पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ चल रहे आंदोलन की कमान किसी एक नेता के हाथ में नहीं है, लेकिन जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी के शौकत नवाज मीर, सरदार अमन खान और सरदार उमर नजीर खान इस विरोध प्रदर्शन के सबसे चर्चित चेहरों में शामिल हैं. बिजली, महंगाई, टैक्स और स्थानीय अधिकारों को लेकर चल रहे आंदोलन में इन नेताओं की भूमिका लगातार सुर्खियों में बनी हुई है.
मुजफ्फराबाद समेत पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के कई इलाकों में पिछले कुछ हफ्तों से पाकिस्तान सरकार के खिलाफ गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा. बिजली दरों में भारी बढ़ोतरी, महंगाई, नए-नए टैक्स और स्थानीय संसाधनों पर अपना हक जैसे मुद्दों को लेकर जम्मू-कश्मीर जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के आह्वान पर लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं.
इस आंदोलन में सबसे ज्यादा चर्चा में रहे हैं तीन नाम:
शौकत नवाज मीर
JAAC के सबसे प्रमुख और मुखर नेताओं में शौकत नवाज़ मीर का नाम सबसे ऊपर आता है. 2024 से चल रहे आंदोलन में उन्होंने लगातार सक्रिय भूमिका निभाई है. हाल ही में उनकी गिरफ्तारी के बाद प्रदर्शन और तीखे हो गए. बिजली बिल, महंगाई और राजनीतिक अधिकारों को लेकर वे पाकिस्तान सरकार पर खुलकर हमला बोलते रहे हैं.
सरदार अमन खान
सरदार अमन खान भी JAAC के मुख्य नेताओं में शामिल हैं. हाल के प्रदर्शनों में उन्होंने समर्थकों से बड़े पैमाने पर सड़क पर उतरने की अपील की. उनके भाषण और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं. उन्होंने न सिर्फ आंदोलन को संगठित किया बल्कि आम लोगों को भी इसमें शामिल होने के लिए प्रेरित किया.
देखें ये रिपोर्ट
सरदार उमर नजीर खान
सरदार उमर नज़ीर खान JAAC के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता के तौर पर जानी-पहचानी शख्सियत हैं. संगठन की मांगों को मीडिया के सामने रखने और सरकार से बातचीत करने में उनकी भूमिका अहम रही है. आंदोलन की रणनीति बनाने और विभिन्न समूहों के बीच समन्वय बनाए रखने में वे लगातार सक्रिय रहे हैं.
अन्य नेता भी कर रहे हैं अहम भूमिका
इन तीनों के अलावा अमजद अली खान, इम्तियाज़ असलम और हफीज़ हमदानी जैसे नेता भी मैदान में डटे हुए हैं. ये नेता विभिन्न जिलों में प्रदर्शन आयोजित करने, व्यापारियों, वकीलों, छात्रों और नागरिक समाज को जोड़ने का काम कर रहे हैं.
सबसे बड़ी ताकत है सामूहिक नेतृत्व
स्थानीय पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है. JAAC की सबसे बड़ी ताकत इसका सामूहिक नेतृत्व है, जिसमें व्यापारी संगठन, ट्रांसपोर्ट यूनियन, वकील, छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता सब एक साथ हैं. गिरफ्तारियों के बावजूद आंदोलन नहीं रुका, बल्कि और फैलता जा रहा है.अब देखना यह है कि पाकिस्तान सरकार इस बढ़ते गुस्से को कैसे संभालती है.
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