क्या डिटेंशन सेंटर की तरह काम करेंगे 'Holding Centers'? बांग्लादेशियों-रोहिंग्याओं को लेकर ये है बंगाल सरकार का प्लान

पश्चिम बंगाल सरकार ने बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के लिए होल्डिंग सेंटर बनाने के आदेश दिए हैं. इन सेंटरों में संदिग्ध विदेशी नागरिकों को रखा जाएगा, जहां उनकी नागरिकता और दस्तावेजों की जांच होगी. इसके बाद घुसपैठियों को सीमा सुरक्षा बल (BSF) के हवाले कर दिया जाएगा, जो उन्हें वापस बांग्लादेश भेजेगा.

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घुसपैठियों को निकालने के लिए बंगाल सरकार होल्डिंग सेंटर बना रही है. (Photo- ITGD) घुसपैठियों को निकालने के लिए बंगाल सरकार होल्डिंग सेंटर बना रही है. (Photo- ITGD)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:44 AM IST

पश्चिम बंगाल में शुभेंदु सरकार ने राज्य में अवैध घुसपैठ के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है. सरकार ने अपनी 'डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट' नीति को जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है. राज्य सरकार ने बांग्लादेशी और रोहिंग्याओं के लिए होल्डिंग सेंटर बनाए जाने के आदेश दिए हैं. इसके तहत घुसपैठियों को राज्य से बाहर निकाला जाएगा. 

बंगाल सरकार ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों को संदिग्ध विदेशी नागरिकों और सजा पूरी कर चुके विदेशी कैदियों के लिए 'होल्डिंग सेंटर बनाने के निर्देश जारी किया है. इस आदेश के बाद ये सवाल उठने लगा है कि क्या ये होल्डिंग सेंटर असल में 'डिटेंशन सेंटर' की तरह काम करेंगे? 

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न्यूज एजेंसी पीटीआई की मानें तो सरकारी आदेश के मुताबिक, ये होल्डिंग सेंटर एक तरह से अस्थायी ट्रांजिट सुविधाएं होंगी. इनका काम किसी को स्थायी रूप से जेल में रखना नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक रोकना है.

कौन तय करेगा नागरिकता?

गाइडलाइंस के तहत अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वाले संदिग्ध लोगों को इन होल्डिंग सेंटरों में ज्यादा से ज्यादा 30 दिनों तक रखा जा सकता है. इस दौरान उनकी नागरिकता और दस्तावेजों का वेरिफिकेशन किया जाएगा. नागरिकता तय करने का अंतिम फैसला जिलाधिकारी या उनके समकक्ष रैंक के अधिकारी करेंगे.

डिटेंशन सेंटर की तरह काम करेंगे होल्डिंग सेंटर

इन सेंटर में रखे गए लोगों का बायोमेट्रिक डेटा लिया जाएगा. इस जानकारी को एक केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा. पहचान पूरी होने के बाद इन अवैध प्रवासियों को देश से वापस भेजने के लिए सीमा सुरक्षा अधिकारियों को सौंप दिया जाएगा. इससे ये साफ है कि ये होल्डिंग सेंटर कहीं न कहीं डिटेंशन सेंटर की तरह ही काम करेंगे, जहां से सीधे डिपोर्टेशन की कार्रवाई होगी.

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यह भी पढ़ें: बांग्लादेशी और रोहिंग्याओं को डिपोर्ट करने के लिए बनेंगे होल्डिंग सेंटर, शुभेंदु सरकार का बड़ा फैसला

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया था कि अब राज्य की पुलिस अवैध घुसपैठियों को पकड़ने के बाद लंबी और थकाऊ कानूनी प्रक्रियाओं में नहीं उलझाएगी. राज्य पुलिस इन पकड़े गए घुसपैठियों को सीधे BSF को सौंप देगी. इसके बाद बीएसएफ सीधे 'बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश' के साथ तालमेल बिठाकर उन्हें वापस बांग्लादेश डिपोर्ट करेगी.

CAA और अवैध प्रवासियों में अंतर

शुभेंदु सरकार ने शरणार्थियों और अवैध घुसपैठियों के बीच अंतर को पूरी तरह साफ कर दिया है. मुख्यमंत्री ने कहा है, 'जो लोग नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के दायरे से बाहर हैं, वो सभी अवैध अप्रवासी माने जाएंगे. उन्हें राज्य की पुलिस गिरफ्तार करेगी और सीधे बीएसएफ के हवाले कर देगी.

असम में भी बनाए गए थे होल्डिंग सेंटर

बंगाल से पहले असम में भी विदेशी नागरिकों और संदिग्ध घुसपैठियों को रखने के लिए डिटेंशन सेंटर बनाए गए थे. लेकिन मानवाधिकार विवादों और सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद, गोलपारा के मटिया में देश का पहला सबसे बड़ा और अलग 'ट्रांजिट कैंप' (होल्डिंग सेंटर) बनाया गया.

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