TMC नेता की 'बांग्लादेशी नागरिकता' पर विवाद, HC के सख्त रुख के बाद बंगाल में सियासत तेज

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर बीजेपी लंबे समय से पश्चिम बंगाल में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों को नागरिकता देने के आरोप लगाती आई है लेकिन टीएमसी नेता आलो रानी सरकार की दोहरी नागरिकता का मामला सामने आने के बाद अब वह बुरी तरह फंस गई हैं.

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बोंगांव दक्षिण विधानसभा सीट से TMC उम्मीदवार थीं आलो रानी सरकार (फाइल फोटो) बोंगांव दक्षिण विधानसभा सीट से TMC उम्मीदवार थीं आलो रानी सरकार (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • कोलकाता,
  • 21 मई 2022,
  • अपडेटेड 2:47 PM IST
  • कलकत्ता HC ने TMC नेता की खारिज कर दी है याचिका
  • बांग्लादेश की नागरिकता ली, वोटर लिस्ट में है रानी सरकार का नाम

पश्चिम बंगाल में पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में दो देशों की नागरिकता रखने वाली महिला को टिकट देने के मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी विपक्ष के निशाने पर आ गई हैं. बीजेपी ने यह मामला सामने आने के बाद पार्टी का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की मांग की है. दरअसल तृणमूल कांग्रेस ने आलो रानी सरकार को बोंगांव दक्षिण विधानसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया था. इनके पास भारत और बांग्लादेश दोनों की नागरिकता है. कलकत्ता हाई कोर्ट ने शुक्रवार को टीएमसी नेता को लेकर कहा था कि किसी भारतीय द्वारा दोहरी नागरिकता रखना गैरकानूनी है. बीजेपी ने इसे मुद्दा बना लिया है.

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ऐसे होई कोर्ट पहुंचा मामला

टीएमसी नेता आलो रानी सरकार के सामाने बीजेपी से स्वप्न मजूमदार ने चुनाव लड़ा था. बीजेपी नेता ने इस सीट पर जीत भी हासिल की थी. टीएमसी नेता चुनाव परिणामों से असंतुष्ट होकर कोर्ट पहुंची गई थीं. यहां 20 मई को सुनवाई के दौरान उनकी बांग्लादेश की नागरिकता का पता चला, इसके बाद कलकत्ता हाई कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया है और उनकी नागरिकता को अवैध ठहरा दिया.

कोर्ट ने पूछा- कैसे जारी हुआ आधार कार्ड-वोटर आईडी

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सवाल किया कि बांग्लादेश की नागरिकता होने के बाद भी महिला नेता को कैसे भारतीय आधार कार्ड, वोटर कोर्ड और पैन कार्ड जारी कर दिया गया. टीएमसी उम्मीदवार द्वारा दोहरी नागरिकता रखने का मामला सामने आने के बाद अब बंगाल में विपक्ष में बैठी बीजेपी हमलावर हो गई है.

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कार्रवाई के चुनाव आयोग को भी लिखेगा कोर्ट

जस्टिस बिबेक चौधरी ने सुनवाई के दौरान कहा कि टीएमसी नेता बांग्लादेश की नागरिक हैं इसलिए वह भारत की नागरिकता के लिए कभी दावा नहीं कर सकतीं. उन्होंने यह भी कहा कि कोर्ट के आदेश की एक कॉपी चुनाव आयोग को भी भेजी जाएगी ताकि आयोग इस मामले में टीएमसी नेता के खिलाफ उचित कार्रवाई कर सके. 

हाई कोर्ट के आदेश को दूंगा चुनौती: रानी सरकार

महिला नेता का दावा है कि वह बंगाल में ही जन्मी हैं. उनके पिता और चाचा ने यहीं जीवन बिताया है, इसलिए अगर कोई उन्हें बांग्लादेशी बुलाता है तो उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. उन्होंने कहा कि वह कोर्ट के आदेश को डिविजन बेंच में चुनौती देंगी. उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ साजिश रची गई है. वह ममता बनर्जी की सिपाही हैं और वह आखिरी इस केस को लड़ेंगी.

11 साल की उम्र में बांग्लादेश के डॉक्टर से हुई थी शादी

टीएमसी नेता रानी सरकार का जन्म 1969 में हुगली में हुआ था. 11 साल की उम्र में ही उनका विवाह बांग्लादेश के डॉक्टर हरेंद्रनाथ सरकार से कर दिया गया था. शादी के बाद वह बांग्लादेश के वजीपुर इलाके में स्थायी रूप से रहने लगी थीं. उनका नाम बांग्लादेश की मतदाता सूची में भी दर्ज हो गया था. उन्हें वहां की नागरिकता भी मिल गई थी फिर कैसे यह महिला नेता बंगाल के कांचरापाड़ा में रह रही हैं.

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टीएमसी ने देश की संप्रभुता के साथ किया समझौता

बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को इस मामले में ममता बनर्जी को घेरा. उन्होंने कहा कि टीएमसी कानून की धारा 29ए की उप-धारा 5 के उल्लंघन की दोषी है. उसने एक विदेशी नागरिक को निर्वाचित कराने की कोशिश की. उसने भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता से समझौता कर देश के संविधान के प्रति निष्ठा नहीं रखी. उन्होंने सवाल किया कि क्या ऐसे राजनीतिक दल का रजिस्ट्रेशन रद्द नहीं किया जाना चाहिए?

TMC का काम बांग्लादेशियों को पहचान पत्र दिलाना 

शुभेंदु अधिकारी ने ट्वीट करते हुए आरोप लगाया कि TMC नेताओं को बांग्लादेशी प्रवासियों को अवैध रूप से पश्चिम बंगाल में बसने में मदद करने और अपने वोटर्स को बढ़ाने के लिए ऐसे लोगों को मतदाता पहचान पत्र देने के लिए जाना जाता है, लेकिन ऐसे लोगों को उम्मीदवार बनाना जो भारतीय नहीं हैं, यह पहले कभी नहीं हुआ. कोर्ट का आदेश आने के बाद चुनाव आयोग द्वारा अब कार्रवाई का इंतजार है.

(रिपोर्ट: दीपक देबनाथ)

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