हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी, जिसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है, सभी एकादशी व्रतों में सबसे कठिन और श्रेष्ठ मानी जाती है. मान्यता है कि इस दिन बिना जल और अन्न के उपवास रखने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा मिलती है. पंचांग के अनुसार, इस वर्ष निर्जला एकादशी 25 जून 2026, गुरुवार को मनाई जा रही है. गुरुवार के दिन यह तिथि पड़ने से इसका आध्यात्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है.
निर्जला एकादशी के बाद कौन सी एकादशी है?
निर्जला एकादशी के ठीक बाद आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी आती है, जिसे योगिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस वर्ष योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा. योगिनी एकादशी के बाद आषाढ़ शुक्ल पक्ष में देवशयनी एकादशी आती है, जिससे चातुर्मास का शुभारंभ होता है.
योगिनी एकादशी का आध्यात्मिक लाभ
शास्त्रों के अनुसार, योगिनी एकादशी का व्रत समस्त पापों और रोगों का नाश करने वाला है. मान्यता है कि इस व्रत का पुण्य 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर फल देता है. यह व्रत मोक्ष प्राप्ति दिलाने वाला माना जाता है.
व्रत के नियम और पूजा विधि
तैयारी: व्रत का नियम दशमी तिथि की रात से ही शुरू हो जाता है, जिसमें अन्न का त्याग करना होता है.
पूजा: एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें. इस दिन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करना अत्यंत लाभकारी है.
सावधानी: इस दिन चावल का सेवन वर्जित है; केवल फलाहारी चीजों का ही प्रयोग करें.
पारण: व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद ही करना चाहिए. पारण के समय तुलसी के पत्ते और शुद्ध जल का उपयोग करना अत्यंत शुभ माना जाता है. ध्यान रखें कि द्वादशी तिथि के भीतर पारण न करना पाप के समान माना गया है.
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