फ्रांस की सरकार ने पेरिस स्थित ईरानी विपक्षी संगठन 'नेशनल काउंसिल ऑफ रेजिस्टेंस ऑफ ईरान' (NCRI) की रैली पर बैन लगा दिया है. फ्रांसीसी सुरक्षा एजेंसियों ने विरोधी राजशाही (मोनार्किस्ट) कार्यकर्ताओं से बढ़ते खतरे की चेतावनी दी थी. इसके चलते फ्रांस प्रशासन ने ये सख्त कदम उठाया है.
पेरिस पुलिस ने 20 जून को होने वाले इस विरोध प्रदर्शन को शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही रद्द कर दिया था. पुलिस ने इसके पीछे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तनाव के साथ-साथ हिंसा भड़कने की आशंका का हवाला दिया था.
NCRI दरअसल 'पीपल्स मुजाहिद्दीन ऑर्गनाइजेशन ऑफ ईरान' की राजनीतिक शाखा है. इसके कार्यक्रमों में पूरे यूरोप और दुनिया भर से लोग हिस्सा लेने आते हैं. आमतौर पर इनकी रैलियां बिना किसी विवाद के और शांति से निपट जाती हैं.
हालांकि, इस बार खुफिया रिपोर्ट ने PMOI और ईरान के पूर्व शाह के निर्वासित बेटे रजा पहलवी का समर्थन करने वाले राजशाही समर्थकों के बीच बढ़ते 'युद्ध के असर' की तरफ इशारा किया था. दोनों ही गुट खुद को असली और एकमात्र वैध ईरानी विपक्ष के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं.
हथियार लहराने और बम की धमकी
फ्रांसीसी अधिकारियों को राजशाही समर्थकों से जुड़ी धमकियों के इनपुट मिले थे. सुरक्षा नोट में एक प्रमुख राजशाही समर्थक कार्यकर्ता का जिक्र किया गया है, जो फ्रांसीसी अधिकारियों के खिलाफ भी भड़काऊ बयानबाजी के लिए जाना जाता है. इस कार्यकर्ता ने अपने समर्थकों से PMOI के मार्च का रास्ता रोकने की अपील की थी.
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सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे वीडियो भी सामने आए जिनमें वो एक सेमी-ऑटोमैटिक पिस्तौल और 3D-प्रिंटेड हथियार चलाते हुए दिख रहा था. खुफिया रिपोर्ट में ये भी बताया गया कि ईरान के शाह के जमाने की सुरक्षा एजेंसी 'सावाक' के प्रतीकों का इस्तेमाल करने वाले कुछ लोगों ने धमकी दी थी कि अगर ये प्रदर्शन आगे बढ़ा, तो वो वहां बम रख देंगे. इन गंभीर सुरक्षा खतरों को देखते हुए ही फ्रांस सरकार ने सुरक्षा के लिहाज से इस रैली को रोकने का फैसला किया.
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