ग्राउंड रिपोर्ट: लेबनान में डर के माहौल के बाद सीरिया जा रहे लोग, बॉर्डर पर करंसी चेंज कराते दिखे पीड़ित

हिज्बुल्लाह के चीफ हसन नसरल्लाह की मौत के बाद पूरे लेबनान में डर का माहौल है. बेरूत में हिज्बुल्लाह के हेडक्वार्टर पर इजरायली बमबारी से मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है. स्थानीय लोग पलायन करने को मजबूर हैं. ज्यादातर लोग सीरिया जा रहे हैं.

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लेबनान में डर के माहौल के बाद सीरिया जा रहे लोग लेबनान में डर के माहौल के बाद सीरिया जा रहे लोग

अशरफ वानी

  • नई दिल्ली,
  • 29 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 11:23 PM IST

हिज्बुल्लाह के चीफ हसन नसरल्लाह की मौत के बाद पूरे लेबनान में डर का माहौल है. बेरूत में हिज्बुल्लाह के हेडक्वार्टर पर इजरायली बमबारी से मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है. स्थानीय लोग पलायन करने को मजबूर हैं. ज्यादातर लोग सीरिया जा रहे हैं. बड़ी तादाद में महिलाएं बच्चों को लेकर सीरिया बॉर्डर पार कर रही हैं. लेकिन सीरिया में रहने के लिए और वहां किसी भी तरह के खर्चे के लिए स्थानीय करंसी का होना जरूरी है. इस बीच आज तक सीरिया बॉर्डर पर पहुंचकर वहां से आंखो देखा हाल बता रहा है. हमारे संवाददाता अशरफ वानी ने बॉर्डर से करंसी चेंज कराने को लेकर ग्राउंड रिपोर्ट की.  

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सीरिया की करंसी लेबनान से सस्ती है. जो भी लोग लेबनान से सीरिया जा रहे हैं वो बॉर्डर पर करंसी को चेंज करा रहे हैं. करंसी चेंज कराने के लिए लोगों को बहुत ज्यादा दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ रहा है. पहचान पत्र दिखाते ही करंसी बदलने में मदद मिल रही है. सीरिया के लोग अगर लेबनान में जाते हैं और लेबनान के लोग अगर सीरिया में आते हैं तो दोनों ओर की जनता करंसी चेंज करा रही है. इससे लोकल मार्केटिंग आसान हो जाती है. सीरिया को सुरक्षित जगह मानते हुए बड़ी संख्य में लोग पलायन कर रहे हैं.

इस संघर्ष में ईरान और अमेरिका के शामिल होने की संभावनाएं लगाई जा रही हैं, जबकि इजरायल लेबनान की राजधानी बेरूत और अन्य इलाकों में हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर बमबारी कर रहा है. हिज्बुल्लाह ने नसरल्लाह की मौत के बाद से ही इजरायल के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया है. युद्ध के बीच पिछले तीन दिनों के दौरान एक लाख से ज्यादा लोग लेबनान-सीरियाई बॉर्डर को पार कर चुके हैं.

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लेबनान में नहीं है कोई सुरक्षित ठिकाना?
लेबनान-सीरियाई बॉर्डर पार करने वाले लोगों में न केवल लेबनान के निवासी, बल्कि सीरियाई युद्ध के दौरान यहां आए शरणार्थी भी अब अपने देश की ओर लौट रहे हैं. क्योंकि वह जानतें है कि यह इजरायल के विरुद्ध युद्ध है और वो सोचते हैं कि अब लेबनान में किसी भी तरह का कोई भी सुरक्षित ठिकाना नहीं है. वहीं, लेबनान का असद शासन पहले से ही हिज्बुल्लाह और उसके फाइटरों के समर्थन में है. क्योंकि सीरिया युद्ध के दौरान हिज्बुल्लाह ने न केवल बशर अल असद की मदद की थी और उनकी सरकार को भी बचाते हुए उनकी सत्ता में फिर से वापसी कराई थी. अब वह हिज्बुल्लाह के कर्ज को चुकाने की कोशिश कर रहा है. इस मुश्किल वक्त में हिज्बुल्लाह के प्रति भी इस तरह की जिम्मेदारी है.  

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