23 मार्च 2003- जोहानिसबर्ग का वांडरर्स मैदान और करोड़ों भारतीय फैन्स की उम्मीदें. लेकिन अंत में जो हुआ, उसने क्रिकेट इतिहास के सबसे यादगार और दर्दनाक फाइनल्स में इस मुकाबले को शामिल कर दिया. रिकी पोंटिंग की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 125 रनों से हराकर क्रिकेट वर्ल्ड कप अपने नाम किया और अपने दबदबे को फिर साबित किया.
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खिताबी मुकाबले में भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी, लेकिन यही फैसला भारत पर भारी पड़ गया. ऑस्ट्रेलिया ने फाइनल जैसे बड़े मुकाबले में 2 विकेट पर 359 रन ठोक दिए और इसके पीछे सबसे बड़ा नाम था कंगारू कप्तान रिकी पोंटिंग का.
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रिकी पोटिंग ने नाबाद 140 रनों की विस्फोटक पारी खेली, जिसमें चार चौके और आठ गगनचुंबी छक्के शामिल थे. उनके साथ डेमियन मार्टिन ने भी मोर्चा संभाला और दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 234 रनों की अटूट साझेदारी हुई. मार्टिन ने 7 चौके और एक छक्के की मदद से 84 बॉल पर नाबाद 88 रनों का योगदान दिया.
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इतना बड़ा लक्ष्य सामने था, लेकिन भारत की शुरुआत ही खराब रही. उस टूर्नामेंट के सबसे बड़े सितारे सचिन तेंदुलकर पहले ही ओवर में 4 रन बनाकर ग्लेन मैक्ग्रा की गेंद पर कॉट एंड बोल्ड हो गए. स्टेडियम में सन्नाटा छा गया और करोड़ों उम्मीदें उसी पल डगमगा गईं.
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वीरेंद्र सहवाग ने 10 चौके और तीन छक्के की मदद से 82 रनों की दमदार और जुझारू पारी खेली. उन्होंने अकेले ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों का मुकाबला किया और मैच में थोड़ी उम्मीद जगाई, लेकिन दूसरे छोर से लगातार विकेट गिरते रहे. सहवाग को डैरेन लेहमैन ने डायरेक्ट थ्रो पर रन आउट किया, फिर तो भारत की हार तय ही हो गई. आखिरकार भारतीय टीम 234 रनों पर सिमट गई.
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लेकिन इस फाइनल को सिर्फ भारत की हार या रिकी पोंटिंग की यादगार पारी के लिए ही नहीं याद किया जाता. इस मैच के बाद एक और कहानी ने खूब सुर्खियां बटोरी. पोंटिंग के लगातार लंबे-लंबे छक्कों को देखकर अफवाह उड़ी कि उनके बैट में स्प्रिंग लगा हुआ है, जो गेंद को ज्यादा दूर भेजने में मदद करता है.
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सोशल मीडिया के बिना भी तब यह चर्चा इतनी तेजी से फैली कि हर गली, हर स्कूल और हर क्रिकेट खेलने वाले बच्चे के बीच यही बात हो रही थी. हालांकि काफी साल बाद इस अफवाह को लेकर जब एक इंटरव्यू में रिकी पोंटिग से सवाल पूछा गया था, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब दिया था. पोंटिग ने कहा था कि भारत में इसके बारे बात की जाती है लेकिन ऑस्ट्रेलिया में नहीं, स्प्रिंग बैट नाम की कोई चीज नहीं है.
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2003 का वर्ल्ड कप फाइनल सिर्फ एक मैच नहीं था, बल्कि ये जज्बातों का तूफान था. पोंटिंग की निर्दयी बल्लेबाजी, सहवाग की दिलेरी और स्प्रिंग बैट वाली ऐसी अफवाह, जिसने सालों तक चर्चा बटोरी. यही वजह है कि ये मुकाबला आज भी क्रिकेट इतिहास के सबसे यादगार फाइनल्स में गिना जाता है- खासकर भारतीय फैन्स के लिए, एक अधूरा सपना बनकर...
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