वैभव सूर्यवंशी के बारे में सबसे आसान बात यह है कि उनके छक्कों की चर्चा की जाए. 15 साल का एक लड़का, जो दुनिया के बेहतरीन गेंदबाजों को मैदान के हर कोने में भेज रहा है, स्वाभाविक रूप से सुर्खियां बटोरेगा. लेकिन अगर कोई यह मानता है कि वैभव की सफलता सिर्फ ताकत, निडरता या हाथों की गति का नतीजा है, तो वह उनकी बल्लेबाजी की असली कहानी नहीं समझ रहा.
वैभव सिर्फ गेंदबाजों को पीटते नहीं हैं, उन्हें पढ़ते भी हैं. यही वह गुण है जो उन्हें बाकी युवा बल्लेबाजों से अलग बनाता है.
क्रिकेट में बड़े बल्लेबाजों की पहचान सिर्फ उनके शॉट्स से नहीं होती, बल्कि इस बात से होती है कि वे गेंदबाज की सोच को कितनी जल्दी समझ लेते हैं. सामने वाला क्या करने की कोशिश कर रहा है, उसका अगला दांव क्या हो सकता है और दबाव की स्थिति में वह किस विकल्प की ओर जाएगा- महान बल्लेबाज अक्सर इन सवालों के जवाब गेंद फेंके जाने से पहले ढूंढ़ लेते हैं.
आईपीएल में इस सीजन उनकी बल्लेबाजी ने क्रिकेट जगत को चौंका दिया. उन्होंने 776 रन बनाए और 237.30 के अविश्वसनीय स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की. गेंदबाजों ने उनके खिलाफ हर तरह की रणनीति अपनाई. कभी शॉर्ट गेंदों का जाल बिछाया गया, कभी ऑफ स्टंप से बाहर चौड़ी गेंदें फेंकी गईं, तो कभी स्पिनरों ने गति और लाइन बदलकर उन्हें रोकने की कोशिश की. लेकिन ज्यादातर मौकों पर नतीजा वही रहा- गेंद सीमा रेखा के बाहर.
... लेकिन यह कहानी सिर्फ ताकत की नहीं है
वैभव के करीबी बताते हैं कि मैच से पहले वह विपक्षी गेंदबाजों का बारीकी से अध्ययन करते हैं. नेट्स में सिर्फ शॉट खेलने का अभ्यास नहीं होता, बल्कि यह समझने की कोशिश होती है कि सामने वाला गेंदबाज दबाव में क्या करेगा.
कई बार मैच शुरू होने से पहले वह स्टंप के पीछे बैठकर आंखें बंद करते हैं और गेंदबाजों की संभावित योजनाओं की कल्पना करते हैं. किस गेंद पर हमला करना है, किस गेंद को सम्मान देना है और किस ओवर को निशाना बनाना है, इसका खाका उनके दिमाग में पहले से तैयार रहता है.
आईपीएल के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ने वैभव का एक वीडियो साझा किया था. वीडियो में वह स्टंप के पीछे बैठकर आंखें बंद किए नजर आ रहे थे. साथ में लिखा था- 'Focus, manifest, get ready to deliver.'
यही वह दृश्य था जिसने उनकी तैयारी के एक अलग पहलू की झलक दी.
यही वजह है कि उनकी बल्लेबाजी देखने में जितनी आक्रामक लगती है, उतनी ही योजनाबद्ध भी होती है.
दर्शकों को लगता है कि वैभव हर गेंद पर छक्का मारना चाहते हैं. लेकिन असलियत इससे अलग है. उनके शॉट्स के पीछे जोखिम जरूर होता है, लेकिन वह अंधाधुंध नहीं होता. वे गेंदबाज की लाइन, लेंथ और फील्ड सेटिंग को पढ़कर हमला करते हैं. यही कारण है कि उनके बड़े शॉट्स अक्सर ताकत के साथ-साथ टाइमिंग और क्रिकेटिंग समझ का भी प्रदर्शन होते हैं.
क्रिकेट इतिहास में कई ऐसे बल्लेबाज हुए हैं जो गेंद को बहुत दूर तक मार सकते थे. लेकिन लंबे समय तक वही खिलाड़ी टिके हैं जिनके पास खेल को पढ़ने की क्षमता भी थी. यही वजह है कि वैभव को सिर्फ एक और पावर-हिटर कहना उनके साथ अन्याय होगा.
उनकी उम्र भले 15 साल हो, लेकिन क्रिकेटिंग समझ उम्र से कहीं ज्यादा परिपक्व दिखाई देती है.
यही परिपक्वता मैदान के बाहर भी नजर आती है. हाल ही में एक मैच के बाद जब उनसे बड़े रिकॉर्ड के करीब पहुंचकर चूकने के बारे में पूछा गया, तो उनका जवाब था कि उनका लक्ष्य टीम के लिए ज्यादा से ज्यादा रन बनाना था. इतनी कम उम्र में व्यक्तिगत उपलब्धियों से ज्यादा टीम को प्राथमिकता देना बताता है कि यह लड़का सिर्फ प्रतिभाशाली ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी काफी मजबूत है.
चर्चा सिर्फ आईपीएल तक सीमित नहीं रह गई
वैभव सूर्यवंशी अब भारतीय क्रिकेट के अगले बड़े पड़ाव की ओर बढ़ चुके हैं.अब वह 1980 के दशक के आखिर में सचिन तेंदुलकर के बाद भारतीय पुरुष टीम में चुने जाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बनने की दहलीज पर हैं. हालांकि आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे से पहले वैभव को इंडिया ए के लिए श्रीलंका में होने वाली त्रिकोणीय सीरीज में खेलना है, जहां 9 से 21 जून के बीच अफगानिस्तान की टीम भी हिस्सा लेगी. यह दौरा उनके लिए सीनियर भारतीय टीम के दरवाजे तक पहुंचने से पहले एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है.
कुछ महीने पहले तक सवाल था कि वैभव को इतनी जल्दी आगे बढ़ाना सही होगा या नहीं. अब सवाल बदल चुका है. अब चर्चा इस बात की नहीं है कि उन्हें मौका मिलेगा या नहीं, बल्कि इस बात की है कि मौका कब मिलेगा.
... और इसकी वजह सिर्फ उनके छक्के नहीं हैं. असली वजह वह 'ध्यान आसन' है, जिसमें बैठकर एक 15 साल का बल्लेबाज मैच शुरू होने से पहले ही गेंदबाजों के दिमाग में झांकने की कोशिश करता है. शायद यही कारण है कि वैभव सूर्यवंशी सिर्फ रन नहीं बना रहे, बल्कि भारतीय क्रिकेट के अगले बड़े अध्याय की पटकथा भी लिख रहे हैं.
विश्व मोहन मिश्र