EXCLUSIVE: स्टाफ भर्ती के लिए ट्रस्ट से नाम के साथ बैंक को मिलती थी लिस्ट, राम मंदिर चढ़ावा चोरी में बड़ा खुलासा

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा खुलासा हुआ है, जिससे भर्ती प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े हुए है. दरअसल, हाउसकीपिंग स्टाफ के नाम ट्रस्ट से बैंक और फिर एजेंसी को भेजे गए थे.

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा खुलासा. (File Photo: ITG) राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा खुलासा. (File Photo: ITG)

अरविंद ओझा / अंकित कुमार

  • अयोध्या,
  • 03 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:36 PM IST

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच के बीच आजतक की एक्सक्लूसिव पड़ताल में भर्ती प्रक्रिया को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. सिक्योरिटी फर्म के अधिकारियों का दावा है कि मंदिर परिसर में तैनात हाउसकीपिंग स्टाफ के नाम सीधे ट्रस्ट से बैंक तक पहुंचे और फिर बैंक ने उन्हें एजेंसी के पेरोल पर रखने को कहा. इस दावे के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि इन नियुक्तियों की सिफारिश किसने की और भर्ती प्रक्रिया में किस स्तर पर फैसला लिया गया.

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अब चढ़ावा चोरी मुद्दे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्टाफ के लोगों की भर्ती किसने की और ये किसके करीबी हैं. यह समझने के लिए आजतक ने सैनिक सिक्योरिटी फर्म के डायरेक्टर गौरव और एरिया मैनेजर जयराम से बातचीत की. 

जयराम वही शख्स है, जो लोगों की भर्ती करने के लिए गया था. सिक्योरिटी फर्म से जुड़े दोनों लोगों से एसआईटी और अयोध्या पुलिस ने भी पूछताछ की है.

आजतक से बातचीत में बड़ा खुलासा!

आजतक के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में खुलासा करते हुए सैनिक सिक्योरिटी फर्म ने बताया कि जो स्टाफ मंदिर परिसर में काम करते हैं, उनकी भर्ती भले ही बैंक के जरिए कोई दूसरी एजेंसी करती है, लेकिन उन लोगों का नाम मंदिर ट्रस्ट के लोग ही करते हैं. यानी स्टाफ भले ही सिक्योरिटी एजेंसी का हो, लेकिन उसमें जो लोग काम करते हैं, उनकी भर्ती करते वक्त नाम की लिस्ट मंदिर ट्रस्ट की तरफ से ही जाती है कि इन लोगों को पेरोल पर रख लीजिए. इसके बाद, कंपनी उनको हायर कर लेती है और सैलरी मिलनी शुरू हो जाती है.

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सैनिक सिक्योरिटी फर्म के एरिया मैनेजर जय राम ने आजतक से बात करते हुए बताया, "हमसे पूछा गया कि आपने लोगों को कैसे भर्ती किया, तो मैंने कहा कि हम पैरलल कंपनियां हैं. मैं अयोध्या में काम कर रहा था. अयोध्या ब्रांच में मेरे चार आदमी लगे हैं. नवंबर 2024 में बुलाकर 15 आदमियों का वर्क ऑर्डर दिया गया. उन बंदों के नाम और लिस्ट मुझे दी गई कि इन्हीं बंदों को काम पर रखना है और पेमेंट देना है. इससे पहले भी जो चार लोग काम कर रहे थे, उनके नाम भी बैंक ने ही दिए थे."

'टेंडर बड़ा था, इसलिए मना नहीं कर पाए...'

हाउसकीपिंग में लगे लोगों को हायर करने का क्या नियम होता है? इस सवाल पर जयराम ने कहा, "वर्क ऑर्डर मिलने के बाद मेनपावर देना होता है. ज्यादातर यह होता है कि हमें कहा जाता है कि ये बंदे पहले से काम कर रहे हैं, इनको आप अपने पैनल पर रख लीजिए. कोई न कोई सिफारिश कर देता है."

फर्म के डायरेक्टर गौरव ने बताया, "हमारा स्टेट बैंक से हाउसकीपिंग स्टाफ के लिए कॉर्पोरेट लेवल पर अनुबंध है. हाउस कीपिंग स्टाफ हमें स्टेट बैंक ने दिया हुआ है और सिक्योरिटी का काम SIS का है. जो स्टाफ सेलेक्ट हुआ है, यह मंदिर से ही लिस्ट मिली थी कि ये हमारे आदमी हैं. उन्होंने यह लिस्ट बैंक को दी और बैंक ने हमको दिया कि आप इनको पेरोल पर रख लीजिए.

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यह भी पढ़ें: राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में RSS की एंट्री, SIT जांच और कड़ी सजा की मांग

हाउसकीपिंग स्टाफ को हायर करने के नियमों पर बात करते हुए गौरव कहते हैं, "हमारा काम करीब 8- 10 राज्यों में चल रहा है. अयोध्या के अलावा बाकी जगहों पर हम ही भर्ती करते हैं. लेकिन यहां मंदिर स्टेट बैंक ने हमसे 18- 19 आदमियों के लिए कहा था कि इनको आप अपने पेरोल पे रख लीजिए. राम मंदिर का टेंडर बड़ा था, इसलिए हम मना नहीं कर पाए."

यानी सैनिक सिक्योरिटी फर्म का काम सिर्फ इतना है कि उसको लोगों की लिस्ट मिल गई और उन्हें हायर कर लिया गया. ऐसे में फर्म पर भी सवाल उठता है. हमने इनसे वो वर्क ऑर्डर मांगा लेकिन हमें नहीं मिला.

सवाल है कि आखिर बैंक का वह कौन सा अधिकारी था, जिन्होंने नाम सहित लिस्ट दिया और सिक्योरिटी फर्म को बोला कि इनकी भर्ती कर लीजिए. अगर उससे पूछ की जाए, तो इस चंदा चोरी रैकेट में बड़ा खुलासा हो सकता है.

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