Bangladesh Lord Ram Controversy: बांग्लादेश में राम की मूर्ति को लेकर हंगामा क्यों? ढाका में प्रोटेस्ट, तस्लीमा नसरीन भी बोलीं

बांग्लादेश के उत्तरी जिले गाइबंधा के पलाशबाड़ी में स्थित श्री श्री राधा गोविंदा और काली मंदिर में भगवान श्री राम की दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा बनाने का काम अस्थायी रूप से रोक दिया गया है.

Advertisement
बांग्लादेश में भगवान राम की मूर्ति को लेकर विवाद (Photo: ITG) बांग्लादेश में भगवान राम की मूर्ति को लेकर विवाद (Photo: ITG)

aajtak.in

  • ढाका,
  • 17 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:03 PM IST

बांग्लादेश ने 'अच्छी नीयत के मौसमी संकेत' के तौर पर नेपाल को आम भेजे हैं. तारिक रहमान की तरफ से भेजे गए 1,750 किलो आमों की खेप नेपाल की राजधानी काठमांडू पहुंच चुकी है, जहां तारिक रहमान के भेजे आम काठमांडू में बांटे जा चुके हैं. वहीं यह अभी तक दिल्ली नहीं पहुंचे हैं और न ही ढाका ने यह साफ किया है कि भारत को आम भेजे भी जा रहे हैं या नहीं.

Advertisement

गौर करने वाली यह है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना हर साल भारतीय नेताओं को आम भेजती थीं, एक ऐसी परंपरा जिसे बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने भी जारी रखा है. 

इसी बीच, रविवार को प्रधानमंत्री के सूचना सलाहकार जाहिद उर रहमान को दिल्ली एयरपोर्ट पर रोके जाने की घटना के बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त पवन कुमार बधे को तलब किया.

वहीं, भारत को दरकिनार करते हुए तारिक रहमान इस महीने चीन का दौरा करने वाले हैं, जहां दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. वहीं, दूसरी तरफ भगवान राम की एक मूर्ति को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है.

बांग्लादेश के उत्तरी जिले गाइबांधा के पलाशबाड़ी में स्थित श्री श्री राधा गोविंदा और काली मंदिर में भगवान राम की दुनिया की सबसे बड़ी मूर्ति बनाने का काम कुछ समय के लिए रोक दिया गया है. मंदिर के सलाहकार श्री श्यामलाल कुमार महंता ने इस बात की पुष्टि की है. गौर करने वाली बात है कि हिंदू समुदाय के लिए एक बड़ा केंद्र बनाने के मकसद से करीब 22 करोड़ बांग्लादेशी टका की लागत वाला एक प्रोजेक्ट शुरू किया गया था. इसके तहत भगवान राम की 81 फीट ऊंची मूर्ति के साथ-साथ भगवान कृष्ण (करीब 50 फीट ऊंची) और भगवान शिव (30 फीट ऊंची) की मूर्तियां बनाने का काम भी शुरू हो गया था. लेकिन, अल्पसंख्यक समुदाय की आस्था से जुड़े देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाने के विरोध में कट्टरपंथी सड़कों पर उतर आए, जिसके चलते राम की मूर्ति बनाने का काम रोकना पड़ा.

Advertisement

श्री श्री राधा गोविंदा और काली मंदिर के सलाहकार श्यामला कुमार महंता ने कहा, "कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सामाजिक सद्भाव को कायम रखने के लिए, मंदिर समिति ने राम की मूर्ति की स्थापना को कुछ वक्त के लिए रोकने का फैसला किया है. हम किसी विवाद की वजह नहीं बनना चाहते और न ही किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना चाहते हैं. इस देश में हर किसी को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है. हालांकि, कोई भी कदम धर्म के प्रति सम्मान के साथ उठाया जाना चाहिए. 'धर्म व्यक्तिगत है, लेकिन राज्य सभी का है'—यह एक ऐसा सिद्धांत है जिसे हम सभी मानते हैं।" फिर भी, सवाल यह उठता है कि अगर बांग्लादेश राज्य सभी का है, तो हिंदू अपने देवी-देवताओं की मूर्तियाँ क्यों नहीं बना पा रहे हैं?

सनातन धर्म के मानने वालों का आरोप है कि भगवान राम की मूर्ति का निर्माण शुरू होने के समय से ही इस्लामी कट्टरपंथी समूह तरह-तरह की रुकावटें पैदा कर रहे थे. मंदिर के लिए मिलने वाले फंड की जांच की मांग भी उठी. आखिरकार, भारी विरोध और दबाव के कारण मंदिर समिति को मूर्ति का निर्माण रोकना पड़ा. 

बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता तस्लीमा नसरीन ने इस मामले पर अपनी चिंता ज़ाहिर की है और सोशल मीडिया के ज़रिए धार्मिक आज़ादी और अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों को लेकर कई सवाल उठाए हैं.

Advertisement

तसलीमा नसरीन का कहना है कि अगर धार्मिक आजादी एक मौलिक अधिकार है, तो यह बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक दोनों समुदायों पर समान रूप से लागू होनी चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश में नई मस्जिदें बन रही हैं, तो राम की मूर्ति या मंदिर बनाने पर इतना कड़ा विरोध क्यों हो रहा है. तसलीमा आगे कहती हैं कि इस प्रोजेक्ट को लेकर मिल रही धमकियां, भड़काऊ बयान और नफ़रत का माहौल बहुत चिंताजनक है. उनके नजरिए से, अलग-अलग राय या धार्मिक सोच के आधार पर किसी दूसरे समुदाय के पूजा-स्थल या धार्मिक प्रोजेक्ट में रुकावट डालना सही नहीं ठहराया जा सकता. वे हिंदू मंदिरों पर हुए हमलों और पलाशबाड़ी इलाके में मूर्तियों की तोड़-फोड़ की पुरानी घटनाओं को भी याद करती हैं. कुछ जानकारों का मानना ​​है कि इस प्रोजेक्ट को फिर से रोकने से अल्पसंख्यक समुदाय के बीच सुरक्षा और भरोसे को लेकर चिंताएं और बढ़ सकती हैं.

यह भी पढ़ें: दिल्ली एयरपोर्ट पर रोके गए बांग्लादेशी सलाहकार, बोले- विरोध जताने के लिए ढाका लौट आया

भगवान राम की मूर्ति के अपमान के आरोपों के बाद बांग्लादेश के कई इलाकों में तनाव फैल गया है. इस घटना के विरोध में ढाका यूनिवर्सिटी के हिंदू समुदाय के छात्रों ने एक विरोध मार्च और रैली निकाली. उन्होंने मांग करते हुए कहा कि आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए. 

Advertisement

'ढाका यूनिवर्सिटी के जागरूक छात्र' के बैनर तले हुए इस कार्यक्रम में जगन्नाथ हॉल के साथ-साथ यूनिवर्सिटी के अलग-अलग रेजिडेंशियल हॉल के छात्रों ने भी हिस्सा लिया. इसके बाद जुलूस ने यूनिवर्सिटी कैंपस का चक्कर लगाया और शाहबाग चौराहे तक पहुंचा, जहां प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम करके विरोध जताया.

रैली में बोलते हुए, जगन्नाथ हॉल स्टूडेंट्स यूनियन के सोशल वेलफेयर सेक्रेटरी राम प्रसाद साहा ने इस घटना की कड़ी निंदा की. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ चरमपंथी समूह भगवान राम के बारे में अफवाहें फैलाकर धार्मिक तनाव भड़काने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "हमारे लिए श्री रामचंद्र एक अवतार हैं, उनकी तस्वीर पर जूता फेंकने की घटना ने सनातन समुदाय की धार्मिक भावनाओं को गहरी चोट पहुंचाई है. हम धर्म, जाति या समुदाय से परे सभी के साथ शांति से रहना चाहते हैं. हालांकि, कुछ समूह बंटवारा और अस्थिरता पैदा करना चाहते हैं. उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए." 

छात्र नेताओं दीपजॉय सरकार दिप्ता और सुदीप्त प्रमाणिक ने भी रैली को संबोधित किया. उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और इंसाफ के मामले में बार-बार भेदभाव देखा जाता है. उन्होंने यह भी मांग की है कि सियासी दल अल्पसंख्यकों की सुरक्षा से जुड़े अपने वादों को पूरा करें. 

Advertisement

सुदीप्त प्रमाणिक ने कहा, "चुनाव से पहले अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर कई वादे किए जाते हैं, लेकिन उनमें से कई पूरे नहीं होते. हम इस घटना में शामिल लोगों की तुरंत गिरफ्तारी और उन पर मुकदमा चलाने की मांग करते हैं." उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई नहीं की, तो आने वाले शुक्रवार को बड़े पैमाने पर आंदोलन का कार्यक्रम घोषित किया जाएगा.

प्रदर्शनकारी क्या मांग कर रहे हैं?

रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों के द्वारा कई मांगें रखी गईं. इनमें गाइबांधा घटना में शामिल लोगों की तुरंत गिरफ्तारी और उन्हें कड़ी से कड़ी सज़ा देना, सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए सरकार द्वारा कड़े कदम उठाना, चरमपंथी गतिविधियों को रोकने के लिए प्रभावी पहल करना और गाइबांधा में भगवान राम की सबसे बड़ी मूर्ति बनाने के प्रोजेक्ट को फिर से शुरू करना शामिल है. इस घटना ने बांग्लादेश में हर तरफ चर्चा छेड़ दी है.

(आजतक बांग्ला पर मूल लेख यहां पढ़ें)

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »