ईरान में बिगड़े हालात! 'तानाशाह मुर्दाबाद' के नारों से गूंजा तेहरान, हिंसक प्रदर्शनों में कई लोगों की मौत

ईरान में बिगड़ती अर्थव्यवस्था, महंगाई और मुद्रा संकट के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों में कई प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई है, जबकि सुरक्षा बलों का एक सदस्य भी मारा गया है. तेहरान में विश्वविद्यालयों के छात्रों ने सड़कों पर उतरकर 'तानाशाह मुर्दाबाद' के नारे लगाए.

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प्रदर्शनकारी सोमवार, 29 दिसंबर, 2025 से ईरान के तेहरान में प्रदर्शन कर रहे हैं. (Fars News Agency via AP) प्रदर्शनकारी सोमवार, 29 दिसंबर, 2025 से ईरान के तेहरान में प्रदर्शन कर रहे हैं. (Fars News Agency via AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:37 PM IST

नए साल की शुरुआत के साथ ईरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ भड़के विरोध-प्रदर्शन हिंसक हो गए हैं. बिगड़ती अर्थव्यवस्था, महंगाई और मुद्रा संकट के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों में कई प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई है, जबकि सुरक्षा बलों का एक सदस्य भी मारा गया है. अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, यह बीते तीन वर्षों में देश का सबसे बड़ा जनआंदोलन माना जा रहा है.

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रिपोर्ट के अनुसार, पहले राजधानी तेहरान और बड़े शहरों तक सीमित रहे प्रदर्शन अब ग्रामीण इलाकों तक फैल गए हैं. पश्चिमी शहर लोरदेगन, कुहदश्त और इस्फहान प्रांत से मौतों की पुष्टि हुई है. ईरानी मीडिया और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच कई जगहों पर सीधी झड़पें हुईं.

तेहरान में विश्वविद्यालयों के छात्रों ने सड़कों पर उतरकर 'तानाशाह मुर्दाबाद' के नारे लगाए और 1979 की इस्लामिक क्रांति में अपदस्थ किए गए शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी के बेटे रजा पहलवी के समर्थन में नारेबाजी की. अमेरिका में निर्वासन में रह रहे रजा पहलवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “मैं आपके साथ हूं. हमारी जीत तय है क्योंकि हमारा उद्देश्य न्यायपूर्ण है और हम एकजुट हैं.” उन्होंने कहा कि मौजूदा शासन के रहते देश की आर्थिक स्थिति और बिगड़ेगी.

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तीन लोगों की हुई मौत

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े फार्स समाचार एजेंसी ने बताया कि लोरदेगन में झड़पों के दौरान दो लोगों की मौत हुई. वहीं, कुहदश्त में बसीज स्वयंसेवी अर्धसैनिक बल के एक सदस्य की मौत और 13 के घायल होने की पुष्टि की गई है. हालांकि, मानवाधिकार समूह हेंगाव का दावा है कि मारे गए बसीज सदस्य भी प्रदर्शन में शामिल थे और उन्हें सुरक्षा बलों ने गोली मारी. इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.

प्रदर्शनों के चलते कई प्रमुख बाजार बंद

दक्षिणी फार्स प्रांत के मरवदश्त सहित कई अन्य इलाकों में भी प्रदर्शन हुए हैं. हेंगाव और अन्य कार्यकर्ता संगठनों ने केर्मानशाह, खुज़ेस्तान और हमेदान प्रांतों में प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारियों की जानकारी दी है. लगातार प्रदर्शनों के चलते कई प्रमुख बाज़ार बंद रहे. सरकार ने ठंड के मौसम का हवाला देते हुए बुधवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया, जिससे देश का बड़ा हिस्सा ठप रहा.

गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा ईरान

बता दें कि ईरान इस समय गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है. पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते महंगाई दिसंबर में 42.5 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि 2025 में ईरानी रियाल डॉलर के मुकाबले लगभग आधा मूल्य खो चुका है. जून में इज़राइल और अमेरिका के हवाई हमलों से परमाणु ढांचे और सैन्य नेतृत्व को हुए नुकसान ने हालात और कठिन बना दिए हैं.

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सरकार ने एक ओर सुरक्षा कड़ी की है, तो दूसरी ओर संवाद का संकेत भी दिया है. सरकारी प्रवक्ता फातेमेह मोहाजेरानी ने कहा कि व्यापारियों और ट्रेड यूनियनों से सीधे बातचीत की जाएगी. बावजूद इसके, हालिया घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि महंगाई और आर्थिक बदहाली के खिलाफ उठी आवाज़ें ईरान के लिए एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक संकट का रूप लेती जा रही हैं.

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