'दिल्ली कूच' पर ब्रेक, 7 दिन का अल्टीमेटम... जानें दलित प्रेरणा स्थल पर रुकने को कैसे राजी हुए किसान

बातचीत खास तौर पर दो मुद्दों पर थी. पहला मुद्दा था कि जो जमीन किसानों से अधिग्रहित की गई है, उसका 10% डेवलप एरिया किसानों को दिया जाए और दूसरा यह कि जो भूमि अधिग्रहण कानून 2013 में पास किया गया था, उसे नोएडा और आसपास के इलाकों में भी लागू किया जाए ताकि किसानों को ज्यादा मुआवजा मिले.

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नोएडा के किसानों ने प्रशासन को एक हफ्ते का समय देकर दिल्ली कूच फिलहाल टाल दिया. (PTI Photo) नोएडा के किसानों ने प्रशासन को एक हफ्ते का समय देकर दिल्ली कूच फिलहाल टाल दिया. (PTI Photo)

कुमार कुणाल

  • नोएडा ,
  • 02 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 6:56 AM IST

नोएडा की सड़कों पर दिनभर हंगामा बरपता रहा. किसान दिल्ली कूच कर रहे थे और उनकी तादाद हजारों में थी. लेकिन शाम होते-होते एक आंशिक कामयाबी मिली और प्रशासन के अधिकारी किसान नेताओं को सड़क से हटने के लिए मनाने में कामयाब रहे. लेकिन उससे पहले किसानों का जत्था लगभग दो किलोमीटर पैदल मार्च कर चुका था और इस दौरान दिल्ली और ग्रेटर नोएडा के बीच एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक पूरी तरह बंद पड़ा हुआ था.

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किसानों की बातचीत 1 दिसंबर को अथॉरिटी के साथ विफल हुई, तो उन्होंने ऐलान किया कि 2 दिसंबर को वे अपनी बात केंद्र सरकार को सुनाने के लिए दिल्ली कूच करेंगे. ठीक 12 बजे किसानों का जमावड़ा दिल्ली बॉर्डर से लगभग 4 किलोमीटर दूर महामाया फ्लाईओवर के पास लगना शुरू हो गया. देखते-देखते हजारों किसान इकट्ठे हो गए, जिनमें बड़ी तादाद में महिलाएं भी थीं. थोड़ी देर आपस में विचार-विमर्श करने के बाद सारे किसान दिल्ली की तरफ आगे बढ़ने लगे.

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देखते-देखते उन्होंने पुलिस बैरिकेड तोड़ डाले और दलित प्रेरणा स्थल पहुंच गए. सभी के हाथों में अलग-अलग यूनियन के झंडे थे और सिर पर टोपी. दलित प्रेरणा स्थल पर लगभग डेढ़ बजे किसानों ने धरना देना शुरू किया और कहा कि सरकार बात सुनने को राजी नहीं हो रही है. किसानों की समस्या नोएडा और आसपास की जुड़ी तीनों अथॉरिटी से थी. नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना अथॉरिटी के आला अधिकारी किसानों से बातचीत करने दलित प्रेरणा स्थल के सामने वाली सड़क पर बैठ गए.

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बातचीत खास तौर पर दो मुद्दों पर थी. पहला मुद्दा था कि जो जमीन किसानों से अधिग्रहित की गई है, उसका 10% डेवलप एरिया किसानों को दिया जाए और दूसरा यह कि जो भूमि अधिग्रहण कानून 2013 में पास किया गया था, उसे नोएडा और आसपास के इलाकों में भी लागू किया जाए ताकि किसानों को ज्यादा मुआवजा मिले. जो अधिकारी बातचीत करने आए थे, वे इतने सीनियर नहीं थे कि इन दोनों मुद्दों पर किसानों को कोई लिखित आश्वासन दे पाते. इसलिए यह वादा किया गया की मुख्य सचिव स्तर की वार्ता इसी हफ्ते होगी और तब तक किसान सड़क से हटकर दलित प्रेरणा स्थल के अंदर अपना धरना जारी रखेंगे.

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किसानों और अधिकारियों के बीच इस बात पर सहमति बनी है कि उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव से बातचीत अगले एक हफ्ते के भीतर होगी. तब तक आंदोलनकारी किसान सड़क से सटे दलित प्रेरणा स्थल के अंदर बैठेंगे और धरना देते रहेंगे. अगर बातचीत सफल होती है तो वे अपने घरों को वापस लौट जाएंगे और अगर बात नहीं बनती है तो दोबारा दिल्ली कूच करेंगे. फिलहाल नोएडा एक्सप्रेसवे पर आज शाम 4 बजे से ट्रैफिक चालू कर दिया गया है.

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