पाकिस्तानियों का जापान में अजब कारनामा! बिना परमिशन बनाई मस्जिद, अब गिराने की तैयारी

जापान के कावागोए शहर में पाकिस्तानी समुदाय द्वारा बनाई गई मस्जिद बिना स्थानीय प्रशासन की अनुमति के बनी है, जिससे विवाद खड़ा हो गया है. प्रशासन ने मस्जिद को ध्वस्त करने की चेतावनी दी है और मामले की जांच कर रहा है.

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मस्जिद के उद्घाटन में जापान में पाकिस्तान के राजदूत अब्दुल हमीद भी मौजूद रहे थे मस्जिद के उद्घाटन में जापान में पाकिस्तान के राजदूत अब्दुल हमीद भी मौजूद रहे थे

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 जून 2026,
  • अपडेटेड 7:46 AM IST

जापान के सैतामा स्टेट के कावागोए शहर में बनाई गई मस्जिद विवादों में आ गई है. पाकिस्तानी कम्यूनिटी की ओर से बनाई गई इस मस्जिद की शुरुआत जापान में पाकिस्तान के राजदूत अब्दुल हमीद की मौजूदगी में हुई थी. अब इस मस्जिद पर ध्वस्तीकरण का खतरा मंडरा रहा है. स्थानीय प्रशासन ने पाया है कि मस्जिद बिना परमिशन के बनाई गई थी और इसमें कानूनी सहमति भी नहीं ली गई थी. 

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कावागोए सिटी हॉल ने इस मामले में स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा है कि जिस क्षेत्र में मस्जिद का निर्माण किया गया है, वह शहरी विकास नियंत्रण क्षेत्र (Urban Development Control Area) में आता है. इस तरह के एरिया में स्पेशल परमिशन के बिना किसी भी तरह का निर्माण कार्य बैन रहता है. 

स्थानीय प्रशासन की मंजूरी के बिना हुआ निर्माण

सिटी हॉल की ओर से जारी ऑफिशियल स्टेटमेंट में कहा गया है कि 'संबंधित भवन का निर्माण सिटी प्लानिंग एक्ट के तहत आवश्यक अनुमति प्राप्त किए बिना किया गया है. यह निर्माण स्थानीय प्रशासन की मंजूरी के बिना हुआ, जो कानून का उल्लंघन है.'

प्रशासन के अनुसार, निर्माण से जुड़े लोगों को कानूनी प्रक्रिया और जरूरी सुधारात्मक कदमों के बारे में काफी समय तक गाइडलाइन दी गई थी. इसके बावजूद नियमों का पालन नहीं किया गया. अब संबंधित पक्षों की ओर से मस्जिद को ध्वस्त करने की मांग उठाई जा रही है, और इन मांगों का रीव्यू किया जा रहा है. 

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पाकिस्तान के दूतावास ने खुद को मामले से अलग किया

इस विवाद ने पाकिस्तान के दूतावास को भी असहज स्थिति में ला दिया है. मामले के सामने आने के बाद टोक्यो स्थित पाकिस्तान दूतावास ने सार्वजनिक रूप से खुद को इस परियोजना से अलग बताते हुए कहा कि उसका किसी भी ऐसे निर्माण कार्य से कोई संबंध नहीं है जो जापानी कानूनों का पालन नहीं करता हो.

दूतावास ने 1 जून को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बयान जारी करते हुए जापान में रहने वाले पाकिस्तानी समुदाय से अपील की कि वे सभी मामलों में जापानी कानूनों का पूर्ण रूप से पालन करें, विशेष रूप से धार्मिक स्थलों के निर्माण के संबंध में. दूतावास ने कहा, “स्थानीय प्रशासन से आवश्यक अनुमति प्राप्त किए बिना किसी भी निर्माण परियोजना की शुरुआत नहीं की जानी चाहिए.”

पाकिस्तानी दूतावास ने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के राजदूत अब्दुल हमीद ने 3 अप्रैल को मस्जिद के उद्घाटन समारोह में इसलिए हिस्सा लिया था क्योंकि उन्हें बताया गया था कि निर्माण के लिए जापानी कानूनों के तहत आवश्यक सभी अनुमतियां प्राप्त कर ली गई हैं.

कावागोए में 3 अप्रैल 2026 को ही हुआ मस्जिद का उद्घाटन कार्यक्रम

31 मई को जारी एक अन्य बयान में दूतावास ने दोहराया कि किसी भी परियोजना को शुरू करने से पहले स्थानीय प्रशासन से जरूरी मंजूरी लेना अनिवार्य है. बयान में कहा गया, 'पाकिस्तान दूतावास का किसी भी ऐसी परियोजना से कोई संबंध नहीं है जो स्थानीय कानूनों के अनुरूप नहीं है. कावागोए में 3 अप्रैल 2026 को आयोजित कार्यक्रम में राजदूत ने उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर भाग लिया था, जिसमें बताया गया था कि सभी आवश्यक अनुमति प्राप्त कर ली गई हैं.'

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दूतावास ने समुदाय के लोगों से स्थानीय प्रशासन के साथ सहयोग करने और जापानी कानूनों का सम्मान करने की भी अपील की. साथ ही कहा कि इस प्रकार की परियोजनाओं से जुड़ी कानूनी जानकारी न केवल समुदाय के सदस्यों बल्कि आसपास रहने वाले स्थानीय निवासियों तक भी पहुंचाई जानी चाहिए.

मस्जिद के भविष्य पर संकट, ध्वस्त किए जाने का मंडरा रहा खतरा 

उधर, कावागोए प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि वह मामले पर करीबी नजर बनाए हुए है और विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय कर आगे की कार्रवाई पर विचार कर रहा है. अधिकारियों का कहना है कि चूंकि निर्माण बिना अनुमति के किया गया था, इसलिए यह भी स्पष्ट नहीं है कि मस्जिद के निर्माण से पहले आसपास के निवासियों को पर्याप्त जानकारी दी गई थी या नहीं.

यही पहलू इस विवाद को और अधिक संवेदनशील बना रहा है. जापान में किसी भी बड़े निर्माण कार्य से पहले स्थानीय समुदाय और पड़ोसियों से संवाद स्थापित करना सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है. विशेष रूप से ऐसे ढांचों के मामले में, जो किसी इलाके की सामाजिक या सांस्कृतिक संरचना को प्रभावित कर सकते हैं.

फिलहाल मस्जिद अपने स्थान पर मौजूद है, लेकिन उसका भविष्य अनिश्चित बना हुआ है. कावागोए नगर प्रशासन और संबंधित निकायों के निर्णय पर ही यह निर्भर करेगा कि मस्जिद को कानूनी मान्यता देकर बचाया जाएगा या फिर उसे ध्वस्त कर दिया जाएगा. 
 

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