Jagannath Puri Rath Yatra 2026: डॉक्टरों ने स्टेथोस्कोप से किया भगवान जगन्नाथ का 'मेडिकल टेस्ट', वीडियो वायरल

Jagannath Puri Rath Yatra 2026: उत्तर प्रदेश के जौनपुर स्थित रासमंडल मंदिर में रथ यात्रा से पहले भगवान जगन्नाथ की प्रतीकात्मक स्वास्थ्य जांच की अनोखी परंपरा निभाई गई. डॉक्टरों ने स्टेथोस्कोप से भगवान का औपचारिक चेकअप किया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

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यह रस्म स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान के 'स्वास्थ्य लाभ' से जुड़ी धार्मिक मान्यता का हिस्सा है. ( Photo: India Today) यह रस्म स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान के 'स्वास्थ्य लाभ' से जुड़ी धार्मिक मान्यता का हिस्सा है. ( Photo: India Today)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 7:22 AM IST

उत्तर प्रदेश के जौनपुर से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. वीडियो में डॉक्टरों की एक टीम भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा का स्टेथोस्कोप से हेल्थ चेकअप करती हुई दिखाई दे रही है. पहली नजर में यह दृश्य लोगों को हैरान कर सकता है, लेकिन इसके पीछे सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा जुड़ी हुई है. यह वीडियो जौनपुर के प्रसिद्ध रासमंडल मंदिर का बताया जा रहा है. यहां हर साल भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा से पहले एक खास रस्म निभाई जाती है. इसी परंपरा के तहत डॉक्टरों की टीम भगवान की प्रतीकात्मक स्वास्थ्य जांच करती है. इस साल भी मंगलवार को यह रस्म पूरी की गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.

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स्नान पूर्णिमा के बाद क्यों 'बीमार' पड़ते हैं भगवान?
भगवान जगन्नाथ से जुड़ी मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा यानी स्नान पूर्णिमा के दिन भगवान को 108 कलशों के जल से स्नान कराया जाता है. धार्मिक विश्वास है कि इतना लंबा स्नान करने के बाद भगवान को बुखार आ जाता है और उनकी तबीयत खराब हो जाती है. इसी वजह से उन्हें कुछ दिनों के लिए विश्राम दिया जाता है.

क्या होता है अनासर काल?
स्नान पूर्णिमा के अगले दिन से लेकर आषाढ़ कृष्ण पक्ष की अमावस्या तक भगवान जगन्नाथ भक्तों को दर्शन नहीं देते. इस अवधि को 'अनासर काल' कहा जाता है. मान्यता है कि इस दौरान भगवान स्वास्थ्य लाभ करते हैं, इसलिए मंदिर के कपाट भी कुछ समय के लिए बंद रहते हैं.

इलाज के दौरान भगवान को क्या चढ़ाया जाता है?
इस दौरान भगवान को दवा के रूप में आयुर्वेदिक काढ़ा, जड़ी-बूटियां और हल्का भोजन अर्पित किया जाता है. यह सब भगवान के स्वस्थ होने का प्रतीक माना जाता है. रथ यात्रा शुरू होने से पहले उनकी सेहत की प्रतीकात्मक जांच भी इसी परंपरा का हिस्सा होती है. इसलिए डॉक्टर स्टेथोस्कोप और दूसरे मेडिकल इक्विपमेंट के साथ भगवान की औपचारिक जांच करते हैं.

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वीडियो पर लोगों ने क्या कहा?
वायरल वीडियो में डॉक्टर बड़ी श्रद्धा के साथ भगवान की प्रतिमा के पास पहुंचते हैं और स्टेथोस्कोप लगाकर जांच करते दिखाई देते हैं. इसके बाद मंदिर में विशेष पूजा की जाती है. यह दृश्य देखने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं. कुछ लोग इस परंपरा को देखकर हैरान हुए, जबकि कई लोगों ने इसे भारतीय संस्कृति और आस्था से जुड़ी अनोखी परंपरा बताया.

कई वर्षों से निभाई जा रही है यह परंपरा
जौनपुर के रासमंडल मंदिर में यह परंपरा कई वर्षों से निभाई जा रही है. स्थानीय लोगों के लिए यह केवल एक रस्म नहीं, बल्कि भगवान की बीमारी से स्वस्थ होने और रथ यात्रा की शुरुआत का शुभ संकेत मानी जाती है.

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