English Cricket Model Bazball: इंग्लैंड का 'बैजबॉल गेम' है या बवाल, कहां से आया बल्लेबाजी का ये तूफानी अंदाज

इंग्लैंड टीम इन दिनों अपने घर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एशेज सीरीज खेल रही है. सीरीज का पहला टेस्ट बर्मिंघम में 16 जून से खेला जा रहा है. इस टेस्ट में इंग्लैंड टीम ने एक बार फिर अपना बैजबॉल गेम खेला और टॉस जीतकर पहले बैटिंग करते हुए पहले दिन ही 8 विकेट पर 393 रन बनाकर पारी घोषित कर दी. साथ ही ऑस्ट्रेलिया को भी 4 ओवर बल्लेबाजी करा दी.

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ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बर्मिंघम टेस्ट में जो रूट. (Getty) ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बर्मिंघम टेस्ट में जो रूट. (Getty)

श्रीबाबू गुप्ता

  • नई दिल्ली,
  • 17 जून 2023,
  • अपडेटेड 6:59 AM IST

English Cricket Model Bazball: टेस्ट क्रिकेट हमेशा ही धैर्य के साथ खेलने... क्रीज पर जमने और अच्छी गेंद का इंतजार कर रन बनाने का खेल रहा है. कई बार तो ऐसा भी देखा गया है कि 4-5 ओवर का खेल हो जाता है और इस दौरान रन सिर्फ 10-12 ही बन पाते हैं. जब विकेट गिरना शुरू होता है, तो टीम संभलने की कोशिश करती है, तब तो रन की गति और भी धीमी होना लाजमी हो जाता है.

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मगर अब टेस्ट क्रिकेट में 'बैजबॉल गेम' आ गया है, जिसने इसकी पूरी दशा और दिशा ही बदल दी. 'बैजबॉल गेम' को लाने का श्रेय इंग्लैंड टीम को जाता है, जिसने टेस्ट क्रिकेट में भी टी20 के अंदाज में धमाकेदार तरीके से रन बनाना शुरू किया है.

'बैजबॉल गेम' के आने के बाद टेस्ट क्रिकेट काफी बवाली हो गया है. 'बैजबॉल गेम' का मतलब ही होता है कि बगैर विकेट की चिंता किए बल्लेबाज तूफानी अंदाज में रन बनाए. पिछले एक साल में हमने इंग्लैंड के लगभग सभी मैचों में यह 'बैजबॉल गेम' देखा है. इसी गेम के बदौलत इंग्लैंड ने न्यूजीलैंड, साउथ अफ्रीका और पाकिस्तान को बुरी तरह रौंदा है.

इस तरह सामने आया  'बैजबॉल' नाम

आइए जानते हैं कि आखिर यह 'बैजबॉल गेम' की शुरुआत कैसे और कब हुई? वैसे फैन्स और कुछ दिग्गजों का मानना है कि जब से न्यूजीलैंड के पूर्व क्रिकेटर ब्रेंडन मैक्कुलम ने इंग्लिश टीम के हेड कोच का पद संभाला है, तभी से उन्होंने ही टीम का गेम बदला है. मैक्कुलम की कोचिंग में इंग्लैंड टीम ने टेस्ट फॉर्मेट में भी तेजी से खेलना शुरू किया और लगातार जीत भी हासिल कीं.

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मैक्कुलम भी अपने समय में जब क्रिकेट खेलते थे तो वो अपने आक्रामक अंदाज के लिए जाने जाते थे. तब उनका निकनेम 'बैज' था. इसी निकनेम के साथ 'बॉल' को जोड़ते हुए इंग्लैंड टीम ने 'BazBall' शब्द निकाला. यानी  'बैजबॉल' का मतलब मैक्कुलम का निकनेम और उनके खेलने के अंदाज से है.

एग्रेसिव क्रिकेट में हमेशा यह रिस्क रहता है

इंग्लिश टीम का 'बैजबॉल' मॉडल एग्रेसिव क्रिकेट खेलने पर ही आधारित है. इंग्लिश खिलाड़ियों को कोच मैक्कुलम की ओर से साफ निर्देश रहता है कि वे बिना किसी डर के अटैकिंग बैटिंग करें. हालांकि आक्रामक क्रिकेट खेलने के कारण खिलाड़ियों में आउट होने का खतरा हमेशा बना रहता है. मगर इसका एक बड़ा फायदा यह है कि आक्रामक शॉट खेलने के चलते रन भी अधिक तेजी से बनते हैं.

एशेज सीरीज के पहले टेस्ट में दिखा 'बैजबॉल गेम'

बता दें कि इंग्लैंड टीम इन दिनों अपने घर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एशेज सीरीज खेल रही है. सीरीज का पहला टेस्ट बर्मिंघम में 16 जून से खेला जा रहा है. इस टेस्ट में इंग्लैंड टीम ने एक बार फिर अपना बैजबॉल गेम खेला और टॉस जीतकर पहले बैटिंग करते हुए पहले दिन ही 8 विकेट पर 393 रन बनाकर पारी घोषित कर दी. साथ ही ऑस्ट्रेलिया को भी 4 ओवर बल्लेबाजी करा दी.

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इस पारी में इंग्लैंड के पूर्व कप्तान जो रूट ने 152 गेंदों पर 118 रनों की नाबाद शतकीय पारी खेली. यह रूट का 30वां टेस्ट शतक रहा, जिसके बदौलत उन्होंने क्रिकेट लीजेंड सर डॉन ब्रेडमैन का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. रूट ने ऑस्ट्रेलियाई टीम के स्पिनर नाथन लियोन के एक ओवर में 2 छक्के जमाते हुए 20 रन बनाए थे.

रूट ने अपनी पारी में 4 छक्के और 7 चौके जमाए. उनका स्ट्राइक रेट 77.63 का रहा. रूट के अलावा विकेटकीपर बल्लेबाज जॉनी बेयरस्टो ने 78 गेंदों पर 78 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेली. जबकि ओपनर जैक क्राउली ने 73 गेंदों पर 61 रन बनाए. इस तरह पूरी इंग्लिश टीम ही आक्रामक गेम खेलती रही और ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज सिर्फ मूकदर्शक बने रहे.

पिछले साल ही मैक्कुलम ने संभाला कोच पद

12 मई को इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने ब्रेंडन मैक्कुलम को हेड कोच नियुक्त करने का ऐलान किया था. मैक्कुलम ने जब से इंग्लैंड टीम के कोच पद की कमान संभाली है, तब से टीम ने टेस्ट सीरीज में हार का स्वाद नहीं चखा है. इसके बाद से इंग्लैंड ने 5 टेस्ट सीरीज खेली, जिसमें से 4 में जीत दर्ज की और एक ड्रॉ रही.

मैक्कुलम की कोचिंग में इंग्लैंड टीम का रिकॉर्ड

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कुल टेस्ट सीरीज: 5
जीती: 4
हारी: 0
ड्रॉ: 1

पिछली एशेज में शर्मनाक हार के बाद हुए थे बदलाव

मैक्कुलम के कोच पद संभालने से ठीक पहले की 5 टेस्ट सीरीजों में मामला काफी उलटा था. तब इंग्लैंड ने पिछली 5 टेस्ट सीरीज में से एक भी नहीं जीती थी. उसी दौरान ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर एशेज सीरीज में भी 0-4 से शर्मनाक हार झेलनी पड़ी थी. इसके बाद ही इंग्लैंड बोर्ड ने बड़े बदलाव करने का फैसला किया था.

एशेज 2021-22 में खराब प्रदर्शन की वजह से इंग्लैंड टीम के पूर्व कोच क्रिस सिल्वरवुड को बर्खास्त कर दिया गया था. साथ ही जो रूट ने भी कप्तानी से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद ऑलराउंडर बेन स्टोक्स को टेस्ट टीम का कप्तान नियुक्त किया गया, जबकि मैक्कुलम को हेड कोच बनाया गया.

इंग्लैंड का आक्रामक खेल मैक्कुलम के पहले से जारी है

असल मायने में देखा जाए तो इंग्लिश क्रिकेट में यह आक्रामक खेल की क्रांति 2015 के वनडे कप के बाद से ही शुरू हो गई थी. 2015 के उस वर्ल्ड कप में इंग्लैंड को बांग्लादेश के हाथों करारी शिकस्त मिली थी और उसके चलते ही इंग्लैंड को ग्रुप-स्टेज से बाहर होना पड़ा था. तभी ओएन मॉर्गन और ट्रेविस बेलिस ने इंग्लैंड की पूरी टीम और उसके गेम को ही बदल दिया था. ऐसे में इस बदलाव के सबसे बड़े जनक मॉर्गन और बेलिस को ही मानना चाहिए, जिनके नेतृत्व में इंग्लैंड ने आक्रामक क्रिकेट खेलने पर जोर दिया.

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बाद में बटलर, स्टोक्स जैसे प्लेयर्स ने इसे आगे बढ़ाया. इस बदलाव का नतीजा भी सबके सामने आ चुका है. इंग्लैंड आज की तारीख में वनडे और टी20 वर्ल्ड कप की चैम्पियन है. यही वजह रही कि इंग्लैंड ने टेस्ट क्रिकेट को भी आक्रामक तरीके से खेलना शुरू किया है. जब से बेन स्टोक्स टीम के कप्तान और ब्रेंडन मैक्कुलम हेड कोच बने हैं, तभी से टेस्ट में भी यह आक्रामकता देखने को मिली है.

 

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