नहीं होगी, तब तक सेना से कोई बातचीत नहीं होगी.

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