भारत का अपना मोबाइल ब्रांड... मोदी सरकार ने दिया इस टारगेट को बड़ा पुश, 62,500 करोड़ से कई गुना फायदा

मोबाइल फोन मैन्यूफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) स्कीम के लिए केबिनेट ने 62,500 करोड़ रुपये का अप्रूवल दे दिया है, जिसका मकसद भारत में मोबाइल इंडस्ट्री को बढ़ावा देना है. साथ ही भारत अपने मोबाइल ब्रांड को बढ़ावा देना चाहती है. आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं.

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भारत में स्मार्टफोन इंडस्ट्री को लेकर बड़ी तैयारी. (Photo: AI Generated) भारत में स्मार्टफोन इंडस्ट्री को लेकर बड़ी तैयारी. (Photo: AI Generated)

आजतक टेक्नोलॉजी डेस्क

  • नई दिल्ली ,
  • 16 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:59 AM IST

भारत सरकार देश में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रही है. अब केंद्रीय केबिनेट ने मोबाइल फोन मैन्यूफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) के साथ टोटल 62,500 करोड़ रुपये के बजट को अप्रूवल दे दिया है. 

भारत सरकार इस मोटी रकम की मदद से देश में फोन मैन्युफैक्चरिंग और मेड इन इंडिया ब्रांड को बड़े स्तर पर लेकर जाना चाहती है. साथ ही सेमीकॉन-2 के लिए 1.26 लाख करोड़ का अप्रूवल दिया है. 

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भारत सरकार MPMS स्कीम के तहत 62,500 करोड़ रुपये को पांच साल के दौरान खर्च करेगी. न्यू स्कीम का उद्देश बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रोनिक्स मैन्युफैक्टरिंग के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI-LSEM) की जगह लेना है, जो 31 मार्च 2026 को खत्म हो चुकी है. 

मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियों को इनेंसिटव 

MPMS प्रोजेक्ट को ऐसे डिजाइन किया गया है,जिसकी मदद से प्रोडक्शन को बड़े स्तर पर किया जा सके.

  • MPMS स्कीम की मदद से भारत में मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियों को बिक्री पर 2.25 परसेंट से 5 परसेंट तक का इनसेंटिव दिया जाएगा. 
  • कंपनियां मोबाइल फोन के मुख्य पार्टस और सब-असेंबली भारत से खरीदते हैं तो उनको 1.5 परसेंट तक का एडिशनल इनसेंटिव मिलेगा. 
  • भारतीय ब्रांडों को डिजाइन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए सेल पर 3 परसेंट का एडिशन इनसेंटिव दिया जाएगा. 

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फोन मेन्युफैक्चरिंग को लेकर बड़ी तैयारी  

MPMS योजना का मकसद मोबाइल फोन की मैन्युफैक्चरिंग भारत में करीब 39 लाख करोड़ तक पहुंचाने की है. इससे एक्सपोर्ट में भी इजाफा होगा. सरकार को उम्मीद है कि MPMS स्कीम के तहत 60 हजार डायरेक्ट रोजगार पैदा होने की उम्मीद की है, जिससे बहुत से युवाओं को फायदा मिलेगा. 

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2014-15 के बाद से कई गुना हुआ इजाफा 

मेक इन इंडिया के तहत वित्त वर्ष 2014-15 के बाद से इलेक्ट्रोनिक मैन्युफैक्चरिंग में सात गुना और इलेक्ट्रोनिक एक्सपोर्ट में 11 गुना का इजाफा देखा जा चुका है. बताते चलें कि मोबाइल फोन निर्माता भारत के इलेक्ट्रोनिक्स सेक्टर की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है. 

भारत में कई विदेशी कंपनियां भी अपने स्मार्टफोन बना रहीं

भारत में आज सैकड़ों मोबाइल मैन्युफैक्चरर और उनके कंपोनेंट्स को तैयार करने वाली कंपनियां और स्टार्टअप मौजूद हैं. भारत में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग करने वाले ईकोसिस्टम को समझने के लिए उनको तीन कैटेगरी में बांटना होगा. 

कॉन्ट्रैक्ट मेन्युफैक्चरर्स

भारत में कई कंपनियां और स्टार्टअप हैं, जो दुनिया के बड़े ब्रांड के लिए भारत में फोन बनाती या असेंबल करती हैं. इसमें फॉक्सकॉन, टाटा इलेक्ट्रोनिक्स और डिक्सॉन टेक्नोलॉजीज का नाम शामिल है. फॉक्सकॉन एक ताइवानी कंपनी है और भारत में ऐपल के डिवाइस तैयार करतरी है. डिक्सॉन टेक्नोलॉजीज भारत की एक प्रमुख कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनी है, जो Xiaomi, Motorola, Samsung आदि के हैंडसेट को तैयार करती है. 

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ग्लोबल स्मार्टफोन ब्रांड्स

भारत में कई विदेशी मोबाइल कंपनियां भी हैं, जो खुद के लिए मैन्युफैक्चरिंग करती हैं. इसमें सैमसंग का नाम शामिल है, जो उत्तर प्रदेश के नोएडा में प्रोडक्शन करती है. यहां तक की ओप्पो, वीवो की भी फैक्ट्री मौजूद हैं. 

भारतीय स्मार्टफोन ब्रांड्स

आज के समय में कुछ स्वदेशी कंपनियां भी मौजूद हैं, जो भारत में स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग कर रही हैं. इसमें लावा का नाम शामिल है. 

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