जंग रुकेगी या नहीं? तय करेंगे ये 14 पॉइंट, ईरान ने किए ये बदलाव, अब ट्रंप पर निगाहें

ईरान और अमेरिका के बीच 14 बिंदुओं वाले संभावित समझौते के मसौदे में लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध तुरंत रोकने, 30 दिन में समुद्री नाकाबंदी हटाने, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने, तेल पाबंदियां रोकने और 24 बिलियन डॉलर की जमी हुई रकम जारी करने जैसे प्रस्ताव सामने आए हैं.

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जंग की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ बंद होने का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है. जंग की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ बंद होने का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है.

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 12 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:34 PM IST

ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौते को लेकर नई जानकारी सामने आई है. मेहर न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक 14 बिंदुओं वाले मसौदे में लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध को तुरंत और स्थायी रूप से रोकने का प्रस्ताव है. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच समझौता अंतिम चरण में है और इसे कुछ दिनों में अंतिम रूप दिया जा सकता है.

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रिपोर्ट के अनुसार, मसौदे में अमेरिका की तरफ से पाबंदियां हटाने, ईरान के आसपास से अपनी फौज हटाने, समुद्री नाकाबंदी खत्म करने, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने, तेल बिक्री पर लगी रोक हटाने और ईरान की जमी हुई रकम जारी करने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं. हालांकि, इस मसौदे को अभी संबंधित संस्थानों में अंतिम रूप दिया जाना बाकी है.

ट्रंप ने यह भी कहा कि समझौते पर हस्ताक्षर होते ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जहाजों के लिए तुरंत खोल दिया जाएगा. वहीं, फार्स समाचार एजेंसी के मुताबिक ईरानी अधिकारियों ने अब तक इस मसौदे पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. स्थानीय रिपोर्टों में कहा गया है कि वाशिंगटन द्वारा तेहरान के प्रस्तावित मुख्य टेक्स्ट को स्वीकार करने के बाद आधिकारिक मंजूरी की संभावना बढ़ी है.

पहले 2 बिंदू क्या कहते हैं?

मसौदे का पहला बिंदू लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध को स्थायी और तुरंत रोकने की बात करता है. दूसरा बिंदू कहता है कि अमेरिका ईरान के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देगा और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की संप्रभुता का सम्मान करेगा.

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30 दिन के भीतर नाकाबंदी और होर्मुज पर प्रस्ताव

तीसरा बिंदु 30 दिन के भीतर समुद्री नाकाबंदी पूरी तरह हटाने की बात करता है. चौथा बिंदू अमेरिका की तरफ से ईरान के आसपास से अपनी फौज हटाने की प्रतिबद्धता दर्ज करता है. पांचवें बिंदू में कहा गया है कि ईरानी इंतजाम के साथ 30 दिन के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर से खोला जाएगा.

तेल, पेट्रोकेमिकल और जमी हुई रकम पर शर्तें

छठा बिंदू तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और उनसे जुड़े डेरिवेटिव की बिक्री पर लगी पाबंदियां रोकने और ईरान को अपने वित्तीय संसाधनों तक पूरी पहुंच देने की बात करता है. 11वें बिंदू में कहा गया है कि अंतिम बातचीत के 60 दिन के दौरान ईरान की रोकी गई 24 बिलियन डॉलर की रकम जारी की जाएगी. इसमें से आधी रकम बातचीत शुरू होने से पहले ईरान को उपलब्ध करानी होगी.

पुनर्निर्माण और 60 दिन की बातचीत

सातवां बिंदू कहता है कि अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 बिलियन डॉलर की योजना पेश करें. आठवें बिंदू में 60 दिन की बातचीत का प्रस्ताव है, ताकि परमाणु मुद्दों, प्राथमिक और द्वितीयक अमेरिकी पाबंदियों, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स से जुड़े मामलों पर अंतिम समझौता हो सके. नौवां बिंदु एनपीटी के तहत ईरान की इस प्रतिबद्धता को दोहराता है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा. 10वें बिंदू में कहा गया है कि बातचीत के दौरान अमेरिका क्षेत्र में अपनी फौज नहीं बढ़ाएगा और नई पाबंदियां नहीं लगाएगा.

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निगरानी, मंजूरी और अंतिम बातचीत की सीमा

12वां बिंदू समझौते को लागू करने के लिए निगरानी तंत्र बनाने की बात करता है. 13वां बिंदू कहता है कि अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के जरिए मंजूरी दी जाएगी. 14वें बिंदू के मुताबिक अंतिम बातचीत तब तक शुरू नहीं होगी, जब तक ईरान की जमी हुई रकम का आधा हिस्सा जारी न हो जाए, तेल पाबंदियां रोकी न जाएं और समुद्री नाकाबंदी हट न जाए. इसी बिंदू में यह भी कहा गया है कि अंतिम समझौता सिर्फ समृद्ध सामग्री और संवर्धन के भविष्य, पाबंदियां हटाने और ईरानी आर्थिक पुनर्निर्माण कार्यक्रम पर होगा. मसौदे के मुताबिक ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर बातचीत इसमें शामिल नहीं है.

ट्रंप, ईरान और इजरायल से जुड़ी ताजा हलचल

ट्रंप ने व्हाइट हाउस में कहा कि समझौते के दस्तावेज तेजी से तैयार किए जा रहे हैं और ईरान भी इस समझौते के लिए तैयार है. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी ट्रंप से फोन पर इस संभावित समझौते पर बात की. इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक इजरायल इस ज्ञापन का पक्षकार नहीं है, लेकिन ट्रंप ने भरोसा दिया कि अंतिम समझौते में इजरायल की प्रमुख सुरक्षा चिंताओं का समाधान किया जाएगा.

इससे पहले ट्रंप ने यह भी कहा था कि बातचीत ईरानी नेतृत्व के उच्च स्तर तक पहुंचने और मंजूरी की दिशा में बढ़ने के बाद उन्होंने ईरान पर तय सैन्य हमले और बमबारी रद्द कर दी.

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