होर्मुज स्ट्रेट में युद्ध के दौरान जहाज पर शिवानंद चौरसिया की मौत हो गई थी. उनका शव 8 दिन बाद देवरिया पहुंचा. शव को देखते ही पत्नी और बच्चे फूट फूटकर रोने लगे. घर के बाहर जैसे ही एंबुलेंस रुकी, परिजनों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे. हर कोई अपने बेटे, भाई और पति को आखिरी बार देखने के लिए बेताब था. परिजनों का रो रोकर बुरा हाल हो गया और गांव का माहौल भी गमगीन हो गया.