संसद में उठा मोबाइल रिचार्ज का बड़ा मुद्दा, 12 महीने में 13 बार क्यों करना पड़ता है रिचार्ज, इनकमिंग कॉल क्यों होती है बंद

आम आदमी पार्टी सांसद राघव चड्ढा ने संसद में मोबाइल रिचार्ज को लेकर एक बड़ा मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि कंपनियां एक साल में 12 की जगह 13 रिचार्ज कराती हैं. महीने में 30 दिन होते हैं, लेकिन इनकी वैलिडिटी 28 ही दिन क्यों? ये भी कहा कि प्लान खत्म होने के बाद इनकमिंग कॉल्स क्यों बंद होती हैं.

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संसद में राघव चड्ढा ने उठाए टेलीकॉम कंपनियों पर सवाल संसद में राघव चड्ढा ने उठाए टेलीकॉम कंपनियों पर सवाल

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:19 PM IST

मोबाइल रिचार्ज को लेकर देश में एक नया विवाद खड़ा हो गया है. राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद Raghav Chadha ने टेलीकॉम कंपनियों के प्रीपेड प्लान को लेकर बड़ा सवाल उठाया है.

उनका कहना है कि मौजूदा रिचार्ज सिस्टम आम लोगों के साथ छुपी हुई लूट जैसा है, क्योंकि यूजर्स को साल में 12 की जगह 13 बार रिचार्ज करना पड़ता है.

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28 दिन वाला प्लान क्यों बना विवाद?

भारत में ज्यादातर प्रीपेड मोबाइल प्लान 28 दिनों की वैलिडिटी के साथ आते हैं. इसका मतलब यह है कि एक साल में यूजर को 12 बार नहीं बल्कि 13 बार रिचार्ज करना पड़ता है.

अगर 28 दिन के हिसाब से कैलकुलेट करें तो 28 × 13 = 364 दिन होते हैं. यानी पूरे साल कवर करने के लिए एक एक्स्ट्रा रिचार्ज करना पड़ता है.

इसी बात को लेकर राघव चड्ढा ने संसद में सवाल उठाया. उनका कहना है कि अगर प्लान सच में मंथली है तो इसकी वैलिडिटी 30 या 31 दिन होनी चाहिए. 28 दिन का प्लान होने की वजह से यूजर्स को हर साल एक अतिरिक्त रिचार्ज करना पड़ता है, जिससे कंपनियों को ज्यादा कमाई होती है.

रिचार्ज खत्म होते ही क्यों बंद हो जाती हैं कॉल?

राघव चड्ढा ने एक और इंपॉर्टेंट मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि अगर किसी यूजर का रिचार्ज खत्म हो जाता है तो आउटगोइंग कॉल बंद होना समझ में आता है. लेकिन कई बार कंपनियां इनकमिंग कॉल भी बंद कर देती हैं. 

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उनके मुताबिक यह आम लोगों के लिए बड़ी समस्या बन जाती है. क्योंकि मोबाइल नंबर आज बैंकिंग, OTP, सरकारी सेवाओं और नौकरी से जुड़े कॉल के लिए जरूरी हो चुका है. ऐसे में रिचार्ज खत्म होते ही इनकमिंग कॉल बंद होना लोगों को मुश्किल में डाल देता है.

क्यों करते हैं टेलीकॉम ऑपरेटर ऐसा?

टेलीकॉम कंपनियां 28 दिन के प्लान को इसलिए इस्तेमाल करती हैं क्योंकि यह ठीक 4 हफ्तों के बराबर होता है. इससे उनके बिलिंग सिस्टम और प्लान मैनेजमेंट को आसान बनाया जा सकता है. हालांकि यूजर्स और एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे कंपनियों को साल में एक एक्स्ट्रा रिचार्ज का फायदा मिलता है.

भारत में टेलीकॉम सेक्टर को Telecom Regulatory Authority of India रेगुलेट करता है. नियमों के मुताबिक कंपनियों को कम से कम एक 30 दिन या उससे ज्यादा वैधता वाला प्लान देना होता है, लेकिन 28 दिन वाले प्लान पर कोई प्रतिबंध नहीं है.

आम लोगों पर क्या असर?

विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल आज के दौर में लक्जरी नहीं बल्कि जरूरत बन चुका है. देश में करोड़ों लोग मोबाइल फोन का इस्तेमाल बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, सरकारी योजनाओं और नौकरी के लिए करते हैं.

ऐसे में अगर रिचार्ज खत्म होते ही कॉल या मैसेज बंद हो जाएं तो इसका असर सीधे आम लोगों पर पड़ता है, खासकर उन लोगों पर जो सीमित आय में मोबाइल चलाते हैं.

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अब आगे क्या हो सकता है?

राघव चड्ढा ने सरकार और टेलीकॉम कंपनियों से अपील की है कि रिचार्ज प्लान को ज्यादा पारदर्शी और उपभोक्ता-हितैषी बनाया जाए. उनका सुझाव है कि रिचार्ज की वैधता कैलेंडर महीने के हिसाब से होनी चाहिए ताकि यूजर्स को साल में अतिरिक्त रिचार्ज न करना पड़े.

फिलहाल इस मुद्दे पर सोशल मीडिया और टेक सेक्टर में बहस तेज हो गई है. कई लोग इसे टेलीकॉम कंपनियों की रणनीति बता रहे हैं, जबकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह बिलिंग सिस्टम की वजह से अपनाया गया मॉडल है. 

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