सोशल मीडिया पर इन दिनों चीन के छात्रों से जुड़ा एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में कुछ बच्चे मेट्रो के फर्श पर बैठकर होमवर्क करते दिखाई देते हैं, जबकि एक अन्य बच्चा सड़क किनारे अपनी कॉपी में कुछ लिखता नजर आता है. दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो चीन का है. इसे देखने के बाद एक बार फिर पढ़ाई के दबाव और शिक्षा व्यवस्था को लेकर बहस शुरू हो गई है.
वीडियो के कैप्शन में लिखा गया कि अगर आपने कभी चीन नहीं देखा है या वहां के छात्रों को पढ़ते हुए नहीं देखा है, तो आपने एक बिल्कुल अलग दुनिया मिस कर दी है." कैप्शन में आगे बताया गया कि चीन में प्राथमिक स्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी तक छात्रों की जिंदगी पढ़ाई के इर्द-गिर्द घूमती है. सोमवार से रविवार तक, दिन हो या रात, पढ़ाई और प्रतियोगिता का सिलसिला लगातार जारी रहता है.
दरअसल, चीन में पढ़ाई को सिर्फ अच्छी नौकरी पाने का जरिया नहीं माना जाता, बल्कि इसे भविष्य तय करने वाली सबसे बड़ी परीक्षा समझा जाता है. इसकी सबसे बड़ी मिसाल Gaokao परीक्षा है, जिसे दुनिया की सबसे कठिन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस परीक्षाओं में गिना जाता है. लाखों छात्र इस परीक्षा में बेहतर रैंक हासिल करने के लिए घंटों पढ़ाई करते हैं. कई बार वे नींद, खेल और मनोरंजन तक को पीछे छोड़ देते हैं.
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चीन क्या इसी वजह से आगे!
यही वजह है कि चीन को शिक्षा, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में दुनिया की अग्रणी ताकतों में गिना जाता है. अनुशासन, फोकस और लगातार मेहनत को वहां की सफलता का बड़ा कारण माना जाता है. हालांकि इस तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी है. विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक प्रतिस्पर्धा और पढ़ाई का दबाव कई छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालता है. तनाव, चिंता और अवसाद जैसे मुद्दों को लेकर भी समय-समय पर चर्चा होती रही है.कहीं ना कहीं ये बचपन की मासूमियत को छिन लेता है.
इस वीडियो ने भारत में भी बहस छेड़ दी है. यहां JEE, NEET और UPSC जैसी परीक्षाएं छात्रों पर भारी दबाव डालती हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ लंबे समय तक पढ़ना ही सफलता की गारंटी है? या फिर पढ़ाई के साथ मानसिक संतुलन, रचनात्मकता और जिंदगी का बैलेंस भी उतना ही जरूरी है? यही सवाल यह वायरल वीडियो लोगों के सामने छोड़ रहा है.
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