पाकिस्तानी स्पिनर अबरार अहमद (Abrar Ahmed) का 'द हंड्रेड 2026' साइनिंग विवाद भारत में छाया हुआ है. सवाल यह उठ रहा है कि क्या उनका भी मुस्तफिजुर रहमान जैसा IPL वाला हाल होगा? भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) का जिस तरह प्रभुत्व है, क्या ऐसे में 'द हंड्रेड' से अबरार अहमद की भी छुट्टी हो सकती है?
पहले इस पूरे बखेड़े की कहानी समझ लीजिए...पाकिस्तानी स्पिनर अबरार अहमद को काव्या मारन के स्वामित्व वाली फ्रेंचाइजी सराइइजर्स लीड्स (Sunrisers Leeds) ने लंदन में खरीदा, जिसके बाद सोशल मीडिया पर भारतीय फैन्स का गुस्सा फूट पड़ा. पाकिस्तानी क्रिकेटर को खरीदना ही बवाल की असली वजह है. लोग काव्या मारन को ट्रोल कर रहे हैं.
दरअसल, सनराइजर्स लीड्स फ्रेंचाइजी की कमान उद्योगपति कलानिधि मारन (Kalanithi Maran) के सन ग्रुप के पास है और टीम की सीईओ उनकी बेटी काव्या मारन (Kavya Maran) हैं. IPL में सनराइजर्स हैदराबाद की CEO भी काव्या ही हैं. इसी वजह से सवाल उठे रहे हैं.
क्योंकि जिस अबरार अहमद को भले ही काव्या मारन ने इंग्लैंड की लीग 'द हंड्रेड' के लिए £1,90,000 (लगभग ₹2.34 करोड़) में खरीदा हो, उसका धन तो भारत की धरती से ही जाएगा. और यही अबरार कई मौकों पर भारतीय टीम को लेकर कई इशारे कर चुका है, और भारतीय क्रिकेटर्स को लेकर भी जहर उगल चुका है.
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जब अबरार पर करोड़ों की बोली लगी तो सनराइजर्स हैदराबाद की को-ओनर और CEO काव्या मारन खुद नीलामी में मौजूद थीं. हालांकि जब अबरार को लेकर बवाल बढ़ा तो कोच डेनियल विटोरी ने इस मामले में सफाई दी और कहा हमने नीलामी में हर ऑप्शन खुला रखा था.
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विटोरी ने कहा कि आदिल राशिद नहीं मिले तो अबरार उनकी प्राथमिकता बन गए. लेकिन जैसे ही सनराइजर्स लीड्स ने X पर घोषणा की, भारतीय फैन्स ने भारी विरोध शुरू कर दिया. अकाउंट पर इतने नेगेटिव कमेंट्स आए कि अकाउंट को सस्पेंड भी कर दिया गया.
कुछ फैन्स ने सवाल उठाए जब IPL में पाक खिलाड़ी बैन हैं, तो हंड्रेड में क्यों इसे भारतीय मालिक ने क्यों खरीदा, कोई और खरीदे तो खरीदे? और यह सवाल कहीं ना कहीं वाजिब भी है... IPL में 18 साल से पाकिस्तानी क्रिकेटर बाहर हैं.
जब आईपीएल से कटा था मुस्तफिजुर रहमान का पत्ता...
जनवरी 2026 में BCCI ने मुस्तफिजुर रहमान को इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) से हटाने का ऐलान किया था. दरअसल, उस समय बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिदुओं को निशाना बनाया जा रहा था, वहां अंतरिम सरकार की शह पर भारत के खिलाफ भड़काऊ नारेबाजी की जा रही थी और बयान दिए जा रहे थे. तब भारत में इसे लेकर सवाल उठे थे कि ऐसे देश के खिलाड़ी को क्यों आईपीएल टीम में लिया जा रहा है.
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इसके बाद कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) ने मुस्तफिजुर को रिलीज किया था. KKR ने मुस्तफिजुर को ₹9.20 करोड़ में खरीदा था, लेकिन BCCI के निर्देश पर रिलीज कर दिया और रिप्लेसमेंट (ब्लेसिंग मुजारबानी शामिल हुए) की भी अनुमति दी.
अब वही सवाल अबरार पर उठ रहा है, क्यों ना उनको भारतीय स्वामित्व वाली टीम से हटाया जाए, भले ही टूर्नामेंट इंग्लैंड की धरती पर होगा.
अबरार अहमद मामले में BCCI क्या कर सकता है?
IPL में BCCI फ्रेंचाइजी को डायरेक्ट आदेश दे सकता है और रिप्लेसमेंट की अनुमति भी. लेकिन हंड्रेड में ECB (इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड) का पूरा कंट्रोल है. सनराइजर्स लीड्स ने अबरार को पहले ही साइन कर लिया है, वहीं विवाद बढ़ने के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने भी इस मामले पर बयान दिया.
BCCI के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने साफ कहा कि यह मामला BCCI के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है, यह विदेशी लीग का मामला है और उसी लीग को इस पर फैसला लेना होगा. इसमें BCCI कुछ नहीं कर सकता है.
अब सवाल है कि अगर एक बारगी को अबरार को हटा दिया जाता है तो क्या होगा?
'द हंड्रेड' से किसी प्लेयर को ईसीबी के आदेश पर ही निकाला जा सकता है, कोई टीम अपनी मनमर्जी से खिलाड़ी को रिलीज नहीं कर सकती है. कुल मिलाकर उस खिलाड़ी को कोई हटा नहीं सकता, खिलाड़ी खुद हट जाए वो अलग बात है.
ऐसे में रिप्लेसमेंट रोस्टर से खिलाड़ी से दूसरे प्लेयर का चयन होगा....
'द हंड्रेड' प्लेयर सेलेक्शन रेगुलेशन (The Hundred Player Selection Regulations) के मुताबिक कोई भी खिलाड़ी रिप्लेसमेंट रोस्टर में अपने-आप शामिल हो जाएगा, अगर- उसने ऑक्शन या वाइल्डकार्ड ड्राफ्ट के लिए रजिस्ट्रेशन कराया हो, लेकिन किसी भी टीम ने उसे ऑक्शन या ड्राफ्ट में नहीं खरीदा हो और उसने अपने रजिस्ट्रेशन फॉर्म में यह मंजूरी दी हो कि जरूरत पड़ने पर उसे रिप्लेसमेंट खिलाड़ी बनाया जा सकता है.
अगर टूर्नामेंट के दौरान कोई खास या असाधारण स्थिति बनती है, तो टीम ECB की तय प्रक्रिया के अनुसार लिखित अनुरोध कर सकती है. यह अनुरोध कंपटीशन टेक्निकल कमेटी ( Competition Technical Committee) को भेजा जाता है. टीम को यह भी बताना होगा कि स्थिति असाधारण क्यों है और रिप्लेसमेंट खिलाड़ी क्यों जरूरी है. अगर यह मंजूरी दे देती है, तो: टीम को रिप्लेसमेंट खिलाड़ी साइन करने की अनुमति मिल सकती है.
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डायरेक्ट साइनिंग विंडो बंद होने के बाद, हंड्रेड ऑक्शन मार्च 2026 में हुआ. टीमें पुरुष और महिला दोनों टीमों के लिए कम से कम 14 खिलाड़ी खरीद सकती हैं, और ज्यादा से ज़्यादा 16 खिलाड़ी खरीदे जा सकते हैं.
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Krishan Kumar