'चोर' बंदरों से राष्ट्रपति मुर्मू का चश्मा बचाने का जुगाड़, वृंदावन में लगेंगे लंगूरों के कटआउट

वृंदावन में बंदरों की शरारतें अब सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी चुनौती बन गई हैं. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के तीन दिवसीय दौरे से पहले चश्मा छीनने वाले बंदरों को काबू में रखने के लिए अनोखा उपाय किया गया है. वन्यजीव कानूनों के चलते असली लंगूरों की तैनाती संभव नहीं होने पर अब लंगूरों के कटआउट और विशेष टीमों के जरिए सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी.  

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वृंदावन में लगेंगे लंगूरों के कटआउट (Photo: itg) वृंदावन में लगेंगे लंगूरों के कटआउट (Photo: itg)

मदन गोपाल शर्मा

  • मथुरा,
  • 17 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:55 AM IST

उत्तर प्रदेश में मथुरा के वृंदावन में बंदरों की शरारतें लंबे समय से स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं, लेकिन इस बार मामला कुछ अलग है. देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रस्तावित दौरे को देखते हुए प्रशासन के सामने इन ‘चश्मा चोर’ बंदरों से निपटना बड़ी चुनौती बन गया है.

झपट्टा मारकर चश्मा छीन लेते हैं बंदर

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वृंदावन के बाजारों और मंदिरों के आसपास सक्रिय बंदर खासतौर पर चश्मा पहनने वाले लोगों को निशाना बनाते हैं. वे झपट्टा मारकर चश्मा छीन लेते हैं और फिर उसे लौटाने के बदले खाने-पीने की चीजें, खासकर फ्रूटी जैसे पैकेट की मांग करते हैं. यह अनोखी सी डील यहां आम बात बन चुका है.

बंदरों की हरकतों पर कंट्रोल जरूरी

राष्ट्रपति के 19 मार्च से शुरू हो रहे तीन दिवसीय दौरे के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की असुविधा से बचना चाहती हैं. कार्यक्रम के तहत राष्ट्रपति वृंदावन के प्रमुख स्थलों- उड़िया बाबा आश्रम, रामकृष्ण मिशन सेवा चैरिटेबल अस्पताल का दौरा करेंगी और 21 मार्च को गोवर्धन की परिक्रमा भी प्रस्तावित है. ऐसे में बंदरों की हरकतों पर नियंत्रण जरूरी हो गया है.

सुरक्षा में लंगूरों को लाना संभव नहीं, तो...

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पहले ऐसे मौकों पर बंदरों को भगाने के लिए प्रशिक्षित लंगूरों को तैनात किया जाता था, लेकिन अब वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत ऐसा करना संभव नहीं है. इसी वजह से इस बार प्रशासन ने एक नया तरीका अपनाया है- लंगूरों के कटआउट. माना जाता है कि बंदर लंगूरों से डरते हैं, इसलिए उनके जैसे दिखने वाले कटआउट लगाकर उन्हें दूर रखने की कोशिश की जा रही है.

गुलेल, लाठी-डंडों और लेजर लाइट

इसके अलावा वन विभाग की करीब 30 सदस्यीय टीम को भी तैनात किया गया है. ये कर्मचारी गुलेल, लाठी-डंडों और लेजर लाइट जैसे साधनों के साथ संवेदनशील इलाकों में निगरानी करेंगे. बंदरों की अधिक मौजूदगी वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त स्टाफ लगाया जाएगा, ताकि किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके. प्रशासन को उम्मीद है कि इन उपायों से राष्ट्रपति के दौरे के दौरान कोई अप्रिय स्थिति नहीं बनेगी.  

 
 

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