अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अब नई जानकारी सामने आई है. जिसके अनुसार पुलिस ने अब चोरी के पैसे का पता लगाने के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की मदद मांगी है. पुलिस यह पता लगाएगी कि आखिर हेराफेरी का पैसा कहां-कहां लगाया गया और इसमें कितने लोग शामिल हैं. पुलिस आरोपियों की छिपी हुई संपत्ति की पहचान करने और अन्य संभावित लाभार्थियों की भूमिका का खुलासा करने के लिए इनकम टैक्स विभाग से मदद ले रही है.
50 बैंक खातों की जांच में जुटी पुलिस
पुलिस गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों से जुड़े लगभग 50 बैंक खातों की जांच कर रही है. साथ ही सभी खाते में 2022 से हुए लेन-देन की भी पड़ताल कर रही है. एक अधिकारी ने बताया कि वे इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या आरोपियों ने चोरी के पैसे को रिश्तेदारों के खातों के ज़रिए इधर-उधर किया, शेयर बाज़ार में निवेश किया, अचल संपत्ति में बदला या अन्य वित्तीय साधनों में लगाया.
सूत्रों ने बताया कि पुलिस ने फंड की आवाजाही का पता लगाने के लिए विस्तृत बैंक स्टेटमेंट, KYC रिकॉर्ड, नॉमिनी की जानकारी और लेन-देन का इतिहास मांगा है. जांचकर्ता आरोपियों और उनके करीबी परिवार के सदस्यों द्वारा किए गए नकद जमा, बड़ी रकम की निकासी, खातों के बीच ट्रांसफर और निवेश का विश्लेषण कर रहे हैं, ताकि किसी भी बेहिसाब संपत्ति या बिना स्पष्टीकरण वाले वित्तीय लेन-देन की पहचान की जा सके.
आईटी विभाग से यह जांचने में मदद मांगी गई है कि क्या कथित तौर पर हासिल की गई रकम को इक्विटी बाज़ार, म्यूचुअल फंड, फिक्स्ड-इनकम इंस्ट्रूमेंट्स या रियल एस्टेट में निवेश किया गया था? क्या आरोपियों या उनके सहयोगियों ने कई लेन-देन के ज़रिए पैसे को छिपाने या उसका स्रोत बदलने की कोशिश की थी. अधिकारी जांच के दायरे में आने वाली अवधि के दौरान चल और अचल संपत्ति खरीदने के मामलों की भी जांच कर रहे हैं.
जांच के बाद संपत्ति की रिकवरी कर सकती है पुलिस
जांचकर्ताओं को संदेह है कि कथित तौर पर गबन किया गया फंड केवल आरोपियों के खातों तक ही सीमित नहीं रहा होगा. वे इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या रिश्तेदारों या अन्य सहयोगियों ने आरोपियों की ओर से पैसे को इधर-उधर करने या संपत्ति रखने में मदद की थी. वित्तीय जांच से उन अतिरिक्त लाभार्थियों या व्यक्तियों की पहचान होने की भी उम्मीद है, जिन्होंने जानबूझकर मंदिर के दान के कथित दुरुपयोग में मदद की होगी.
सूत्रों ने कहा कि वित्तीय विश्लेषण से पैसे के पूरे लेन-देन का पता लगाने, अपराध से हासिल कथित रकम का हिसाब लगाने और यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि क्या वित्तीय और भ्रष्टाचार-रोधी कानूनों के तहत अतिरिक्त अपराध हुए हैं. जांच के नतीजों से आगे की रिकवरी, संपत्ति ज़ब्त करने और संभावित गिरफ्तारियों में भी मदद मिल सकती है. अधिकारियों के अनुसार मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई बैंकिंग रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच और अभी चल रही वित्तीय जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी.
समर्थ श्रीवास्तव