पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त सबसे ज्यादा चर्चा तृणमूल कांग्रेस को लेकर है. एक समय की सत्तारूढ़ पार्टी अब बगावत की आग में झुलसती नजर आ रही है. एक ओर बड़ी संख्या में विधायक अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं यह संकट विधानसभा से निकलकर संसद तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है.
आजतक संवाददाता इंद्रजीत कुंडू ने पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी से खास बातचीत की है.
सवाल: जब आपने स्पीकर को चिट्ठी दी थी तब आपने कहा था कि आपके पास 58 विधायकों का समर्थन है. इस समय आपके खेमे की ताकत कितनी है?
ऋतब्रत बनर्जी: अभी जब मैं आपसे बात कर रहा हूं, हमारे साथ 61 विधायक हैं और यह संख्या आगे भी बढ़ेगी.
सवाल: क्या लोकसभा और राज्यसभा के सांसद भी आपके संपर्क में हैं?
जवाब: कुछ सांसदों से बात हुई है. जितनों से बात हुई, वे दिल्ली में हैं. मैं यह नहीं कह सकता कि आगे क्या होगा, लेकिन चर्चाएं जरूर चल रही हैं. अगर कुछ होगा तो सबके सामने आ जाएगा.
सवाल: क्या भविष्य में ऐसा हो सकता है कि आपका खेमा इतना बड़ा हो जाए कि पार्टी पर दावा ठोक दे?
जवाब: ममता बनर्जी एक बहुत बड़ी नेता हैं. हम चाहते हैं कि वह हमारा मार्गदर्शन करें. जहां तक भविष्य का सवाल है, कल क्या होगा यह न आपको पता है और न मुझे. लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि राजनीति में बदलाव लगातार चलता रहता है.
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सवाल: बागी खेमे का सबसे बड़ा मुद्दा क्या है? क्या आप अभी भी ममता बनर्जी को अपना नेता मानते हैं?
ऋतब्रत बनर्जी: हमने पहले भी कहा है कि हम सामूहिक नेतृत्व में विश्वास करते हैं. 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद ममता बनर्जी द्वारा बनाई गई तृणमूल कांग्रेस को अभिषेक बनर्जी की कॉर्पोरेट ब्यूरोक्रेसी ने हाईजैक कर लिया. जो पार्टी जमीनी कार्यकर्ताओं की ताकत पर खड़ी थी, वह धीरे-धीरे कॉर्पोरेट ढांचे में बदल गई. असली तृणमूल कांग्रेस सिमटती चली गई.
ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि 6 मई को हुई बैठक में नेता प्रतिपक्ष या अन्य पदों को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं हुआ था.
उन्होंने कहा कि सिर्फ एक प्रस्ताव था कि चुनाव में सबसे ज्यादा मेहनत अभिषेक बनर्जी ने की है, इसलिए सभी लोग उनके सम्मान में खड़े होकर ताली बजाएं. कई विधायक खड़े होने को तैयार नहीं थे. दोबारा कहा गया तब लोग खड़े हुए. मैं खुद आधा खड़ा हुआ था. कई विधायक बैठे रहे.
ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि 19 मई की बैठक में हमें 6 मई की तारीख डालकर हस्ताक्षर करने को कहा गया. जब रजिस्टर देखा तो कई ऐसे नाम थे जिनके सामने हस्ताक्षर थे लेकिन संबंधित व्यक्ति मौजूद नहीं था.
बाद में हमें पता चला कि 19 मई की बैठक के हस्ताक्षरों को 6 मई की बैठक का बताकर इस्तेमाल किया गया. तभी हमें लगा कि कुछ गड़बड़ है.
ऋतब्रत बनर्जी बोले- 15 महीने तक अभिषेक बनर्जी से अपॉइंटमेंट नहीं मिला
ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि सांसद रहते हुए भी उन्हें अभिषेक बनर्जी से मिलने का समय नहीं मिला. 7 दिसंबर 2024 को जब मुझे राज्यसभा भेजा गया, तब मैंने अभिषेक बनर्जी से मिलने का समय मांगा था. पूरा 2025 निकल गया. कई बार याद दिलाया, लेकिन मुलाकात नहीं हुई. आखिरकार 2026 में विधानसभा चुनाव के बाद मुझे समय मिला. अगर एक सांसद को पार्टी के जनरल सेक्रेटरी से मिलने के लिए 15-16 महीने इंतजार करना पड़े तो स्थिति समझी जा सकती है.
सवाल: क्या आप ममता बनर्जी को अपना नेता मानते हैं?
ऋतब्रत बनर्जी: हम चाहते हैं कि ममता बनर्जी हमारी प्रधान मार्गदर्शक रहें. वह हमें दिशा दिखाती रहें. विपक्ष की राजनीति में उनका कद बहुत बड़ा है. लेकिन जहां तक विधायक दल का सवाल है, उसका अभिषेक बनर्जी से कोई संबंध नहीं है.
ऋतब्रत बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जो लोग हमारी सुरक्षा हटाने की बात करते हैं, मैं उन्हें चुनौती देता हूँ कि कालीघाट में अपने घर से 50-60 कदम बिना सुरक्षा के चलकर दिखाएं. जनता के बीच जाने का साहस नहीं है.
इंद्रजीत कुंडू