24 जुलाई से पहले TMC विवाद सुलझाएगा चुनाव आयोग? नाम और चुनाव चिह्न पर फैसला जल्द

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के बीच राज्यसभा की तीन खाली सीटों पर उपचुनाव घोषित हो गए हैं. वहीं, टीएमसी में चुनाव चिन्ह और उम्मीदवारों के नामांकन को लेकर विवाद जारी है. निर्वाचन आयोग ने 14 जुलाई तक नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख तय की हैज. ऐसे में चुनाव आयोग टीएमसी विवाद पर अंतरिम फैसला दे सकता है.

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 TMC में ऋतब्रत बनर्जी बनाम ममता बनर्जी जारी है. (Photo: ITG) TMC में ऋतब्रत बनर्जी बनाम ममता बनर्जी जारी है. (Photo: ITG)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 07 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 4:41 PM IST

निर्वाचन आयोग तृणमूल कांग्रेस के नाम-निशान और प्रधान विवाद में जल्दी ही अंतरिम फैसला देगा. क्योंकि 24 जुलाई को पश्चिम बंगाल में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होने हैं. दोनों गुट अपने अपने प्रत्याशी उतारने के लिए टिकट भी बांटेंगे.
 
हालांकि सोमवार तक दोनों पक्षों ने निर्धारित समय सीमा के भीतर ही अपने अपने दावे सबूतों के साथ आयोग को सौंप दिए थे. वहीं, सोमवार को ही निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में हाल ही में खाली हुई राज्यसभा की तीन सीटों पर उपचुनाव भी घोषित कर दिया.

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उधर तृणमूल कांग्रेस के एक गुट की नेता ममता बनर्जी हैं तो दूसरे का नेतृत्व ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं. दोनों का दावा है कि असल तृणमूल कांग्रेस सिर्फ उनके पास है.

14 जुलाई को होगा नामांकन दाखिल

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार के बाद पिछले महीने ही राज्यसभा से टीएमसी सांसद सुखेन्दु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक ने इस्तीफा दे दिया था. आयोग के घोषित कार्यक्रम के मुताबिक तीनों सीटों के लिए नामांकन 14 जुलाई तक दाखिल करने होंगे. 

अगर दोनों गुट अलग-अलग उम्मीदवार नॉमिनेट करते हैं, तो निर्वाचन आयोग को उस तारीख तक ये तय करना होगा कि टीएमसी का उम्मीदवार कौन होगा. ऐसा भी मुमकिन है कि आयोग तृणमूल कांग्रेस का नाम फौरी तौर पर फ्रीज कर दे और टीएमसी का नाम स्थगित रखते हुए दोनों गुटों को अस्थायी पहचान आवंटित कर दे.

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राज्यसभा चुनावों के लिए विधायकों के मतपत्रों के वेरिफिकेशन के लिए राजनीतिक दल अपने अधिकृत एजेंट नियुक्त करते हैं. वो ये तस्दीक करते हैं कि वोटर विधायक अपना वोट पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी को ही दे रहे हैं या नहीं. अगर दोनों गुट अलग-अलग फॉर्म दाखिल करते हैं, तो चुनाव आयोग को चुनाव से पहले फैसला लेना होगा. 

टीएमसी के दोनों गुटों को मिल सकती है अलग-अलग पहचान

पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त डॉक्टर एस.वाई कुरैशी ने आजतक से इस मामले पर बातचीत की. उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग अंतिम फैसला सुनाए जाने तक टीएमसी के असल नाम और घास के दो फूल वाले निशान को फ्रीज यानी स्थगित रख सकता है. इस बीच अंतरिम अवधि में दोनों गुटों को आयोग अस्थायी पहचान दे सकता है. जैसे टीएमसी-ए और बी या फिर ऐसा ही कुछ और.

इस व्यवस्था से दोनों गुट चुनाव थोड़े अलग-अलग नामों से राज्यसभा की तीनों सीटों पर चुनाव लड़ सकेंगे. लेकिन ये स्थाई समाधान नहीं होगा क्योंकि बड़ा सवाल वहीं का वहीं रहेगा कि कौन सा गुट असली तृणमूल कांग्रेस है. बहरहाल राजनीतिक नजरिए के हिसाब से पश्चिम बंगाल में बीजेपी तीनों सीटें जीत सकती है.

यह भी पढ़ें: BJP का बंगाल में तीनों राज्यसभा सीटें जीतना तय! बगावत से जूझ रही TMC मुकाबले में भी नहीं

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टीएमसी ने दाखिल किया था जवाब

ममता बनर्जी गुट ने सोमवार को निर्वाचन आयोग को दस्तावेजी सबूतों के साथ बताया कि असली टीएमसी वही है. इससे पहले यही दावा ऋतब्रत बंदोपाध्याय वाले बागी नेताओं के गुट ने भी किया था. पार्टी के ममता गुट ने आयोग को बताया कि 2022 में राष्ट्रीय कार्य समिति के चुनाव हुए. उसका कार्यकाल 2027 तक जारी रहेगा. 

इस दावे से विद्रोही खेमे के इस दावे का खंडन हुआ कि उसका कार्यकाल पहले ही खत्म हो चुका है. उन्होंने अलग हुए गुट को 'पूरी तरह बेईमान' बताते हुए आरोप लगाया कि उसने राज्य के मुख्यमंत्री और पुलिस के समर्थन से अवैध रूप से पार्टी कार्यालय पर कब्जा कर लिया है.

ये जवाब 2 जुलाई को जारी चुनाव आयोग के नोटिस के आलोक में दाखिल किया गया था.  ऋतब्रत बंदोपाध्याय ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि इसमें कोई अगर मगर नहीं कि हम ही असली टीएमसी हैं. ममता बनर्जी खेमे पर व्यक्तिवाद और वंशवादी राजनीति को बढ़ावा देने का आरोप भी बागी खेमे ने लगाया. 

उन्होंने दावा किया कि बंगाल में पार्टी के 80 विधायकों में से दो-तिहाई से ज्यादा विधायकों के साथ-साथ कई पूर्व मंत्रियों, पार्षदों और जिला परिषद सदस्यों का भी उन्हें समर्थन हासिल है. बागी खेमे की नवगठित राष्ट्रीय समिति के प्रमुख अरूप रॉय ने कहा कि उनके पक्ष ने 22 जून के सत्र के सभी दस्तावेज जमा कर दिए हैं.

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इन दोनों पक्षों के दावे प्रतिदावे मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य आयुक्तों ने सुने. अब उनका परीक्षण चल रहा है. आयोग में उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक फैसले लेने से पहले अनुरोध किए जाने पर व्यक्तिगत सुनवाई भी मुमकिन है. लेकिन ये सब कुछ जल्दी तय करना होगा कि क्या ये सारी कवायद पार्टी में औपचारिक विभाजन है?

यह भी पढ़ें: TMC पर हक की जंग तेज, चुनाव आयोग से बोला ममता गुट- बागियों का दावा पूरी तरह फर्जी

क्या कहता है अध्यादेश?

चुनाव चिह्न अध्यादेश, 1968, किसी पार्टी के स्वामित्व को तय करने के लिए तीन मापदंड निर्धारित करता है: उद्देश्य और लक्ष्य, पार्टी का संविधान और बहुमत. ज्ञानेश कुमार ने कहा, 'संगठनात्मक और विधायी शक्ति को मापने वाला बहुमत मापदंड निर्णायक साबित होने की संभावना है, हालांकि सिर्फ विधायी बहुमत को ही निर्णायक नहीं माना जाता है.'

अगर चुनाव आयोग 14 जुलाई तक कोई फैसला नहीं सुनाता है, तो दोनों गुट टीएमसी के टिकट पर राज्यसभा की उन्हीं तीन सीटों के लिए प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार दाखिल कर सकते हैं. इससे रिटर्निंग अधिकारियों को दोनों में से किसी एक या दोनों नामांकन पत्रों को खारिज करना पड़ सकता है और मामला अदालत तक भी जा सकता है.

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