'मुझे वो पसंद हैं पर उन्होंने गलती की...', मेलोनी पर फिर बोले ट्रंप

एक समय ट्रंप और मेलोनी को स्वाभाविक राजनीतिक सहयोगी माना जाता था. दोनों नेता आव्रजन, राष्ट्रीय संप्रभुता और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर समान रूढ़िवादी विचार रखते हैं. 2025 में ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने वाली मेलोनी एकमात्र यूरोपीय नेता थीं. इससे यह धारणा बनी थी कि यूरोप में इटली, अमेरिका का सबसे करीबी सहयोगी बन सकता है.

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ट्रंप ने मेलोनी को लेकर क्या बोला. (Photo: Reuters) ट्रंप ने मेलोनी को लेकर क्या बोला. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:31 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को एक बार फिर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी पर ईरान जंग के दौरान अमेरिका का साथ नहीं देने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि इस फैसले की वजह से दोनों नेताओं के बीच रिश्तों में खटास आ गई है. हालांकि उन्होंने मेलोनी को अच्छी इंसान भी बताया.

तुर्की के अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ईरान संकट के समय इटली द्वारा अमेरिका के प्रयासों का समर्थन नहीं करने से उनके और मेलोनी के संबंध प्रभावित हुए हैं. उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर मेलोनी की तारीफ करने के बावजूद कहा कि इटली की प्रधानमंत्री ने गलत फैसला लिया.

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ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब पिछले कुछ हफ्तों से दोनों नेताओं के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. ईरान, नाटो और सोशल मीडिया पर हुई व्यक्तिगत टिप्पणियों को लेकर मतभेदों ने उस रिश्ते को कमजोर कर दिया है, जिसे कभी ट्रंप और किसी यूरोपीय नेता के बीच सबसे मजबूत राजनीतिक साझेदारी माना जाता था.

जब ट्रंप से मेलोनी के साथ उनके संबंधों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ईरान संघर्ष के दौरान इटली के रुख के कारण दोनों के रिश्तों में ठंडापन आ गया. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया इसलिए हमारे रिश्तों में थोड़ी खटास आ गई लेकिन मैं उन्हें पसंद करता हूं. मुझे लगता है कि वह वास्तव में अच्छी इंसान हैं, लेकिन मेरा मानना है कि उन्होंने गलती की.

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उन्होंने कहा कि विवाद की मुख्य वजह यह थी कि ईरान संकट के दौरान इटली ने अमेरिका की मदद करने से इनकार कर दिया. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान के मामले में हमारी मदद करने से मना कर दिया. उनकी यह टिप्पणी यूरोपीय सहयोगी देशों की उस आलोचना के बाद आई है, जिसमें ट्रंप का आरोप है कि तेहरान के साथ संघर्ष के दौरान कई यूरोपीय देशों ने अमेरिका का पर्याप्त साथ नहीं दिया.

ट्रंप और मेलोनी के रिश्तों में कैसे आई दरार?

एक समय ट्रंप और मेलोनी को स्वाभाविक राजनीतिक सहयोगी माना जाता था. दोनों नेता आव्रजन, राष्ट्रीय संप्रभुता और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर समान रूढ़िवादी विचार रखते हैं. 2025 में ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने वाली मेलोनी एकमात्र यूरोपीय नेता थीं. इससे यह धारणा बनी थी कि यूरोप में इटली, अमेरिका का सबसे करीबी सहयोगी बन सकता है. हालांकि, इस वर्ष दोनों नेताओं के संबंध लगातार बिगड़ते गए.

तनाव की शुरुआत तब हुई जब ट्रंप ने ईरान युद्ध की आलोचना करने पर पोप लियो की आलोचना की. मेलोनी ने पोप के रुख का समर्थन किया, जिससे ट्रंप ने उनकी भी आलोचना शुरू कर दी. इसके बाद विवाद तब और बढ़ गया जब ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान संघर्ष के दौरान इटली ने वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज को दोबारा खोलने के अमेरिकी प्रयासों में सहयोग नहीं किया.

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मार्च में इटली ने अमेरिका के सैन्य विमानों को सिसिली स्थित सिगोनेला एयरबेस पर उतरने की अनुमति भी नहीं दी थी. इटली का कहना था कि अमेरिका ने रोम से आवश्यक औपचारिक अनुमति नहीं ली थी. इन मतभेदों ने नीतिगत असहमति को धीरे-धीरे व्यक्तिगत विवाद का रूप दे दिया.

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