एक समय था जब अरब देशों में पाकिस्तान की छवि 'भिखारी निर्यातक' जैसी बन गई थी. बड़ी संख्या में ऐसे पाकिस्तानी वहां पहुंच रहे थे, जो सड़कों पर भीख मांगते नजर आते थे. इससे न सिर्फ देश की छवि खराब हुई, बल्कि कानून-व्यवस्था पर भी असर पड़ता था. लेकिन अब ईरान की जंग ने पाकिस्तान को अपनी छवि सुधारने का एक बड़ा मौका दे दिया है. होर्मुज स्ट्रेट प्रभावित होने की वजह से अरब देशों में खाने-पीने की किल्लत का खतरा बढ़ गया है, और ऐसे में पाकिस्तान एक अहम सप्लायर बनकर उभर रहा है.
पाकिस्तान, जो खुद आर्थिक और ईंधन संकट से जूझ रहा है, अब अरब देशों को खाद्य आपूर्ति बढ़ाने की तैयारी कर रहा है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने निर्देश दिए हैं कि घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त खाद्य सामग्री का निर्यात तेज किया जाए. यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपना नियंत्रण मजबूत कर लिया है और जहाजों की आवाजाही सीमित कर दी है.
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होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. यहां से करीब 20% वैश्विक ऊर्जा सप्लाई गुजरती है, और यह खाड़ी देशों के लिए खाद्य आयात का भी प्रमुख मार्ग है. खासतौर पर यूएई, कुवैत, बहरीन और कतर जैसे देश इस रास्ते पर काफी निर्भर हैं. यूएई की लगभग 90% खाद्य आपूर्ति इसी मार्ग से होती है. इस बीच पाकिस्तान के कराची जा रहे एक पाकिस्तानी जहाज को बीते दिन ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से लौटा दिया था और गुजरने की इजाजत नहीं दी थी.
शिपिंग लागत बढ़ने से खाने की कीमतें बढ़ीं
ईरान अब होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर सख्त निगरानी रख रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, केवल चुनिंदा जहाजों को ही गुजरने की अनुमति दी जा रही है, और कई मामलों में भारी शुल्क भी वसूला जा रहा है. इससे शिपिंग लागत और बीमा खर्च बढ़ गया है, जिसका सीधा असर खाद्य कीमतों पर पड़ रहा है.
इसी संकट के बीच पाकिस्तान एक अहम सप्लायर के रूप में सामने आ रहा है. हाल ही में पाकिस्तान का जहाज "Lorax" होर्मुज से सुरक्षित गुजरने वाला पहला गैर-ईरानी जहाज बना. यह संकेत देता है कि तेहरान के साथ इस्लामाबाद के रिश्ते उसे इस स्थिति में एक अलग बढ़त दे सकते हैं.
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ईरान जंग की वजह से पाकिस्तान भी संकट में
पाकिस्तान खुद भी इस संकट से अछूता नहीं है. देश में ईंधन की कमी के कारण सरकारी कर्मचारियों के लिए चार दिन का वर्क वीक लागू किया गया है, और स्कूलों को दो हफ्तों के लिए बंद करना पड़ा है. इसके बावजूद, पाकिस्तान का यह कदम उसकी रणनीतिक सोच को दर्शाता है. एक तरफ वह खाड़ी देशों, खासकर सऊदी अरब, के साथ रिश्ते मजबूत करना चाहता है, तो दूसरी तरफ ईरान के साथ संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है.
इस बीच, पाकिस्तान की मध्यस्थ बनने की कोशिश सफल नहीं हो पाई है. पहले ईरान और बाद में अमेरिका ने भी उसकी इस पेशकश को खारिज कर दिया.
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