भारत के लिए कूटनीतिक स्तर पर यह समय बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. देश की विदेश नीति और कूटनीति के लिहाज से एक साथ दो बड़े घटनाक्रम सामने आ रहे हैं. एक तरफ जहां राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल चीन के दौरे पर हैं, वहीं दूसरी तरफ विदेश मंत्री एस जयशंकर रूस की यात्रा पर हैं. अजीत डोभाल चीन में सीमा विवाद को सुलझाने के उद्देश्य से आयोजित विशेष प्रतिनिधियों की 25वें दौर की बैठक में हिस्सा लेंगे. भारत और चीन के बीच सीमा पर लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में इस वार्ता को बेहद अहम माना जा रहा है. दोनों देशों के प्रतिनिधि सीमा मुद्दों पर शांतिपूर्ण समाधान निकालने का प्रयास करेंगे. दूसरी तरफ, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की है. यह बैठक दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और वैश्विक कूटनीति में भारत की स्थिति को स्पष्ट करने के लिए काफी महत्वपूर्ण है. इस मुलाकात में व्यापार, रक्षा और रणनीतिक सहयोग जैसे प्रमुख मुद्दों पर गहन चर्चा की गई है. भारत की यह दोहरी कूटनीतिक सक्रियता दर्शाती है कि नई दिल्ली वैश्विक स्तर पर अपने हितों की रक्षा करने और पड़ोसी देशों के साथ विवादों को सुलझाने के लिए कितनी गंभीर है. रूस और चीन जैसे महाशक्तियों के साथ एक ही समय पर इतनी बड़ी बातचीत भारत की बढ़ती वैश्विक साख का प्रमाण है.