क्या ममता बनर्जी का मैसेज लेकर यूसुफ पठान के पास गए थे सौरव गांगुली? दादा ने खुद बताया पूरा सच

सौरव गांगुली ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से यूसुफ पठान को लोकसभा सीट छोड़ने का संदेश पहुंचाया था. गांगुली ने स्पष्ट कहा कि ममता बनर्जी ने उन्हें ऐसा कोई संदेश देने के लिए नहीं कहा और उन्होंने भी यूसुफ पठान से इस संबंध में कोई बातचीत नहीं की.

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यूसुफ पठान सीट विवाद में नाम आने पर सौरव गांगुली ने सभी दावों को खारिज किया (Photo: PTI) यूसुफ पठान सीट विवाद में नाम आने पर सौरव गांगुली ने सभी दावों को खारिज किया (Photo: PTI)

अनिर्बन सिन्हा रॉय

  • कोलकाता, पश्चिम बंगाल,
  • 06 जून 2026,
  • अपडेटेड 4:22 PM IST

क्रिकेट की दुनिया के दिग्गज और पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली इन दिनों एक बड़े राजनीतिक विवाद में घिर गए हैं. एक अखबार ने दावा किया कि गांगुली ने ममता बनर्जी का एक खास संदेश यूसुफ पठान तक पहुंचाया. लेकिन अब गांगुली ने खुद सामने आकर इस पूरी खबर को झूठ बताया है और मीडिया हाउसेज को एक चिट्ठी लिखी है.

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4 जून को कोलकाता के एक मशहूर अखबार के पहले पन्ने पर एक खबर छपी. इस खबर में दावा किया गया कि सौरव गांगुली, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तरफ से, बहरामपुर लोकसभा सीट के सांसद यूसुफ पठान के पास गए. 

गांगुली ने कथित तौर पर पठान को यह संदेश दिया कि वो अपनी सांसद की कुर्सी छोड़ दें, यानी इस्तीफा दे दें. इसके पीछे मकसद यह बताया गया कि अगर यूसुफ पठान सीट खाली करते हैं तो उस सीट पर उपचुनाव होगा और ममता बनर्जी खुद उस सीट से चुनाव लड़ सकती हैं. खबर में यह भी लिखा गया कि यूसुफ पठान ने यह बात मानने से इनकार कर दिया.

सौरव गांगुली ने क्या कहा?

शनिवार को गांगुली ने सभी मीडिया हाउसेज को एक आधिकारिक चिट्ठी लिखी और इस पूरी खबर को सिरे से गलत बताया. उन्होंने साफ तीन बातें कहीं.

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पहली बात यह कि ममता बनर्जी ने उन्हें कभी कोई संदेश देने के लिए नहीं कहा, न यूसुफ पठान को सीट छोड़ने के लिए, न किसी और मामले में. दूसरी बात यह कि उन्होंने यूसुफ पठान से कभी कोई संपर्क नहीं किया और न ही कोई ऐसा संदेश पहुंचाया.

यह भी पढ़ें: बंगाल के बाद अब दिल्ली में खेला? ममता की बढ़ने वाली है टेंशन, TMC में एक और बगावत की आहट

तीसरी बात यह कि जब उन्होंने कोई संदेश दिया ही नहीं तो यूसुफ पठान के मना करने का सवाल ही नहीं उठता. गांगुली ने यह भी कहा कि वो किसी भी राजनीतिक मामले में कभी शामिल नहीं रहे हैं.

मीडिया पर क्या नाराजगी जताई?

गांगुली ने अपनी चिट्ठी में मीडिया को भी आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि खबर छापने से पहले यह जांचना जरूरी था कि बात सच है या नहीं. उन्होंने लिखा कि बिना सच जाने ऐसी खबर छापना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे उनके बारे में गलत धारणा बनती है. उन्होंने मीडिया से अपील की कि वो अफवाहों और अटकलों पर भरोसा न करें और खबर की सच्चाई परखने के बाद ही उसे छापें.

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