'किसी भी रास्ते से ईरान न आएं', भारतीय दूतावास ने जारी की नई एडवाइजरी

भारत ने ईरान की यात्रा पर कड़ी चेतावनी जारी की है और नागरिकों को हवाई या जमीनी रास्ते से यात्रा न करने की सलाह दी है. क्षेत्रीय तनाव के कारण ईरान में उड़ानें प्रभावित हो रही हैं. भारतीय दूतावास ने इमरजेंसी संपर्क नंबर भी जारी किए हैं और वहां मौजूद भारतीयों को सुरक्षित निकासी के लिए दूतावास से संपर्क करने को कहा है.

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भारत ने ईरान ने अपने नागरिकों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है (Representative Photo) भारत ने ईरान ने अपने नागरिकों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है (Representative Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 12:01 AM IST

भारत ने गुरुवार को अपने नागरिकों को हवाई या जमीनी रास्ते से ईरान की यात्रा न करने की सलाह दी है. भारत और ईरान के बीच कुछ फ्लाइट्स शुरू हुई हैं और इसी बीच भारत की तरफ से यह एडवाइजरी जारी की गई है.

तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने अपनी ताजा एडवाइजरी में कहा कि क्षेत्रीय तनाव के कारण हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध और परिचालन को लेकर अनिश्चितताएं अब भी जारी हैं, जिससे ईरान आने-जाने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित हो रही हैं.

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दूतावास ने कहा, 'भारत और ईरान के बीच कुछ उड़ानों के शुरू होने की खबरों के मद्देनजर और पहले जारी सलाह के क्रम में भारतीय नागरिकों को कड़ी सलाह दी जाती है कि वे हवाई या जमीनी किसी भी रास्ते से ईरान की यात्रा न करें.'

दूतावास ने ईरान में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों से कहा है कि वो दूतावास से बातचीत कर तय जमीनी सीमा रास्तों के जरिए देश छोड़ दें.

दूतावास ने इमरजेंसी नंबर जारी किए

दूतावास ने जरूरतमंद लोगों के लिए इमरजेंसी कॉन्टैक्ट नंबर्स (+989128109115, +989128109109, +989128109102 और +989932179359) और  ईमेल ([cons.tehran@mea.gov.in](mailto:cons.tehran@mea.gov.in)) भी जारी किया है.

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को पाकिस्तान के अनुरोध पर ईरान के साथ युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया. उन्होंने कहा कि युद्धविराम को आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि ईरानी नेतृत्व को युद्ध खत्म करने के लिए एक संयुक्त प्रस्ताव तैयार करने का और समय मिल सके.

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ट्रंप की यह घोषणा अमेरिका-ईरान के बीच 22 अप्रैल को खत्म होने वाले दो हफ्तों के युद्धविराम के कुछ घंटे पहले की गई. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के समय ईरान में छात्रों समेत करीब 9,000 भारतीय मौजूद थे. इनमें से अब तक लगभग 1,800 भारतीय भारत लौट चुके हैं.

युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले से हुई थी, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई शीर्ष कमांडर मारे गए थे. इसके जवाब में ईरान की कार्रवाई के बाद युद्ध पूरे खाड़ी क्षेत्र तक फैल गया.

जवाब में ईरान ने वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए अहम समुद्री रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी बंद कर दिया. इस वजह से खाड़ी देशों से तेल और गैस की सप्लाई लगभग बंद हो गई है. इसका सबसे अधिक असर भारत और चीन जैसे बड़े तेल आयातकों पर हो रहा है.

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