EWS आरक्षण संवैधानिक है या नहीं? सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी, संविधान पीठ ने सुरक्षित रखा फैसला

केंद्र सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए संविधान में संशोधन कर 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया था. सुप्रीम कोर्ट में आर्थिक आधार पर आरक्षण के प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई पूरी हो गई है. सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने इस मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.

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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 27 सितंबर 2022,
  • अपडेटेड 5:13 PM IST

संविधान में संशोधन कर सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षण संस्थाओं में 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया था. केंद्र सरकार की ओर से किए गए इस संविधान संशोधन को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल हुई थीं. आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान करने वाले संविधान संशोधन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है.

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आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षण संस्थाओं में 10 फीसदी आरक्षण देने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई सात दिन चली. चीफ जस्टिस की अगुआई में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने सात दिन चली सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है.

सात दिन तक चली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि आर्थिक आधार पर आरक्षण संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन नहीं करता है. उन्होंने दलील दी कि आर्थिक आधार पर आरक्षण का फैसला संविधान के मूल ढांचे को और मजबूती प्रदान करता है.

सॉलिसीटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि संविधान की प्रस्तावना में भी आर्थिक न्याय की बात कही गई है. भारत के मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी, जस्टिस एस रवींद्र भट्ट, जस्टिस बेला माधुर्य त्रिवेदी और जस्टिस जेबी पारदीवाला की संविधान पीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है.

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सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से ये भी कहा है कि वो लिखित दलील भी दाखिल कर सकते हैं. संविधान पीठ तय करेगी कि सामान्य यानी अनारक्षित वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर तबके (EWS) के उम्मीदवारों के लिए 10 फीसदी आरक्षण के प्रावधान का फैसला संवैधानिक है या नहीं. इससे संविधान के मूल ढांचे पर कोई असर पड़ता है क्या?

 

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