जंग के बीच ईरान में परमाणु बम बनाने की मांग तेज... खामेनेई के फतवे पर भी उठे सवाल

ईरान में अब परमाणु बम बनाने पर खुलकर बहस शुरू हो गई है. आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद कट्टरपंथी ताकतें हावी हैं. अमेरिका-इजरायल हमलों के बीच NPT छोड़ने और परमाणु हथियार बनाने की मांग तेज हो गई है.

Advertisement
ईरान में लोग अब परमाणु बम बनाने की अपील कर रहे हैं. (Photo: Arun Uniyal/India Today) ईरान में लोग अब परमाणु बम बनाने की अपील कर रहे हैं. (Photo: Arun Uniyal/India Today)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:04 AM IST

मिडिल ईस्ट की जंग अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां सबसे खतरनाक सवाल खुलकर सामने आ गया है, क्या ईरान परमाणु बम बनाएगा? अब तक यह चर्चा तेहरान के बंद कमरों तक सीमित थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. अमेरिका और इजरायल के लगातार हमलों के बीच ईरान के अंदर यह बहस खुलकर होने लगी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, धार्मिक नेताओं का गुट अब खुले तौर पर परमाणु हथियार बनाने की मांग कर रहे हैं.

Advertisement

इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह है आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत. 28 फरवरी को जंग की शुरुआत में उनकी हत्या के बाद ईरान की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव आया है. अब इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का प्रभाव तेजी से बढ़ा है, और यही गुट परमाणु बम के पक्ष में सबसे ज्यादा मुखर रहा है.

यह भी पढ़ें: 'भिखारी' वाली छवि सुधारने में जुटा पाकिस्तान, ईरान जंग में फूड सप्लाई कर अरब को रिझाने की कोशिश

सालों तक ईरान ने दुनिया को यही भरोसा दिलाया कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाना चाहता. उसने न्यूक्लियर नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी (NPT) का सदस्य होने और खामेनेई के फतवे का हवाला दिया, जिसमें परमाणु हथियारों को हराम बताया गया था. लेकिन अब वही आधार कमजोर पड़ता दिख रहा है. खामेनेई के बाद उस फतवे की स्थिति भी सवालों में है, क्योंकि उसे कभी औपचारिक कानून का रूप नहीं दिया गया था.

Advertisement

ईरान के धार्मिक नेता अब NPT से बाहर निकलने की बात भी खुलकर कर रहे हैं. मोहम्मद जवाद लारिजानी ने साफ कहा, "अगर NPT हमारे काम का नहीं है तो इसे छोड़ देना चाहिए." सरकारी मीडिया और विश्लेषकों ने भी इस मुद्दे को हवा दी है. एक विश्लेषक ने कहा, "हमें परमाणु हथियार बनाना चाहिए, चाहे खुद बनाएं या हासिल करें."

असल में, अमेरिका और इजरायल के हमलों ने ईरान की रणनीतिक सोच को बदल दिया है. अब तेहरान में यह तर्क दिया जा रहा है कि अगर देश पर लगातार हमले हो रहे हैं, तो फिर अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने का क्या फायदा?

हालांकि, ईरान के अंदर पूरी तरह एक राय नहीं है. एक तरफ धार्मिक नेताओं का गुट है, जो तुरंत परमाणु बम चाहता है, वहीं दूसरी तरफ कुछ नेता हैं जो इसके परिणामों को लेकर चिंतित हैं. उन्हें डर है कि अगर ईरान खुलकर परमाणु हथियार बनाने की दिशा में जाता है, तो वैश्विक स्तर पर और कड़ी कार्रवाई हो सकती है.

यह भी पढ़ें: इजरायल ने ईरान के दो बड़े नेताओं को हिट-लिस्ट से निकाला... क्या तख्तापलट की सियासत शुरू?

विश्लेषकों के मुताबिक, अब तक ईरान "थ्रेशोल्ड स्ट्रेटेजी" पर काम कर रहा था, यानी वह इतनी क्षमता विकसित कर ले कि जरूरत पड़ने पर जल्दी परमाणु बम बना सके, लेकिन वास्तव में उसे बनाए नहीं. लेकिन अब यह संतुलन टूटता दिख रहा है. ईरान पहले ही यूरेनियम को हथियार स्तर के करीब तक समृद्ध कर चुका है, और इजरायल लंबे समय से दावा करता रहा है कि तेहरान कुछ महीनों में बम बना सकता है.

Advertisement

हालांकि हालिया हमलों में ईरान के परमाणु ठिकानों को नुकसान पहुंचा है, जिससे इस प्रक्रिया में देरी हो सकती है. सबसे अहम बात यह है कि अब यह बहस सिर्फ रणनीतिक नहीं, बल्कि सार्वजनिक हो चुकी है. यह दिखाता है कि ईरान की सत्ता और नीति निर्माण की प्रक्रिया दबाव में है और अपने विकल्पों पर नए सिरे से विचार कर रही है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement