पश्चिम बंगाल विधानसभा का विशेष सत्र 29 जून को चला. एक दिन के इस सत्र में विधानसभा से पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधि नियंत्रण विधेयक, 2026 पारित कर दिया गया. इसे एंटी गुंडा बिल भी कहा जा रहा है. इस बिल के पक्ष में 176 और विपक्ष में 41 वोट पड़े. यह बिल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार वाले उत्तर प्रदेश और गुजरात में लागू कानून के मॉडल पर लाया गया.
पश्चिम बंगाल में एंटी गुंडा बिल की जरूरत क्यों पड़ी? इसे लेकर शुभेंदु अधिकारी ने सरकार का रुख स्पष्ट किया है. इस बिल पर बोलते हुए सीएम शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में कहा कि ये कानून लागू करने से पहले समझना होगा कि पिछली सरकार ने अपराध से संबंधित कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ठोस कदम नहीं उठाए. उन्होंने कहा कि इस तरह का कानून देश के कई राज्यों में अलग-अलग नाम से पहले से लागू है.
'कई राज्यों में लागू हैं ऐसे कानून'
सीएम शुभेंदु ने कहा कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, दिल्ली, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में इस तरह का कानून पहले से ही लागू है. उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुंडा संस्कृति की शुरुआत सीपीएम ने की थी. सीएम शुभेंदु ने आगे कहा कि साल 2019 के बाद तत्कालीन सरकार ने विशेष समुदाय को यह संदेश दिया कि वह उनके साथ है.
उन्होंने आरोप लगाया कि सीपीएम समर्थक हरगोविंद दास और चंदन दास की हत्या कर दी गई और उनके परिजनों को गंभीर कठिनाइयों से जूझना पड़ा. सीएम शुभेंदु ने दावा किया कि उस दौरान बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ हुई थी, सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया था. उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि इस कानून का दुरुपयोग नहीं किया जाएगा. संपत्तियों को नुकसान से बचाना सरकार की जिम्मेदारी है और इसी के लिए यह कानून लाया गया है.
सीएम शुभेंदु ने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद से यह सुनिश्चित किया है कि नुकसान की भरपाई दोषियों से ही की जाए. केवल जेल भेजना पर्याप्त नहीं है. उन्होंने कहा कि दोषियों की चल-अचल संपत्ति भी जब्त की जाएगी. सीएम शुभेंदु ने कहा कि सरकार किसी भी तरह की अवैध गतिविधि को जारी नहीं रहने देगी. पुराने कानूनों में कई खामियां थीं, लेकिन इसमें ऐसी कोई गुंजाइश नहीं है. यह कानून गुंडों पर कार्रवाई के लिए बनाया गया है.
अनिर्बन सिन्हा रॉय