Ramadan 2026: पहला रोजा आज, जानें कौन होता है रोजेदार और क्या हैं इसके सही नियम

रमजान का पाक महीना शुरू हो गया है. आज पहला रोजा है. पहले रोजे के साथ ही लोग अल्लाह की बंदगी में जुट गए हैं. आइए जानते हैं कि रोजा रखने के नियम क्या होते हैं और ये इबादत कितनी कठिन होती है.

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आज रमजान का पहला रोजा है. (Photo: Pixabay) आज रमजान का पहला रोजा है. (Photo: Pixabay)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:08 AM IST

Ramadan 2026 Roza: देश में 18 फरवरी को रमजान के चांद का दीदार हुआ. मतलब रमजान का पाक महीना शुरू हो चुका है. रमजान का मुबारक महीना आते ही मस्जिदों में इबादत करने वालों की संख्या बढ़ जाती है. बाजारों में चारों तरफ खजूर और सेहरी के सामान से उठने वाली खुशबू फैलने लगती है. रोजे रखकर लोग अल्लाह की इबादत करते हैं. आज रमजान का पहला रोजा है. आइए इस पाक मौके पर आपको बताते हैं कि रोजा रखने के नियम क्या होते हैं और यह तपस्या कितनी कठिन होती है.

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रमजान का धार्मिक महत्व
इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, मुस्लिमों का पवित्र ग्रंथ कुरान इसी महीने अवतरित हुआ था. इसलिए इसे बरकत, माफी और मुक्ति का महीना भी कहा जाता है. रोजा इस्लाम के पांच मूल स्तंभों में शामिल है. इसका उद्देश्य केवल शरीर ही नहीं, बल्कि आत्मा को भी अनुशासित करना है. रोजा रखने वालों को रोजेदार कहा जाता है. एक रोजेदार भूख-प्यास सहन करके इंसान की जरूरतों और तकलीफों को महसूस करत है.

किसे रखना चाहिए रोजा?
इस्लाम धर्म में हर स्वस्थ मुसलमान के लिए रोजा रखना अनिवार्य माना गया है. हालांकि रोगी-बीमार, गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताओं को इसमें छूट दी गई है. इसके अलावा, यात्रा कर रहे लोग और मासिक धर्म के दौरान महिलाएं भी रोजा छोड़ सकती हैं. इस्लाम में छूटे गए रोजों की बाद में भरपाई के भी कुछ खास नियम बनाए गए हैं.

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रोजे का समय
रमजान के महीने में रोजा सुबह फज्र की नमाज से पहले सेहरी से शुरू होता है और सूर्यास्त के समय इफ्तार के साथ समाप्त होता है. सेहरी और इफ्तार रोजेदारों के लिए दो ऐसे समय हैं, जब उन्हें कुछ खाने की छूट होती है. सेहरी में पौष्टिक और हल्का भोजन लेने की सलाह दी जाती है, ताकि दिनभर शरीब में ऊर्जा बनी रहे. जबकि इफ्तार अक्सर खजूर और पानी से खोला जाता है. इस तरह सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक रोजेदार खाना, पानी और बुरे व्यवहार से परहेज करते हैं. इस बीच रोजेदार सिर्फ अल्लाह को याद करते हैं और नेक कामों पर ध्यान देते हैं.

किन बातों से रोजा टूटता है?
इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, जानबूझकर खाना-पीना या धूम्रपान करने से रोजा टूट सकता है. इसके अलावा झूठ बोलना, अपमान या गुस्सा करने से भी रोजा टूट सकता है. जो लोग अपने शब्दों के बाण से दूसरों के मन को ठेस पहुंचाते हैं, उन्हें भी इसका विशेष ख्याल रखना चाहिए. कहते है कि रोजे में सिर्फ पेट का नहीं, बल्कि नजर और जुबान के भी खास नियम होते हैं.

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