Chaitra Navratri 2026 Sanyog: इस वर्ष चैत्र नवरात्र की शुरुआत 19 मार्च से होने जा रही है और भक्त 27 मार्च तक मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करेंगे. नवरात्र के अंतिम दिन रामनवमी मनाई जाएगी. ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, इस बार नवरात्र और हिंदू नव वर्ष से जुड़ी कुछ खास बातें सामने आ रही हैं, जो पूरे 89 साल बाद देखने को मिल रही हैं.
सनातन परंपरा के अनुसार, हिंदू नववर्ष की शुरुआत चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है और इसी दिन से विक्रम संवत भी शुरू माना जाता है. लेकिन इस बार प्रतिपदा तिथि के क्षय होने की वजह से नया संवत सीधे द्वितीया तिथि से आरंभ होगा. आने वाले वर्ष को रौद्र संवत्सर के नाम से जाना जाएगा. नया विक्रम संवत 2083 और शक संवत 1948 रहेगा.
पुराने वर्ष से शुरू होगा हिंदू नववर्ष
इस बार नवरात्र की शुरुआत पुराने साल में ही हो जाएगी, जबकि नया वर्ष 20 मार्च से नए पंचांग के अनुसार शुरू होगा. 19 मार्च को सुबह लगभग 6 बजकर 40 मिनट तक अमावस्या तिथि रहेगी, इसके बाद प्रतिपदा तिथि शुरू होगी. इसी दिन घरों और मंदिरों में कलश स्थापना की जाएगी और भक्त मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करेंगे. पंचांग के अनुसार, इस वर्ष संवत्सर के राजा गुरु और मंत्री मंगल होंगे. माना जाता है कि गुरु के राजा होने से धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में बढ़ोतरी होती है, जबकि मंगल मंत्री होने के कारण कुछ जगहों पर तनाव या अशांति की स्थिति भी बन सकती है.
नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के आगमन की सवारी भी दिन के अनुसार अलग-अलग मानी जाती है. इस बार नवरात्र की शुरुआत गुरुवार को होने के कारण मान्यता है कि मां पालकी (डोली) पर सवार होकर आएंगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पालकी पर माता का आगमन शुभ संकेत नहीं माना जाता है और इसे कभी-कभी महामारी या बड़ी बीमारियों के संकेत से भी जोड़ा जाता है. धार्मिक परंपरा में मां दुर्गा की सवारी का विशेष महत्व बताया गया है. सप्ताह के दिन के आधार पर माता के वाहन की मान्यता इस प्रकार है-
1. रविवार या सोमवार को मां का आगमन हाथी पर माना जाता है.
2. शनिवार या मंगलवार को माता घोड़े पर सवार मानी जाती हैं.
3. गुरुवार या शुक्रवार को मां पालकी में आती हैं.
4. बुधवार को माता का वाहन नौका माना जाता है.
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