'ईरान ने क्रॉस की रेड लाइन तो हम अकेले हमला करेंगे', इजरायल ने अमेरिका को दी चेतावनी

इजरायल ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान उसके तय किए गए ‘बैलिस्टिक मिसाइल रेड लाइन’ को पार करता है, तो वह अमेरिका की मदद के बिना भी अकेले सैन्य कार्रवाई करेगा. इजरायली रक्षा अधिकारियों ने अमेरिकी नेतृत्व को स्पष्ट किया कि ईरान का मिसाइल कार्यक्रम इजरायल के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा है.

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इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. (Photo: Reuters) इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • तेल अवीव,
  • 09 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:49 PM IST

इजरायल ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ईरान उसके तय किए गए बैलिस्टिक मिसाइल ‘रेड लाइन’ को पार करता है, तो वह अमेरिका की भागीदारी के बिना भी अकेले सैन्य कार्रवाई कर सकता है. इजरायली सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, यह संदेश हालिया उच्चस्तरीय बातचीत के दौरान अमेरिकी अधिकारियों को दे दिया गया है. हालांकि, इजरायल का कहना है कि फिलहाल ईरान उस सीमा तक नहीं पहुंचा है, लेकिन उसकी गतिविधियों पर लगातार कड़ी नजर रखी जा रही है.

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इजरायली रक्षा अधिकारियों का मानना है कि ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम इजरायल के अस्तित्व के लिए एक गंभीर और प्रत्यक्ष खतरा बन चुका है. इसी कारण हाल के हफ्तों में अमेरिका के साथ हुई बैठकों में ईरान की मिसाइल प्रोडक्शन कैपेबिलिटी और उससे जुड़े बुनियादी ढांचे को ध्वस्त करने की विस्तृत योजनाएं साझा की गईं. इन योजनाओं में प्रमुख निर्माण इकाइयों, स्टोरेज साइट्स और सप्लाई नेटवर्क पर टारगेटेड अटैक शामिल बताए गए हैं.

अधिकारियों ने दो टूक कहा कि इजरायल अपना 'फ्रीडम ऑफ एक्शन' सुरक्षित रखेगा और किसी भी हालत में ईरान को ऐसे रणनीतिक हथियारों को दोबारा विकसित करने या तैनात करने की अनुमति नहीं देगा, जो इजरायल और उसके पड़ोसी देशों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं. एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी ने मौजूदा हालात को ऐतिहासिक अवसर बताते हुए कहा कि यह समय ईरान की मिसाइल संरचना को निर्णायक रूप से कमजोर करने का है.

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इसी बीच, इजरायली अधिकारियों के भीतर इस बात को लेकर चिंता है कि ट्रंप ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य कार्रवाई का विकल्प चुन सकते हैं. अधिकारियों का कहना है कि अगर अमेरिका यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ किए गए अभियानों की तरह कुछ चुनिंदा ठिकानों पर हमले कर मिशन पूरा घोषित कर देता है, तो इससे ईरान की मुख्य सैन्य क्षमताएं सुरक्षित रह सकती हैं और इसका खामियाजा इजरायल को भुगतना पड़ सकता है. इन घटनाक्रमों के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आगामी अमेरिका दौरे को भी अहम माना जा रहा है. 

इस दौरे में उनके साथ इजरायली वायुसेना के भावी कमांडर ब्रिगेडियर जनरल ओमर टिशलर भी जाएंगे, जो वर्तमान आईडीएफ चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर का प्रतिनिधित्व करेंगे. बता दें कि फिलहाल वॉशिंगटन में इजरायल का कोई डिफेंस अटैशे तैनात नहीं है. वहीं, नेतन्याहू ने रविवार को एक टिकटॉक वीडियो दोबारा साझा किया, जिसमें ईरान के खिलाफ संभावित अमेरिकी नौसैनिक हमलों पर चर्चा की गई थी. वीडियो में अरब सागर में तैनात अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और उसके कैरियर स्ट्राइक ग्रुप का भी जिक्र किया गया है, जिससे क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के संकेत मिलते हैं.

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