भूतों की फोटो खींचने वाला फोटोग्राफर! जिसने लिंकन की आत्मा कैप्चर करने का किया था दावा

जब फोटोग्राफी की शुरुआत हुई थी. उसी वक्त इसके जरिए लोगों से ठगी करने का तरीका भी एक फोटोग्राफर ने ईजाद कर लिया था. वह फोटो में मरे हुए लोगों की 'आत्मा'दिखा देता था. हद तो तब हो गई थी, जब उसने राष्ट्रपति लिंकन के भूत की तस्वीर भी कैप्चर कर दिखा दी थी. चलिए जानते हैं कभी 'स्पिरिट फोटोग्राफर' के नाम से मशहूर इस महाठग की कहानी.

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 विलियम मूमलर नाम के ठग फोटोग्राफर ने फैलाई थी 'स्पिरिट फोटोग्राफी' की चालबाजी (Photo - Wiki) विलियम मूमलर नाम के ठग फोटोग्राफर ने फैलाई थी 'स्पिरिट फोटोग्राफी' की चालबाजी (Photo - Wiki)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 जून 2026,
  • अपडेटेड 6:58 AM IST

आज के दौर में फोटो और वीडियो एडिटिंग के जरिए फर्जी तस्वीरें बनाना आम बात है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब फोटोग्राफी की तकनीक नई-नई आई थी, तब भी एक शख्स लोगों को तस्वीरों के जरिए ठग रहा था? उसने ऐसा दावा किया कि वह कैमरे में मृत लोगों की आत्माओं को कैद कर सकता है. इतना ही नहीं, उसने अमेरिका के दिवंगत राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन की आत्मा तक को तस्वीर में दिखा दिया. हैरानी की बात यह है कि हजारों लोगों ने उसकी बात पर यकीन भी कर लिया.

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यह कहानी है 19वीं सदी के अमेरिका के विलियम मुमलर की, जिसे दुनिया का सबसे मशहूर 'स्पिरिट फोटोग्राफर' कहा जाता है. हालांकि बाद में उसकी सच्चाई एक ठग और धोखेबाज के रूप में सामने आई.

जब पूरा अमेरिका शोक में डूबा था
हिस्ट्रीएक्स्ट्रा की रिपोर्ट के मुताबिक, जब 1865 में अमेरिकी गृहयुद्ध खत्म हुआ था. यह युद्ध इतना भयानक था कि इसमें करीब 7.5 लाख लोगों की मौत हो गई. हजारों परिवारों ने अपने बेटे, पति और पिता खो दिए थे. देशभर में लोग अपने प्रियजनों के बिछड़ने के दुख से जूझ रहे थे. हर कोई यह जानना चाहता था कि क्या मरने के बाद भी किसी तरह अपने अपनों से संपर्क किया जा सकता है.

इसी माहौल में एक नया विचार तेजी से फैलने लगा, जिसे "स्पिरिचुअलिज्म" कहा जाता था. इसके समर्थकों का दावा था कि जीवित लोग मृतकों की आत्माओं से संपर्क कर सकते हैं. बस, यहीं से विलियम मुमलर का खेल शुरू हुआ. 

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विलियम मुमलर मूल रूप से बोस्टन का रहने वाला था. एक दिन तस्वीरें विकसित करते समय उसे डबल एक्सपोजर की तकनीक का पता चला. इसमें एक ही फोटो प्लेट पर दो तस्वीरें आ जाती थीं.

मुमलर ने जल्द ही समझ लिया कि इस तकनीक का इस्तेमाल करके लोगों को यह विश्वास दिलाया जा सकता है कि फोटो में किसी मृत व्यक्ति की आत्मा दिखाई दे रही है.बस यहीं से उसने अपना ठगी का कारोबार शुरू कर दिया.

फोटो में ऐसे दिखाता था 'भूत'
मुमलर अपने स्टूडियो में लोगों की तस्वीर खींचता था. इसके बाद वह तकनीकी चालबाजियों का इस्तेमाल करता था. वह एक तस्वीर के ऊपर दूसरी तस्वीर की नेगेटिव इमेज चढ़ा देता था. लाइट, फोकस और कैमरे की सेटिंग्स के जरिए वह तस्वीर में धुंधली आकृतियां बना देता था.

जब फोटो तैयार होती, तो उसमें किसी व्यक्ति के पीछे या बगल में एक हल्की-सी पारदर्शी छवि दिखाई देती. मुमलर दावा करता कि यह उस व्यक्ति के मृत रिश्तेदार की आत्मा है, जो कैमरे में कैद हो गई है.

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आज के नजरिए से देखें तो वे तस्वीरें बेहद साधारण और नकली लगती हैं. लेकिन उस समय लोगों को फोटोग्राफी की तकनीक की ज्यादा जानकारी नहीं थी. इसलिए वे आसानी से उसके झांसे में आ जाते थे.

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मृत रिश्तेदारों की तस्वीर के लिए लगती थी लाइन
अपने प्रियजनों को खो चुके लोग बड़ी संख्या में मुमलर के स्टूडियो पहुंचने लगे. वे उम्मीद करते थे कि शायद उन्हें अपने मृत बेटे, पति या माता-पिता की आखिरी झलक मिल जाए. मुमलर उनकी भावनाओं का फायदा उठाता था और तस्वीरों में कथित "आत्माएं" जोड़कर उन्हें बेचता था.धीरे-धीरे उसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि वह पूरे अमेरिका में मशहूर हो गया.

जब फोटो में दिखा दी अब्राहम लिंकन की आत्मा
मुमलर की सबसे चर्चित तस्वीर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन से जुड़ी थी.
उसने राष्ट्रपति लिंकन की पत्नी मैरी टॉड लिंकन की एक तस्वीर खींची. फोटो में मैरी के पीछे अब्राहम लिंकन की धुंधली आकृति दिखाई गई थी, जैसे उनकी आत्मा उनके कंधे पर हाथ रखे खड़ी हो.

यह तस्वीर देखते ही देखते सनसनी बन गई. बहुत से लोगों ने इसे इस बात का सबूत मान लिया कि मरने के बाद भी आत्माएं अपने प्रियजनों के साथ रहती हैं. हालांकि बाद में विशेषज्ञों ने बताया कि यह सिर्फ डबल एक्सपोजर का खेल था.

आखिरकार अदालत पहुंचा मामला
मुमलर की बढ़ती लोकप्रियता के साथ उस पर सवाल भी उठने लगे. 1869 में न्यूयॉर्क में उसे धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया. आरोप था कि वह लोगों के दुख और भावनाओं का फायदा उठाकर पैसे कमा रहा है.

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अदालत में विशेषज्ञों ने विस्तार से बताया कि तस्वीरों में दिखाई देने वाली आत्माएं असली नहीं थीं, बल्कि कैमरे और नेगेटिव के जरिए बनाई गई नकली छवियां थीं. कोर्ट में यह भी दिखाया गया कि ऐसी तस्वीरें तकनीकी तरीकों से आसानी से तैयार की जा सकती हैं.

फिर भी बच निकला मुमलर
इतने सबूतों के बावजूद मुमलर को सजा नहीं मिली. उस समय अमेरिका में स्पिरिचुअलिज्म बेहद लोकप्रिय हो चुका था. बड़ी संख्या में लोग आत्माओं के अस्तित्व पर विश्वास करते थे.कहा जाता है कि मुकदमे से जुड़े कई लोग और जूरी सदस्य भी इस विचारधारा से प्रभावित थे. इसी वजह से पर्याप्त शक होने के बावजूद मुमलर बरी हो गया.

अमेरिका से ब्रिटेन तक फैल गया यह ट्रेंड
मुमलर की तस्वीरों ने सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि ब्रिटेन में भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ा दी. विक्टोरियन दौर के ब्रिटेन में भी आत्माओं और परालौकिक शक्तियों को लेकर लोगों में उत्सुकता थी. वहां भी कई तथाकथित स्पिरिट फोटोग्राफर सामने आए और लोगों को ऐसी ही तस्वीरें दिखाने लगे.यह सिलसिला 20वीं सदी तक चलता रहा.

लोगों के दुख को बनाया कारोबार
इतिहासकारों का मानना है कि विलियम मुमलर की सफलता की सबसे बड़ी वजह कोई जादू या रहस्य नहीं था. असल वजह थी लोगों का दर्द.गृहयुद्ध में लाखों लोगों की मौत के बाद परिवार अपने प्रियजनों को फिर से देखने या उनसे जुड़ने की उम्मीद तलाश रहे थे. मुमलर ने इसी भावना को समझा और कैमरे की नई तकनीक का इस्तेमाल करके ऐसा भ्रम पैदा किया कि लोग उसे सच मान बैठे.

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यानी फोटोग्राफी के शुरुआती दौर में ही एक ठग ने तकनीक और इंसानी भावनाओं का ऐसा मिश्रण तैयार किया कि उसने मृतकों की आत्मा दिखाने का दावा करके हजारों लोगों को अपने जाल में फंसा लिया और यही चालाकी उसे इतिहास के सबसे चर्चित धोखेबाज फोटोग्राफरों में शामिल कर गई.

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