'BJP को शिक्षा में भी सांप्रदायिकता दिखती है', जौहर यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई पर भड़के अखिलेश यादव

रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर विवाद और गहरा गया है. 38 इमारतों के ध्वस्तीकरण के आदेश के बीच समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने बीजेपी पर शिक्षा को सांप्रदायिक नजरिए से देखने का आरोप लगाया है. वहीं पीडब्ल्यूडी ने यूनिवर्सिटी के गेट पर बोर्ड लगाकर सड़क को आम जनता का रास्ता बताया है. मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई के साथ राजनीतिक बहस का भी केंद्र बन गया है.

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ध्वस्तीकरण आदेश के बीच अखिलेश यादव का भाजपा पर निशाना. (Photo: ITG) ध्वस्तीकरण आदेश के बीच अखिलेश यादव का भाजपा पर निशाना. (Photo: ITG)

आमिर खान

  • लखनऊ ,
  • 16 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 4:11 PM IST

उत्तर प्रदेश के रामपुर में स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं. रामपुर विकास प्राधिकरण की तरफ से यूनिवर्सिटी की 40 में से 38 इमारतों को बिना स्वीकृत नक्शे के अवैध निर्माण मानते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किए जाने के बाद अब इस मुद्दे पर सियासत भी गरमा गई है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है. वहीं दूसरी ओर पीडब्ल्यूडी ने यूनिवर्सिटी परिसर से गुजरने वाली सड़क को आम जनता का रास्ता बताते हुए मुख्य गेट पर साइन बोर्ड लगा दिया है.

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अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में लिखा कि भाजपा को शिक्षा में भी सांप्रदायिकता दिखाई देती है. उन्होंने कहा कि शिक्षा, शिक्षक, छात्र और शिक्षा के बाद मिलने वाली नौकरियां भाजपा के एजेंडे में ही नहीं हैं. उन्होंने सवाल किया कि भाजपा अपने गैर-पंजीकृत सहयोगियों की अवैध इमारतों पर कार्रवाई कब करेगी. जब सहयोगी ही गैर-पंजीकृत हैं तो उनके भवन, कार्यालय और संस्थान वैध कैसे हो सकते हैं.

अखिलेश यादव का भाजपा पर निशाना

उधर रामपुर विकास प्राधिकरण की कार्रवाई के बाद जौहर यूनिवर्सिटी का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है. पूर्व मंत्री और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान का यह ड्रीम प्रोजेक्ट करीब 1500 बीघा जमीन पर बना हुआ है. विकास प्राधिकरण ने परिसर में मौजूद 40 भवनों में से 38 भवनों को बिना स्वीकृत नक्शे के निर्मित मानते हुए उनके ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया है.

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इसी बीच जौहर यूनिवर्सिटी के भीतर बनी पीडब्ल्यूडी की सड़क को लेकर भी नया घटनाक्रम सामने आया है. पीडब्ल्यूडी विभाग ने यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर बोर्ड लगाकर स्पष्ट किया है कि यह आम जनता का रास्ता है और कोई भी नागरिक इस सड़क का इस्तेमाल कर सकता है. इस कार्रवाई के बाद इलाके में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है.

बताया जा रहा है कि अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार के दौरान साल 2016-17 में यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट से लेकर परिसर के अंदर तक करीब 3.30 किलोमीटर लंबी फोरलेन सीसी सड़क का निर्माण कराया गया था. इस परियोजना की स्वीकृत लागत करीब 16 करोड़ रुपये थी, जबकि सिविल काम का टेंडर लगभग 13.50 करोड़ रुपये में हुआ था.

पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता किशन वीर सिंह ने बताया कि यह सड़क विभाग की है और सरकारी धन से बनाई गई है. उनके अनुसार साल 2019 में यूनिवर्सिटी की तरफ से मुख्य गेट बंद कर दिया गया था, जिसके बाद आम लोगों के साथ-साथ पीडब्ल्यूडी अधिकारियों का भी आना-जाना बंद हो गया. विभाग ने इस संबंध में नोटिस जारी किए थे और जवाब भी प्राप्त हुआ था.

उन्होंने बताया कि यह मामला अदालत तक पहुंचा. पहले हाईकोर्ट में सुनवाई हुई, जहां विभाग का मामला खारिज हो गया. इसके बाद पीडब्ल्यूडी लोअर कोर्ट गया, जहां फैसला विभाग के पक्ष में आया. बाद में यूनिवर्सिटी की तरफ से इस फैसले पर स्थगन आदेश ले लिया गया. उन्होंने कहा कि सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से को लेकर हाईकोर्ट ने 30 प्रतिशत राशि जमा कराने का निर्देश दिया था. इसके बाद से कई तारीखें लगीं, लेकिन अब तक अंतिम सुनवाई नहीं हो सकी है.

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किशन वीर सिंह ने कहा कि यह सड़क पूरी तरह पीडब्ल्यूडी की है और सरकारी धन से बनाई गई है. इसलिए इसका उपयोग आम जनता के लिए होना चाहिए. इसी उद्देश्य से यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर बोर्ड लगाया गया है, जिसमें इसे सार्वजनिक मार्ग बताया गया है. उन्होंने कहा कि जल्द ही परिसर के अंदर भी दो से तीन स्थानों पर ऐसे ही बोर्ड लगाए जाएंगे ताकि लोगों को जानकारी मिल सके कि यह सार्वजनिक सड़क है.

हाईकोर्ट और लोअर कोर्ट तक पहुंच चुका है सड़क का मामला

उन्होंने बताया कि यह सड़क जीरो प्वाइंट से लालपुर डैम तक जाती है और किसी भी व्यक्ति को इस रास्ते से आने-जाने में कोई रोक नहीं है. विभाग का कहना है कि यह सड़क सार्वजनिक उपयोग के लिए बनाई गई थी और आगे भी आम लोगों के लिए खुली रहेगी. इस बीच जौहर यूनिवर्सिटी पहुंचीं आजम खान की पत्नी तंजीन फातिमा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें इस मामले पर कुछ नहीं कहना है. उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि उन्हें 15 दिन का समय दिया गया है. फिलहाल जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर एक तरफ प्रशासनिक कार्रवाई जारी है तो दूसरी तरफ इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. अब सबकी नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई और अदालत में चल रही सुनवाई पर टिकी हुई है.
 

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