यूपी: गाजियाबाद में नेशनल पैरा एथलीट की मौत! पीठ पर घाव से गहराया हत्या का शक

राष्ट्रीय पैरा एथलीट चिराग त्यागी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है. उनका शव गाजियाबाद के कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित साईं उपवन इलाके में बरामद किया गया. वहीं, एक संदिग्ध शख्स को हिरासत में ले लिया गया है.

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राष्ट्रीय पैरा खिलाड़ी चिराग त्यागी की संदिग्ध मौत से खेल जगत में शोक (Photo: ITG) राष्ट्रीय पैरा खिलाड़ी चिराग त्यागी की संदिग्ध मौत से खेल जगत में शोक (Photo: ITG)

अरविंद ओझा

  • गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश,
  • 30 मई 2026,
  • अपडेटेड 10:54 PM IST

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक नेशनल पैरा एथलीट की लाश मिली है. पुलिस को दोपहर में इसकी खबर मिली. पीठ पर एक छेद मिला है. गोली लगी है या किसी और चीज से चोट. यह पोस्टमॉर्टम के बाद ही पता चलेगा. सीसीटीवी फुटेज के आधार पर एक संदिग्ध शख्स को हिरासत में लिया गया है.

गाजियाबाद के कोतवाली थाना इलाके में साईं उपवन में नेशनल पैरा एथलीट चिराग त्यागी की लाश मिली है. चिराग दिल्ली के एक हॉस्टल में रहता था. सुबह वो वहां से अपने गांव बसंतपुर सत्थली मुरादनगर के लिए निकला था. लेकिन वो घर नहीं पहुंचा. उसकी लाश साईं उपवन में मिली.

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कोतवाली के SHO सचिन कुमार ने बताया कि चिराग की पीठ पर एक छेद है. अभी यह साफ नहीं है कि यह छेद गोली से हुआ है या किसी और चीज से. पोस्टमॉर्टम के बाद ही सच्चाई सामने आएगी. चिराग के परिवार को खबर दे दी गई है. लाश को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा जा रहा है.

बेंगलुरु में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में 400 मीटर दौड़ का गोल्ड जीता था

गाजियाबाद के मुरादनगर क्षेत्र के बसंतपुर सैंथली गांव के रहने वाले पैरा एथलीट चिराग त्यागी देश के उभरते हुए खिलाड़ियों में शामिल थे.

चिराग ने हाल ही में बेंगलुरु में आयोजित राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन किया था. उन्होंने 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता और इसी जीत के साथ पैरा एशियन गेम्स के लिए क्वालीफाई भी कर लिया था.

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एशियन गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व करने का उनका सपना पूरा होने के बेहद करीब था. राष्ट्रीय स्तर पर मिली इस बड़ी सफलता के बाद उनके परिवार, गांव और खेल जगत में खुशी का माहौल था.

चिराग की उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही थी क्योंकि उन्होंने कड़ी मेहनत के दम पर राष्ट्रीय प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का रास्ता बनाया था.

इनपुट: अंशुल

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