भारत और जिम्बाब्वे के बीच आज (23 जुलाई) से शुरू होने जा रही टी20 सीरीज में मेजबान टीम की सबसे बड़ी ताकत उसकी तेज गेंदबाजी मानी जा रही है. रिचर्ड नगरावा (Richard Ngarava) और लंबे कद के तेज गेंदबाज ब्लेसिंग मुजरबानी (Blessing Muzarabani) अपने करियर की बेहतरीन लय में हैं.
यही वजह है कि भारतीय बल्लेबाजों के सामने हार्ड लेंथ गेंदबाजी की वही चुनौती फिर खड़ी हो सकती है, जिसने हाल में आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर टीम इंडिया को काफी परेशान किया था.
नगरावा और मुजरबानी इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह रहे हैं. मुजरबानी इस साल IPL में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की ओर से लुंगी एनगिडी के रिप्लेसमेंट के तौर पर जुड़े थे. वह IPL खेलने वाले जिम्बाब्वे के सिर्फ चौथे क्रिकेटर बने.
दोनों तेज गेंदबाजों की जोड़ी जिम्बाब्वे की गेंदबाजी की रीढ़ बन चुकी है. जब दोनों ने मिलकर नई गेंद संभाली है तब टेस्ट क्रिकेट में 78 विकेट, वनडे में 62 और टी20 इंटरनेशनल में 98 विकेट हासिल किए हैं. तीनों फॉर्मेट में यह जिम्बाब्वे की सबसे सफल तेज गेंदबाजी जोड़ी है.
जिम्बाब्वे की पिछली तीन टेस्ट जीतों में भी इन दोनों का बड़ा योगदान रहा. बांग्लादेश के खिलाफ दो और अफगानिस्तान के खिलाफ एक टेस्ट जीत में टीम ने कुल 59 विकेट लिए, जिनमें से 32 विकेट अकेले नगरावा और मुजरबानी ने झटके.
2025 की शुरुआत से जिम्बाब्वे का सीम अटैक घरेलू मैदान पर शानदार प्रदर्शन कर रहा है. 12 टेस्ट खेलने वाले देशों में घरेलू टी20 इंटरनेशनल मैचों में जिम्बाब्वे के तेज गेंदबाजों का एवरेज चौथा सबसे बेहतर है. टेस्ट में उनका स्थान पांचवां और वनडे में भी पांचवां है. यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि जिम्बाब्वे की टीम टेस्ट रैंकिंग में 10वें, वनडे में 11वें और टी20 में 12वें स्थान पर है.
हालांकि 2026 में टेस्ट और वनडे क्रिकेट में जिम्बाब्वे ने ज्यादा मुकाबले नहीं खेले हैं, लेकिन टी20 क्रिकेट में उनकी तेज गेंदबाजी ने जबरदस्त छलांग लगाई है.
2026 में फुल मेंबर टीमों के खिलाफ सिर्फ आठ टी20 मैचों में जिम्बाब्वे के तेज गेंदबाज तीन बार चार विकेट लेने का कारनामा कर चुके हैं. इनमें दो बार मुजरबानी और एक बार नगरावा ने चार विकेट झटके. इससे पहले 2018 से 2025 के बीच 87 मैचों में भी इतनी ही चार विकेट वाली पारियां देखने को मिली थीं. एवरेज और स्ट्राइक रेट में भी बड़ा सुधार आया है.
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2026 टी20 वर्ल्ड कप में जिम्बाब्वे का सुपर-8 तक पहुंचना उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा. टीम ने शुरुआती राउंड में ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका जैसी मजबूत टीमों को हराकर ग्रुप में टॉप पोजीशन हासिल की थी. नगरावा चोट के कारण सिर्फ तीन मैच खेल सके, लेकिन मुजरबानी सुपर-8 तक संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे. उन्होंने 14.46 के एवरेज से 13 विकेट लिए, जिसमें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 4/17 का मैच जिताऊ प्रदर्शन भी शामिल था.
क्रिकबज की रिपोर्ट के मुताबिक- वर्ल्ड कप में इस जोड़ी ने कुल 19 विकेट लिए, जिनमें से 15 विकेट हार्ड लेंथ या बाउंसर गेंदों पर आए. मुजरबानी का रिलीज पॉइंट पूरे टूर्नामेंट में सिर्फ जेसन होल्डर और काइल जैमीसन से कम था, जबकि नगरावा इस लिस्ट में 11वें स्थान पर रहे. ब्रैड इवांस के साथ मिलकर जिम्बाब्वे का सीम अटैक पूरे टूर्नामेंट में सबसे ऊंचे एवरेज रिलीज पॉइंट वाला गेंदबाजी आक्रमण बना.
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यही वजह है कि भारत के लिए यह सीरीज आसान नहीं रहने वाली. इंग्लैंड दौरे पर भारतीय बल्लेबाज हार्ड लेंथ गेंदों के सामने लगातार संघर्ष करते दिखे थे. वहां छोटे स्कोर वाले मैदानों और लंबी बाउंड्री का फायदा गेंदबाजों को मिला. अब हरारे में भी लगभग वैसी ही परिस्थितियां देखने को मिल सकती हैं.
हरारे की पिच आईपीएल जैसी नहीं, आंकड़े दे रहे गवाही
भारत के पिछले जिम्बाब्वे दौरे (जुलाई 2024) में हरारे में पांच टी20 मैचों का एवरेज पहली पारी का स्कोर 170 रहा था. पहले मुकाबले में जिम्बाब्वे ने सिर्फ 115/9 बनाकर भी मैच जीत लिया था. दिसंबर में यहां घरेलू टी20 टूर्नामेंट के 10 मैचों में पहली पारी का एवरेज स्कोर सिर्फ 135 रहा, जबकि जनवरी 2025 के बाद खेले गए टी20 इंटरनेशनल मैचों में यह एवरेज 161 का है.
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इसके मुकाबले IPL 2026 में पहली पारी का एवरेज स्कोर 193 रहा और पूरे सीजन में 65 बार 200 से ज्यादा का स्कोर बना. ऐसे में भारतीय बल्लेबाजों को हरारे में बिल्कुल अलग तरह की बल्लेबाजी करनी होगी.
गुड लेंग्थ पर रन बनाना मुश्किल
आंकड़े भी बताते हैं कि जनवरी 2025 से जिम्बाब्वे में खेले गए टी20 इंटरनेशनल मुकाबलों में गुड लेंथ गेंदों पर रन बनाना बेहद मुश्किल रहा है. इन गेंदों पर इकोनॉमी सिर्फ 6.48 रही है. वहीं बैक ऑफ लेंथ और शॉर्ट गेंदों पर हर 15 गेंद में एक विकेट गिरा है. इन गेंदों पर बल्लेबाजों ने कम बाउंड्री लगाई हैं और रन गति भी काफी कम रही है.
ऐसे में नगरावा और मुजरबानी की फॉर्म, हरारे की परिस्थितियां और भारत की हालिया कमजोरी को देखते हुए जिम्बाब्वे के पास तीन बार की टी20 वर्ल्ड चैम्पियन भारतीय टीम को कड़ी टक्कर देने का शानदार मौका होगा. अगर मेजबान टीम इस सीरीज में अच्छा प्रदर्शन करती है तो उसे इसी साल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली तीन वनडे मैचों की सीरीज और अगले साल भारत के दौरे से पहले बड़ा आत्मबल मिलेगा.
जिम्बाब्वे 2027 वनडे वर्ल्ड कप का सह-मेजबान है और 2019 तथा 2023 वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाया था. 21वीं सदी में उसने अब तक वनडे वर्ल्ड कप में किसी भी फुल मेंबर टीम को नहीं हराया है. ऐसे में आने वाले वर्षों में उसकी सफलता काफी हद तक नगरावा और मुजरबानी जैसे तेज गेंदबाजों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क