उत्तर प्रदेश के बरेली में पुलिस ने एक ऐसी महिला को गिरफ्तार किया है, जिस पर खुद को IAS अधिकारी बताकर शादी करने, फर्जी पहचान के जरिए धोखाधड़ी करने और बाद में पति के परिवार से 40 लाख रुपये मांगने का आरोप है. पुलिस के मुताबिक, फरीदपुर थाना क्षेत्र के गांव पचौमी के रहने वाले अभिषेक की मुलाकात बदायूं के बिल्सी थाना क्षेत्र के गांव सतेती की रहने वाली साधना से हुई थी.
आरोप है कि साधना ने खुद को IAS अधिकारी बताया. उसने कहा कि उसका अपॉइंटमेंट लेटर कभी भी आ सकता है और वह जल्द ही जॉइन करने वाली है. पुलिस का कहना है कि उसने अभिषेक से यह भी कहा कि 'तुम्हारी भी सरकारी नौकरी लगवा दूंगी.' सरकारी नौकरी... ऊपर से IAS अफसर की पहचान. परिवार को लगा कि रिश्ता अच्छा है. भरोसे में आकर दोनों की शादी हो गई.
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पुलिस का कहना है कि साधना ने सोशल मीडिया पर खुद को IAS अधिकारी की तरह दिखाया. उसकी प्रोफाइल पर ऐसी तस्वीरें और वीडियो थे, जिन्हें देखकर कोई भी आसानी से धोखा खा सकता था. यानी जो कहानी उसने अभिषेक के परिवार को सुनाई, वही कहानी सोशल मीडिया पर भी दिखाई. अभिषेक का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद रिश्ते में तनाव शुरू हो गया. फिर बात इतनी बढ़ी कि महिला ने कथित तौर पर पति और उसके परिवार से 40 लाख रुपये की डिमांड कर दी.
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शिकायत में यह भी कहा गया है कि पैसे नहीं देने पर पूरे परिवार को जेल भिजवाने की धमकी दी गई. पति पर 20 बीघा जमीन बेचकर अस्पताल खुलवाने का दबाव भी बनाया गया. मामला थाने पहुंचा तो पुलिस ने सबसे पहले महिला के IAS होने के दावे की जांच की. जांच में पुलिस को ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं मिला, जिससे साबित हो कि वह भारतीय प्रशासनिक सेवा में है. पूछताछ के दौरान महिला ने कथित तौर पर बताया कि वह सिर्फ BSc तक पढ़ी है.
सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही थी. पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर IAS अधिकारी होने का दावा करने वाली तस्वीरें और वीडियो भी फर्जी थे. एसपी साउथ अंशिका वर्मा ने बताया कि अभिषेक की शिकायत पर केस दर्ज किया गया. शिकायत में आरोप था कि साधना और उसके परिवार ने फर्जी तथ्यों के आधार पर शादी कराई. महिला ने खुद को IAS अधिकारी बताया और सरकारी नौकरी दिलाने का लालच भी दिया.
पुलिस की जांच में सामने आई फर्जीवाड़े की कहानी
पुलिस के मुताबिक, जांच में सामने आया कि महिला किसी भी सरकारी सेवा में नहीं है. इसके बाद उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से जेल भेज दिया गया. मामले की जांच जारी है. इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सिर्फ सोशल मीडिया देखकर किसी की पहचान पर भरोसा किया जा सकता है? आज फोटो एडिट करना मुश्किल नहीं है. कुछ तस्वीरें, कुछ रील और थोड़ा-सा कॉन्फिडेंस... कई बार लोगों को यकीन दिलाने के लिए इतना ही काफी होता है. सोशल मीडिया पर दिखने वाली सभी कहानियां सच नहीं होतीं. फिलहाल बरेली पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है.
कृष्ण गोपाल राज