अमेरिका और इजरायल दशकों से करीबी सहयोगी रहे हैं, लेकिन ईरान युद्ध को लेकर दोनों देशों के बीच बढ़ते मतभेद अब सुरक्षा और खुफिया मामलों तक पहुंचते दिखाई दे रहे हैं. एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका में इजरायल की खुफिया गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ गई है और वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों को संभावित निगरानी से बचने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है.
एनबीसी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया एजेंसी (DIA) ने हाल ही में इजरायल से जुड़े काउंटर-इंटेलिजेंस खतरे का स्तर बढ़ाकर "क्रिटिकल" कर दिया है, जिसका मतलब है कि इजरायल अमेरिकी अधिकारियों को कभी भी निशाना बना सकते हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह फैसला ऐसे समय लिया गया जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान नीति को लेकर मतभेद बढ़ रहे हैं.
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अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इजरायल लंबे समय से जानकारी जुटाने में बेहद आक्रामक माना जाता रहा है. इसी वजह से इजरायल जाने वाले वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों को अक्सर बर्नर फोन, अस्थायी कंप्यूटर और स्पेशल कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है. कई पूर्व राजनयिकों और खुफिया अधिकारियों का कहना है कि संवेदनशील विषयों पर चर्चा होटल के कमरों या अन्य असुरक्षित स्थानों पर करने से भी बचा जाता है.
क्या जासूसी की कोई घटना सामने आई?
रिपोर्ट के मुताबिक, DIA ने सात पन्नों का एक इंटरनल एसेसमेंट डॉक्यूमेंट तैयार किया है, जिसमें इजरायल की जासूसी और तकनीकी निगरानी क्षमताओं को "क्रिटिकल स्तर" का बताया गया है. हालांकि अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि क्या इस दौरान कोई जासूसी घटना सामने आई या नहीं.
अमेरिकी रक्षा और सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल की खुफिया एजेंसियां वाशिंगटन के मध्य पूर्व संबंधी फैसलों और रणनीतियों में विशेष रुचि रखती हैं. सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज की विशेषज्ञ एमिली हार्डिंग ने कहा कि इजरायली खुफिया तंत्र "हाइपर-अग्रेसिव" है और वह यह जानने में बेहद दिलचस्पी रखता है कि अमेरिका क्या योजना बना रहा है.
पेंटागन के आरोपों को इजरायल ने किया खारिज
इजरायल के बेंजामिन नेतन्याहू शासन ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. वॉशिंगटन स्थित इजरायली दूतावास के एक प्रवक्ता ने कहा कि इजरायल अमेरिकी संस्थाओं या सरकारी अधिकारियों की जासूसी नहीं करता. उनका कहना है कि इजरायली खुफिया गतिविधियां सहयोगी देशों के खिलाफ नहीं, बल्कि विरोधियों के खिलाफ केंद्रित रहती हैं.
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व्हाइट हाउस ने भी रिपोर्ट को गलत बताते हुए कहा कि इसे ऐसे लोगों के हवाले से तैयार किया गया है जिन्हें आंतरिक प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी नहीं है. यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब ट्रंप और नेतन्याहू के बीच ईरान और लेबनान को लेकर रणनीतिक मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं.
ट्रंप जहां ईरान के साथ कूटनीतिक समझौते की कोशिश कर रहे हैं, वहीं नेतन्याहू सैन्य कार्रवाई फिर शुरू करने के पक्ष में बताए जा रहे हैं. हाल के दिनों में दोनों नेताओं के बीच हुई कथित तीखी फोन बातचीत ने भी इस बात के संकेत दिए हैं कि मध्य पूर्व को लेकर अमेरिका और इजरायल की प्राथमिकताओं में दूरी बढ़ती जा रही है.
आजतक इंटरनेशनल डेस्क