नेताओं ने बदली चाल, कार्यकर्ताओं का बुरा हाल! बंगाल में टीएमसी की हाल-हकीकत

TMC में बगावत और टूट फूट के बीच तृणमूल कांग्रेस के जमीनी स्तर के नेताओं और कार्यकर्ताओं की क्या खबर है? कुछ जिलों में पूछताछ करने पर पता चला कि तृणमूल कांग्रेस के जमीनी स्तर के कार्यकर्ता दिशाहीन हैं. नेता फोन का जवाब नहीं दे रहे हैं.

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TMC में टूट के बीच कार्यकर्ता पसोपेश में हैं. (Photo-ITG) TMC में टूट के बीच कार्यकर्ता पसोपेश में हैं. (Photo-ITG)

अरिंदम गुप्ता

  • कोलकाता,
  • 25 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:16 PM IST

तृणमूल कांग्रेस लगातार दरक रही है. सांसद, विधायक, पार्षद पाला बदल रहे हैं. कुछ पार्टियां बदल रहे हैं, कुछ इस्तीफा दे रहे हैं, कुछ फरार हो गए हैं, कुछ गिरफ्तार हो गए हैं. लेकिन तृणमूल कांग्रेस के जमीनी स्तर के नेताओं और कार्यकर्ताओं का क्या हाल है? कुछ जिलों में छानबीन करने पर पता चला कि तृणमूल कांग्रेस के जमीनी स्तर के कार्यकर्ता दिशाहीन हैं. उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि वे क्या करें. पार्टी के वरिष्ठ नेता उनके फोन का जवाब नहीं दे रहे हैं. 

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कई जिलों में कोई संगठन नहीं

पश्चिम बंगाल तृणमूल कांग्रेस इस वक्त नेतृत्व के संकट से जूझ रही है. आजतक डॉट इन ने कुछ जिलों के तृणमूल नेताओं से बात की. हमने तृणमूल कार्यकर्ताओं और जमीनी स्तर के नेताओं की मौजूदा स्थिति जानने की कोशिश की. उदाहरण के लिए, नादिया. इस जिले के एक जाने-माने और लंबे समय से तृणमूल के नेता ने स्पष्ट किया कि नादिया में तृणमूल कांग्रेस की संगठनात्मक स्थिति चुनाव परिणामों पर निर्भर थी. उनके शब्दों में, 'पूरे जिले में धमकी का माहौल बना दिया गया है. पूर्व राज्य मंत्री मानस भुइयां और प्रताप नायक नाम के एक व्यक्ति को कैमक स्ट्रीट कार्यालय से पैसे निकालने की जिम्मेदारी दी गई थी. प्रताप नायक की मां अभिषेक के माता-पिता के घर खाना बनाती थीं. उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी.' चकड़ा क्षेत्र के तृणमूल नेता शंकर सिंह और जिशु सिंह भी गायब हैं. फिलहाल जिले में कोई भी संगठन नहीं बना रहा है. वरिष्ठ नेता ने कहा कि कार्यकर्ता दिशाहीन हैं. 

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'तृणमूल कांग्रेस का मतलब ममता बनर्जी है'

अब बात उत्तर 24 परगना की. तृणमूल कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष निर्मल घोष ने कहा कि वे कार्यकर्ताओं के साथ हैं. उनके शब्दों में, 'मेरा मूल काम पार्टी के ईमानदार कार्यकर्ताओं को आगे लाना है.' क्या जिले में पार्टी में फूट पड़ गई है? यह सुनकर उन्होंने कहा, 'तृणमूल कांग्रेस का मतलब ममता बनर्जी है. कोई और नहीं. हर कोई ममता का समर्थक है.'

ब्लॉक स्तर के नेता दबाव में हैं

पूर्वी बर्दवान में तृणमूल कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष सद्दाम हुसैन ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के बड़े पदाधिकारी ही मुख्य रूप से मुश्किल में हैं. कार्यकर्ता अभी भी ममता बनर्जी के साथ हैं. वे उनसे अलग नहीं हुए हैं. सद्दाम के अनुसार, 'तृणमूल कांग्रेस के पदाधिकारी इधर-उधर भाग रहे हैं. ब्लॉक स्तर तक के नेता दबाव में हैं. प्रशासन का इस्तेमाल करके कुछ क्षेत्रों में हमें संगठनात्मक रूप से कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है. देखिए, हम ऋतब्रत को नहीं जानते. कार्यकर्ता भी उन्हें नहीं जानते. ममता बनर्जी के करीबी नेताओं से संपर्क बनाए रखा जा रहा है. कुछ नेता पूछताछ भी कर रहे हैं. पार्टी कार्यकर्ता अभी भी ममता बनर्जी के साथ हैं.'

'नेता फोन का जवाब नहीं दे रहे हैं'

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उत्तर बंगाल के कूच बिहार जिले में यह पाया गया कि नेता कार्यकर्ताओं की पुकार तक नहीं सुन रहे हैं. परिणामस्वरूप कार्यकर्ता दिशाहीन हो गए हैं. कूच बिहार में तृणमूल कांग्रेस के पूर्व युवा नेता राहुल रॉय के शब्दों में, 'ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर नेता कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुन रहे हैं. वे अपने परिवारों से भी संपर्क में नहीं हैं. अधिकांश नेता कूच बिहार से बाहर हैं. कार्यकर्ता कुछ स्थानों पर स्थानीय स्तर पर ही आश्रय ले रहे हैं. वास्तव में नेता आश्रय की तलाश कर रहे हैं, कार्यकर्ताओं को आश्रय देने वाला कोई नहीं है. जिला और ब्लॉक स्तर पर कई नेताओं को गिरफ्तार भी किया गया है. किसी भी कार्यकर्ता के लिए कुछ भी स्पष्ट नहीं है.'

दक्षिण 24 परगना में भी हालात गंभीर हैं. जिले के एक तृणमूल नेता के शब्दों में, 'सभी समितियां भंग कर दी गई हैं. मुझे यह भी नहीं पता कि कौन किस पद पर है. कार्यकर्ता सबसे ज्यादा खतरे में हैं. कई लोग अपने-अपने तरीके से तालमेल बिठा रहे हैं. कई ब्लॉक स्तर के नेता न के बराबर नजर आ रहे हैं. यहां तक ​​कि जो पहले नेतृत्व करते थे, वे भी फोन नहीं उठा रहे हैं. तृणमूल में कई गुट बन गए हैं. पार्टी के शीर्ष स्तर पर इतना विभाजन है कि हमें समझ नहीं आ रहा कि इसे कैसे संभाला जाए. लेकिन मैं इतना जरूर कह सकता हूं कि कार्यकर्ता और निचले स्तर के नेता अभी भी दीदी के साथ हैं. अगर कोई दूसरे खेमे में जाता है, तो यह उनका अपना मामला है. देखिए, शांति से कौन नहीं रहना चाहता!' 

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