मिडल ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रही जंग का असर अब पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों तक पहुंचने लगा है. गिलगित-बाल्टिस्तान के वरिष्ठ राजनेता शफका अली इंकलाबी ने इस गंभीर स्थिति पर चिंता जताई है.
इंकलाबी ने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों और ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की शहादत के बाद पैदा हुए हालात का सीधा असर पाकिस्तान, विशेषकर गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों पर पड़ा है.
शफका अली इंकलाबी के मुताबिक, मिडिल-ईस्ट संकट का सबसे बड़ा और तत्काल प्रभाव पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में देखने को मिला है. उन्होंने बताया कि इस बार पेट्रोल की कीमत में अचानक 55 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी कर दी गई है.
ईंधन की कीमतों ने बढ़ाई मुश्किल
ईंधन की कीमतों में हुए इस इजाफे ने स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों को मुश्किल में डाल दिया है. शफका अली इंकलाबी ने बताया कि पेट्रोल महंगा होने से माल ढुलाई और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का किराया बढ़ गया है. जरूरी सामान जैसे फल, सब्जियां और दूसरी चीजों के दाम भी आसमान छूने लगे हैं. यहां तक कि स्कूल भी बंद हो गए हैं.
पहले से ही आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों के लिए अब घर चलाना मुश्किल हो गया है.
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गिलगित-बाल्टिस्तान जैसे दूरदराज के इलाकों में, जहां सामान की आपूर्ति पूरी तरह से सड़क परिवहन पर निर्भर है, वहां 55 रुपये की बढ़ोतरी एक बड़े आर्थिक संकट का संकेत दे रही है.
भारत भी झेल रहा संकट
मिडिल-ईस्ट में चल रही जंग का खमियाजा कहीं न कहीं पूरी दुनिया भुगत रही है. भारत में भी एलपीजी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है. मिडिल-ईस्ट संकट के चलते पहले घरेलू गैस 60 रुपये और कमर्शियल गैस 115 रुपए महंगी हुई थी. जबकि अब एलपीजी की आपूर्ति करना मुश्किल हो गया है, जिसके चलते कई राज्यों में होटलों पर ताला लग गया है और कई होटल बंद होने की कगार पर हैं.
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