'...तो लाल सागर भी कर देंगे बंद', होर्मुज संकट के बीच ईरान की बड़ी धमकी

अमेरिका और ईरान के बीच हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं. ईरान ने कहा है कि अगर संघर्ष और बढ़ता है, तो इसका असर केवल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तक सीमित नहीं रहेगा.

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ईरान ने चेतावनी दी है कि संघर्ष होर्मुज से आगे बढ़कर लाल सागर तक फैल सकता है. (Photo- ITG) ईरान ने चेतावनी दी है कि संघर्ष होर्मुज से आगे बढ़कर लाल सागर तक फैल सकता है. (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 9:37 AM IST

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है. अमेरिका ने ईरान के कोस्टल डिफेंस सिस्टम और मिसाइल ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए हैं. इसके पलटवार में ईरान ने क्षेत्र से होने वाले एनर्जी एक्सपोर्ट को पूरी तरह ठप करने की धमकी दी है. ईरान का साफ कहना है कि वह अमेरिका के खिलाफ अपने 'अस्तित्व की लड़ाई' लड़ रहा है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर उसका कंट्रोल है.

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इस बीच, ईरान ने एक और बड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यह जंग अब सिर्फ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि लाल सागर (Red Sea) तक फैल सकती है. इसका सीधा मतलब यह है कि अगर अमेरिकी हमले जारी रहे, तो यमन में ईरान के सहयोगी हूती दुनिया के एक और अहम ग्लोबल शिपिंग रूट को निशाना बना सकते हैं.

ईरान की इस नई चेतावनी के बाद डर पैदा हो गया है कि दुनिया के दो सबसे अहम समुद्री चोकपॉइंट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लाल सागर एक साथ बाधित हो सकते हैं, जिससे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई और व्यापार पर खतरा मंडरा सकता है.

यह भी पढ़ें: ब्रिटेन ने IRGC को बताया 'सुरक्षा के लिए खतरा', ईरान ने दी चेतावनी... होर्मुज पर टेंशन

बता दें, अमेरिका-ईरान के बीच तनाव तब और अधिक बढ़ गया, जब अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आवाजाही की आजादी बहाल करने की कोशिश में ईरान के कोस्टल डिफेंस सिस्टम, मिसाइल साइटों और सैन्य बुनियादी ढांचे पर नए हमले किए. 

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वहीं, ईरान ने पड़ोसी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले करके जवाब दिया है और ईरान का कहना है कि जब तक वाशिंगटन तेहरान की शर्तें नहीं मानता, तब तक होर्मुज बंद रहेगा.

जानकारों का कहना है कि अगर हूती लाल सागर में जहाजों पर हमले तेज करते हैं, तो ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावट आ सकती है. दोनों समुद्री रूटों पर लंबे समय तक रुकावट आने से ग्लोबल तेल निर्यात, शिपिंग लागत और एनर्जी की कीमतों पर काफी असर पड़ सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर दबाव बढ़ सकता है.

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