ईरान में 3 मार्च 2026 को फार्स प्रांत के खोन्ज इलाके में 4.3 तीव्रता का भूकंप आया जिसका केंद्र 10 किलोमीटर की गहराई पर था. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार यह भूकंप गेराश शहर से 52 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में आया. इसका प्रभाव ग्रामीण इलाकों में महसूस हुआ. कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ.
कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि यह भूकंप ईरान के गुप्त परमाणु परीक्षण की वजह से हुआ लेकिन विशेषज्ञों ने इसे खारिज कर दिया. संडे गार्जियन लाइव की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस भूकंप और किसी परमाणु या सैन्य गतिविधि के बीच कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं है.
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पहले भी ऐसे दावे हुए हैं जैसे 2024 में ईरान में 4.5 तीव्रता के भूकंप को परमाणु परीक्षण बताया गया लेकिन CTBTO (कॉम्प्रिहेंसिव न्यूक्लियर-टेस्ट-बैन ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन) ने डेटा से साबित किया कि यह प्राकृतिक था. ईरान भूकंप वाले इलाकों में आता है इसलिए ऐसे भूकंप सामान्य हैं.
परमाणु परीक्षण कितनी गहराई पर कितनी तीव्रता का भूकंप पैदा करता है?
परमाणु परीक्षण से भूकंप आ सकता है लेकिन उसकी तरंगें और विशेषताएं प्राकृतिक भूकंप से अलग होती हैं. परमाणु विस्फोट से भूकंप की तीव्रता उसकी शक्ति पर निर्भर करती है जैसे 5 मेगाटन का परीक्षण 6.9 तीव्रता का भूकंप पैदा कर सकता है लेकिन यह परीक्षण की गहराई पर भी निर्भर है.
परीक्षण को छिपाने के लिए इसे पर्याप्त गहराई पर किया जाता है जैसे स्केल्ड डेप्थ ऑफ बरियल (SDBO) 100 मीटर प्रति किलोटन से ज्यादा होना चाहिए ताकि रेडियोएक्टिव पदार्थ बाहर न आएं. सामान्य परमाणु परीक्षण की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5 से 6 या ज्यादा होती है क्योंकि छोटे परीक्षणों से कम तीव्रता आती है.
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ईरान का हालिया भूकंप सिर्फ 4.3 था जो छोटे परीक्षण के लिए भी कम है. CTBTO के अनुसार परमाणु परीक्षण की तरंगें विस्फोटक होती हैं जबकि प्राकृतिक भूकंप की टेक्टॉनिक.
बर्कले सीस्मोलॉजी लैब के अनुसार उत्तर कोरिया के 2016 परीक्षण ने 5.1 तीव्रता का भूकंप पैदा किया जो 7000 टन टीएनटी के बराबर था. अगर परीक्षण कम गहराई पर हो तो तीव्रता ज्यादा लेकिन रेडिएशन लीक का खतरा बढ़ जाता है.
परमाणु परीक्षण से रिक्टर स्केल पर 4.5 से 7+ तीव्रता का भूकंप आता है (शक्ति और गहराई पर निर्भर)
ईरान ने 10 परमाणु बम 24 घंटे में बनाने का दावा किया? क्या सच है?
ईरान ने कुछ दिन पहले ऐसा कोई सीधा दावा नहीं किया लेकिन अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने फॉक्स न्यूज को बताया कि ईरान ने कहा कि उनके पास 60% एनरिच्ड यूरेनियम के 460 किलोग्राम हैं जो 11 परमाणु बम बनाने के लिए काफी है.
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ईरान के सर्वोच्च नेता के करीबी मोहम्मद-जवाद लारीजानी ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो ईरान 24 घंटे में सैन्य परमाणु क्षमता विकसित कर सकता है. बीबीसी की रिपोर्ट में कहा गया कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के करीब पहुंच गया है लेकिन अभी नहीं बना रहा.
विशेषज्ञों के अनुसार अगर ईरान फैसला करे तो हफ्तों में पहला बम बना सकता है क्योंकि उसके पास पर्याप्त संवर्धित यूरेनियम है. न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार ईरान 6 महीने में 10 परमाणु वारहेड बना सकता है. ईरान ने लंबे समय से कहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है लेकिन अमेरिका-इजरायल का दावा है कि यह हथियार बनाने की कोशिश है.
क्या चीन, रूस या उत्तर कोरिया ने ईरान को परमाणु तकनीक या हथियार दिए?
कार्नेगी एंडाउमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर रूस और चीन ईरान और उत्तर कोरिया को महत्वपूर्ण परमाणु तकनीक देते हैं तो यह अमेरिका के लिए बड़ा खतरा होगा लेकिन अभी तक रूस ने ऐसा नहीं किया.
CSIS की रिपोर्ट में कहा गया कि 2025 में रूस ने ईरान को परमाणु ऊर्जा बढ़ाने में मदद की जैसे कम एनरिच्ड यूरेनियम देना और वैज्ञानिकों को रिसर्च सुविधाएं देना. उत्तर कोरिया ने ईरान को बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक दी है जैसे शहाब-3 उत्तर कोरिया की ह्वासोंग-14 से मिलती है लेकिन परमाणु हथियार तकनीक का कोई सबूत नहीं.
अमेरिकी कांग्रेस रिपोर्ट में कहा गया कि चीन ने ईरान को मिसाइल और डुअल-यूज सामान दिए हैं लेकिन सीधे हथियार नहीं. चीन, रूस, ईरान और उत्तर कोरिया का एक्सिस ऑफ एग्रेसर्स परमाणु क्षमता बढ़ा रहा है लेकिन सीधा हथियार ट्रांसफर नहीं.
रूस ने ईरान को S-300 एयर डिफेंस सिस्टम दिए हैं. कुल मिलाकर तकनीक साझा हो रही है लेकिन परमाणु बम देने का कोई पक्का सबूत नहीं.
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अगर ईरान के पास परमाणु हथियार हों तो युद्ध का परिणाम क्या होगा?
अगर ईरान के पास परमाणु हथियार होते तो अमेरिका-इजरायल और ईरान का युद्ध और ज्यादा खतरनाक हो जाता. ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान का रेजीम बदलना मुश्किल है. परमाणु हथियार होने से क्षेत्र में परमाणु दौड़ शुरू हो सकती है.
सीएफआर की रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप ने कहा कि ईरान को कभी परमाणु हथियार नहीं मिलने देंगे. युद्ध का मकसद रेजीम चेंज है लेकिन अगर ईरान के पास हथियार होते तो मध्य पूर्व में बड़ा संकट आता.
अल जजीरा की रिपोर्ट में कहा गया कि इजरायल का मकसद रेजीम चेंज है लेकिन ईरान के पास हथियार होने से युद्ध लंबा खिंच सकता है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से तेल कीमतें बढ़ेंगी. कुल मिलाकर ईरान के पास हथियार होने से क्षेत्रीय युद्ध परमाणु युद्ध में बदल सकता है और अमेरिका-इजरायल की जीत मुश्किल हो जाती.
ऋचीक मिश्रा