जिस यूरेनियम को कब्जाने की ट्रंप कर रहे कोशिश ईरान ने उसके साथ कर दिया बड़ा खेला, अब क्या होगा?

अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने अपने सबसे संवेदनशील परमाणु ठिकाने इस्फहान में ऐसा कदम उठाया है, जिसने अमेरिका की चिंता बढ़ा दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने खुद ही उन सुरंगों को बंद कर दिया है जहां उसके समृद्ध यूरेनियम के छिपाए जाने की आशंका है.

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अमेरिका-इजरायल ने ईरान के कई परमाणु साइट पर हमले किए हैं. (Photo- सांकेतिक तस्वीर) अमेरिका-इजरायल ने ईरान के कई परमाणु साइट पर हमले किए हैं. (Photo- सांकेतिक तस्वीर)

आजतक इंटरनेशनल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 13 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:54 PM IST

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिस यूरेनियम भंडार को ईरान से हासिल करना चाहते थे, तेहरान ने उसके साथ ऐसा खेल कर दिया है कि अब उसे बाहर निकालना पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है. एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान ने हाल के हफ्तों में अपने इस्फहान परमाणु परिसर की कई सुरंगों को जानबूझकर ध्वस्त कर दिया और उनके प्रवेश द्वारों पर बारूदी सुरंगें बिछा दीं.

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माना जाता है कि ईरान का अत्यधिक समृद्ध (हाईली एनरिच्ड) यूरेनियम इसी परिसर के नीचे मौजूद सुरंगों में रखा गया है. यही वह यूरेनियम है जिसे लेकर अमेरिका और इजरायल लंबे समय से चिंतिंत रहे हैं. जंग शुरू होने के शुरुआती दौर में ट्रंप प्रशासन ने इस भंडार को कब्जे में लेने के लिए जमीनी सैन्य अभियान तक पर विचार किया था.

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लेकिन अब हालात बदल गए हैं. इजरायल टाइम्स ने अमेरिकी खुफिया सूत्रों के मुताबिक बताया कि, सुरंगों के ढह जाने और रास्तों में बारूदी सुरंगें बिछाए जाने के कारण किसी भी पक्ष के लिए वहां पहुंचना बेहद जोखिम भरा हो गया है. दिलचस्प बात यह है कि इससे सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि खुद ईरान के लिए भी उस यूरेनियम तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है.

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एनरिच्ड यूरेनियम पर अमेरिका-ईरान की डील फंसी

यही वजह है कि यह मुद्दा अब अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते का सबसे बड़ा पेंच बन गया है. दोनों देशों के बीच युद्ध समाप्त करने को लेकर जो बातचीत चल रही है, उसमें इस यूरेनियम भंडार को अहम माना जा रहा है, जिसपर अमेरिका की शर्त है कि ईरान को उसे अपने देश से बाहर करना होगा.

परमाणु मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी समझौते के तहत ईरान को अपने पूरे यूरेनियम भंडार को वेरिफिकेशन के लिए एक जगह लाना पड़ा, तो उसे यह साबित करना होगा कि उसके पास मौजूद सभी सामग्री का पूरा हिसाब है. लेकिन सुरंगों के बंद होने के बाद ईरान यह दावा कर सकता है कि कुछ यूरेनियम तक पहुंचना अब संभव नहीं है.

इजरायल टाइम्स से पूर्व अमेरिकी परमाणु अधिकारी स्कॉट रोएकर ने भी इसी आशंका की तरफ इशारा किया है. उनका कहना है कि अगर ईरान यह कहे कि कुछ हाईली एनरिच्ड यूरेनियम अब निकाला नहीं जा सकता, तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय के पास इसकी पूरी तरह पुष्टि करने का कोई आसान तरीका नहीं होगा. इससे भविष्य में यह संदेह बना रह सकता है कि कहीं ईरान के पास कुछ परमाणु सामग्री छिपी तो नहीं रह गई.

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समझौता तभी जब ईरान यूरेनियम वापस करे- अमेरिका

उधर अमेरिका साफ कर चुका है कि प्रस्तावित समझौते में ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार को खत्म करने की व्यवस्था शामिल होगी. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, योजना यह है कि इस सामग्री को पहले नष्ट किया जाए और फिर देश से बाहर ले जाया जाए.

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हालांकि ईरान लगातार यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह परमाणु हथियार नहीं बना रहा. लेकिन अमेरिका और इजरायल का आरोप है कि ईरान ने यूरेनियम को हथियार बनाने के स्तर के बेहद करीब तक समृद्ध कर लिया है.

यही कारण है कि इस्फहान की सुरंगों में दबे यूरेनियम का सवाल अब सिर्फ एक परमाणु मुद्दा नहीं रह गया है. यह अमेरिका-ईरान वार्ता, युद्धविराम और पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल बन चुका है. अब देखने वाली बात होगी कि ईरान असल में उस यूरेनियम तक दोबारा पहुंच पाता है या फिर यह भंडार आने वाले वर्षों तक रहस्य बना रहता है.

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