फर्जी साइन मामले में अभिषेक के जवाब से संतुष्ट नहीं है CID, 14 को फिर होगी पूछताछ

तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी कानूनी शिकंजे में बुरी तरह फंसते नजर आ रहे हैं. पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेताओं की नियुक्ति से जुड़े कथित फर्जी दस्तखत मामले में सीआईडी ने बुधवार को उनसे करीब साढ़े पांच घंटे तक मैराथन पूछताछ की और संतोषजनक जवाब न मिलने पर उन्हें 14 जून को दोबारा तलब किया है.

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अभिषेक बनर्जी से 5 घंटे से ज्यादा पूछताछ. (Photo: PTI) अभिषेक बनर्जी से 5 घंटे से ज्यादा पूछताछ. (Photo: PTI)

तपस सेनगुप्ता

  • कोलकाता,
  • 12 जून 2026,
  • अपडेटेड 3:28 AM IST

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी से फर्जी हस्ताक्षर मामले में CID ने बुधवार देर रात करीब 5.5 घंटे तक पूछताछ की. बताया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान अभिषेक कई सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए, इसी लिए एजेंसी ने उन्हें एक बार फिर समन भेजा है.

समन में टीएमसी नेता को 14 जून (रविवार) को दोपहर 12 बजे CID मुख्यालय में पेश होने के निर्देश दिए गए हैं. सूत्रों का कहना है कि गुरुवार को भवानी भवन में हुई लंबी पूछताछ के दौरान अभिषेक कई सवालों पर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए. CID सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान कई बार अभिषेक बनर्जी का गुस्सा भी फूट पड़ा.

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सवालों से बचते दिखी अभिषेक: सूत्र

सीआईडी सूत्रों के मुताबिक, जांच अधिकारियों ने उन 13 विधायकों के बयान दर्ज कर लिए हैं, जिनके हस्ताक्षर ब्लॉक अक्षरों में पाए गए थे. बुधवार को जब इस संबंध में अभिषेक बनर्जी से सवाल किए गए तो वह पार्टी विधायकों से जुड़ी इस प्रस्ताव पुस्तिका (Resolution Book) पर सीधे जवाब देने से बचते नजर आए. पूछताछ के दौरान वह कई बार अपना आपा भी खो बैठे. सीआईडी अधिकारी उनके गोलमोल जवाबों से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हुए. इसके बाद सीआईडी ने उन्हें समन जारी कर फिर से पूछताछ के लिए तलब किया है.

पूछताछ के बाद अभिषेक बनर्जी सीधे तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी के आवास पहुंचे. करीब 5.5 घंटे की पूछताछ के बाद उनका ये दौरा काफी अहम माना जा रहा है.

क्या है मामला

दरअसल, ये पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब अभिषेक बनर्जी ने 9 मई को विधानसभा अध्यक्ष को सूचित किया कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस विधायी दल की बैठक में शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष, आशिमा पात्रा और नैना बंद्योपाध्याय को उप नेता प्रतिपक्ष और फिरहाद हाकिम को मुख्य सचेतक नियुक्त करने का फैसला लिया गया था. इसके बाद विधानसभा के प्रधान सचिव ने 18 मई को पत्र लिखकर बैठक का ब्योरा और विधायकों के हस्ताक्षर वाला प्रस्ताव मांगा. अभिषेक ने 20 मई को प्रस्ताव पुस्तिका सौंपी, जिसमें दावा किया गया कि 6 मई की बैठक में 70 विधायक मौजूद थे.

इस मामले में नया मोड़ तब आया, जब 27 मई को टीएमसी के ही दो विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने विधानसभा अध्यक्ष से लिखित शिकायत कर दी. उन्होंने आरोप लगाया कि 6 मई को ऐसा कोई प्रस्ताव पास नहीं हुआ था और उन्होंने केवल 19 मई को ही हस्ताक्षर किए थे. उन्होंने 6 मई के प्रस्ताव को पूरी तरह मनगढ़ंत और जाली बताया, जिसमें 14 हस्ताक्षर ब्लॉक अक्षरों में थे. इस बगावत के बाद टीएमसी ने दल-विरोधी गतिविधियों के आरोप में इन दोनों विधायकों को पार्टी से निलंबित कर दिया है.

इसी बीच अभिषेक को भर्ती घोटाले के मामले में 15 जून को ईडी कार्यालय में पेश होने का निर्देश भी दिया गया है.

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