कई बार सोशल मीडिया पर ऐसी कहानियां सामने आती हैं, जो इंसानियत पर भरोसा और मजबूत कर देती हैं. दुबई में रहने वाली भारतीय महिला मल्लिका बूबना के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. एक छोटी-सी गलती के बाद उन्हें लगा कि मामला वहीं खत्म हो गया, लेकिन दो साल बाद आए एक मैसेज ने उन्हें ही नहीं, बल्कि लाखों लोगों को हैरान कर दिया. यही वजह है कि उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
कार पर खरोंच लगी, लेकिन भागने की बजाय छोड़ा नोट
मल्लिका ने इंस्टाग्राम पर बताया कि ड्राइविंग सीखने के शुरुआती दिनों में पार्किंग करते समय उनकी कार से गलती से एक खड़ी कार पर हल्की-सी खरोंच लग गई. हादसे के बाद वह वहां से बिना बताए नहीं गईं.उन्होंने कार पर एक नोट चिपकाया, जिसमें अपनी गलती स्वीकार करते हुए मोबाइल नंबर लिख दिया, ताकि कार मालिक उनसे संपर्क कर सके. कुछ देर बाद कार चला रही जूलिया का फोन आया. उन्होंने बताया कि कार रेंटल कंपनी की है और नुकसान की भरपाई करनी होगी.
बिना बहस किए दे दिए 39 हजार रुपये
मल्लिका को बताया गया कि कार की मरम्मत के लिए 1,500 दिरहम (करीब 39 हजार रुपये) देने होंगे. उन्होंने बिना किसी बहस के पूरी रकम दे दी. उनका कहना था कि गलती उनकी थी, इसलिए जो नियम था, उसका पालन करना जरूरी था.
देखें वायरल वीडियो
दो साल बाद आया ऐसा मैसेज, जिसने जीत लिया दिल
करीब दो साल बाद अचानक जूलिया का एक मैसेज आया. उन्होंने बताया कि रेंटल कंपनी से फाइनल बिल मिलने के बाद पता चला कि कार की मरम्मत पर सिर्फ 800 दिरहम ही खर्च हुए थे.यानी मल्लिका ने 700 दिरहम (करीब 18 हजार रुपये) ज्यादा दे दिए थे. जूलिया ने तुरंत उनसे बैंक डिटेल्स मांगी और पूरी अतिरिक्त रकम वापस ट्रांसफर कर दी.
'ऐसे लोग आज भी हैं, इसलिए मुझे दुबई पसंद है'
मल्लिका ने वीडियो में कहा कि उन्हें बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि दो साल बाद कोई खुद उनसे संपर्क करके पैसे लौटाएगा. उन्होंने कहा कि इसी वजह से उन्हें दुबई में रहना पसंद है, क्योंकि यहां आज भी ऐसे लोग हैं, जो ईमानदारी को सबसे ऊपर रखते हैं. दिलचस्प बात यह है कि अब दोनों ने कॉफी पर मिलने का भी फैसला किया है.
वीडियो वायरल होने के बाद लोग जूलिया की ईमानदारी की जमकर तारीफ कर रहे हैं. एक यूजर ने लिखा कि दुनिया में आज भी ईमानदार लोग हैं, बस मिलने चाहिए. दूसरे ने लिखा कि 39 हजार रुपये देना बड़ी बात नहीं, लेकिन दो साल बाद 18 हजार रुपये लौटाना असली ईमानदारी है.वहीं एक अन्य यूजर ने कहा कि ऐसी कहानियां इंसानियत पर भरोसा और मजबूत कर देती हैं.
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